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Jabalpur: मृत्यु प्रमाण-पत्र हो गया है जारी, नहीं कर सकते बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई, आवेदन खारिज
Mon, 01 May 2023 07:03 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 01 May 2023 07:03 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने मृत्यु प्रमाण जारी होने के कारण दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण को 24 फरवरी 2023 को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट द्वारा बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज किए जाने के संबंध में पारित आदेश को वापस लेने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद पूर्व में पारित आदेश को उचित ठहराते हुए आवेदन को खारिज कर दिया।
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जबलपुर हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आरक्षक पति के लापता होने के दस साल बाद पत्नी ने साल 2022 में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने बताया कि उसके पति का मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी हो गया है। इसके अलावा याचिकाकर्ता पेंशन का लाभ ले रही है। उसके पुत्र ने भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने याचिका को खारिज किए जाने के आदेश को वापस लेने के लिए दायर आवेदन को खारिज कर दिया।
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गौरतलब है, पन्ना जिले के शाह नगर निवासी गीता तिवारी की तरफ से दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया था कि उसके पति राजेन्द्र तिवारी पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पदस्थ थे। उसके पति मार्च 2012 को लापता हो गए थे, जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पति के लापता होने की रिपोर्ट उसके द्वारा उसी दिन पुलिस में दर्ज करवाई गई थी।
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याचिका की तरफ से पेश किए गए जवाब में बताया गया कि कर्तव्यों में लापरवाही, गोपनीय सूचना सार्वजनिक करने तथा अनाधिकृत अनुपस्थिति के कारण आरक्षण राजेन्द्र तिवारी के खिलाफ जून 2011 में विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए थे। विभागीय जांच के दौरान भी वह अनुपस्थित रहा। उसकी तलाश के लिए पुलिस विभाग द्वारा पम्प लेट वितरित किए गए तथा सभी जिलों में उसके गुमशुदा होने के संबंध में प्रकाशन भी करवाया गया। साक्षियों के बयान दर्ज करने के बाद उसके गुमशुदा होने के संबंध में राजपत्र में प्रकाशन भी करवाया गया था।
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विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर उसे अनिर्वाय सेवा निवृत्ति से दंडित किया गया था। सात साल तक सुराग नहीं मिलने पर सितम्बर 2019 को उसका मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया था। याचिकाकर्ता द्वारा पेंशन का लाभ लिया जा रहा है तथा उसके पुत्र ने भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।
