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Jabalpur: वेदिका हत्याकांड में कथित BJYM नेता को जमानत, हत्या या गैर इरादतन हत्या का फैसला ट्रायल कोर्ट करेगी
Mon, 22 Jul 2024 09:36 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 22 Jul 2024 09:36 PM IST
सार
जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया कि जिस पुलिस अधिकारी के ने छात्रा का बयान दिया था, जिला न्यायालय में उससे क्रॉस किया जा चुका है। इसके अलावा डेढ़ दर्जन से अधिक गवाह के बयान भी दर्ज हो चुके हैं।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वेदिका हत्याकांड के आरोपी तथा कथित भाजयुमो नेता प्रियांश विश्वकर्मा को हाईकोर्ट से जमानत का लाभ मिल गया है। ट्रायल कोर्ट में डेढ़ दर्जन से अधिक गवाहों के बयान दर्ज हो गए हैं। हाई कोर्ट जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने आरोपी को जमानत का लाभ देते हुए कहा है कि यह गैर इरादतन हत्या या हत्या थी, इसका निर्णय सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट करेगी।
गौरतलब है कि संजीवनी नगर थानान्तर्गत कथित भाजयुमो के नेता प्रियांश विश्वकर्मा ने अपने कार्यालय में एमबीए छात्रा को गोली मार दी थी। घायल छात्रा को लेकर आरोपी अपनी गाड़ी में घूमता रहा। कथित आरोपी ने परिजनों को सूचना दिए बिना छात्रा को उपचार के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाकर भाग गया था। घायल छात्रा को एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इसमें उसका कहना था कि प्रियांश ने उसे गोली मारी है। पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया कि जिस पुलिस अधिकारी के ने छात्रा का बयान दिया था, जिला न्यायालय में उससे क्रॉस किया जा चुका है। इसके अलावा डेढ़ दर्जन से अधिक गवाह के बयान भी दर्ज हो चुके हैं। जमानत याचिका का विरोध करते हुए एकलपीठ को बताया गया कि आरोपी प्रभावशील परिवार का है। घटना का मुख्य गवाह उसके ऑफिस का चपरासी था, जो पक्ष विरोधी हो गया है। इसके अलावा आरोपी की बहन ने मृतका की बहन को फोन कर समझौते के लिए दबाव बना रही है। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद आरोपी को सशर्त जमानत का लाभ प्रदान करते हुए उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे ने पैरवी की।
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गौरतलब है कि संजीवनी नगर थानान्तर्गत कथित भाजयुमो के नेता प्रियांश विश्वकर्मा ने अपने कार्यालय में एमबीए छात्रा को गोली मार दी थी। घायल छात्रा को लेकर आरोपी अपनी गाड़ी में घूमता रहा। कथित आरोपी ने परिजनों को सूचना दिए बिना छात्रा को उपचार के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाकर भाग गया था। घायल छात्रा को एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इसमें उसका कहना था कि प्रियांश ने उसे गोली मारी है। पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
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जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया कि जिस पुलिस अधिकारी के ने छात्रा का बयान दिया था, जिला न्यायालय में उससे क्रॉस किया जा चुका है। इसके अलावा डेढ़ दर्जन से अधिक गवाह के बयान भी दर्ज हो चुके हैं। जमानत याचिका का विरोध करते हुए एकलपीठ को बताया गया कि आरोपी प्रभावशील परिवार का है। घटना का मुख्य गवाह उसके ऑफिस का चपरासी था, जो पक्ष विरोधी हो गया है। इसके अलावा आरोपी की बहन ने मृतका की बहन को फोन कर समझौते के लिए दबाव बना रही है। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद आरोपी को सशर्त जमानत का लाभ प्रदान करते हुए उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे ने पैरवी की।
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