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Jabalpur: सार्वजनिक नहीं होंगी ADJ व सिविल जज परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
Fri, 02 Sep 2022 09:20 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 02 Sep 2022 09:20 PM IST
सार
सूचना के अधिकार के तहत सिविल जज व एडीजे एग्जाम की उत्तर पुस्तिकाएं प्रदान करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
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- फोटो : istock
विस्तार
सिविल जज व एडीजे एग्जाम की उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक नहीं की जा सकेंगी। हाईकोर्ट ने ये फैसला दिया है। सूचना के अधिकार के तहत सिविल जज व एडीजे एग्जाम की उत्तर पुस्तिकाएं प्रदान करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस डीडी बसंल की युगलपीठ ने पारित आदेश में याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि पब्लिक डोमेन में फ्री सूचना पहुंचाने का प्रस्ताव आकर्षक है परंतु व्यवहारिक नहीं। बता दें कि एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस एनजीओ की तरफ से याचिका लगाई गई थी। इसमें कहा गया था कि सिविल जज मुख्य परीक्षा की कापियां सार्वजनिक होना चाहिए।सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिकाएं प्रदान की जानी चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। सिविल जज परीक्षा में आरक्षित श्रेणी के बहुत से पदों पर सिलेक्शन नहीं किया गया है। जिसके कारण परीक्षा परिणाम के आधार पर चयन प्रक्रिया के निष्पक्ष होने पर आशंका बनी हुई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित फैसलों का हवाला भी दिया गया था।
युगलपीठ ने सुनवाई के बाद 25 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को पारित अपने फैसले में कहा है कि सूचना के अधिकार के एक्ट में कई जानकारी नहीं प्रदान करने का उल्लेख किया गया है। आरटीआई के तहत अनावश्यक जानकारी मांगी जाने लगी है। जिसके कारण जानकारी प्राप्त करने तथा उसे उपलब्ध करवाने में कर्मचारियों का समय बर्बाद होता है। अगर इसको बढ़ावा दिया जाएगा तो कर्मचारियों का 75 प्रतिशत समय इसी कार्य में बर्बाद हो जाएगा। कोर्ट ने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि किसी उम्मीदवार द्वारा लिखित उत्तर पुस्तिका उसकी गोपनीय व व्यक्तिगत जानकारी है। उम्मीदवार की मर्जी के खिलाफ उसे किसी को नहीं दे सकते हैं।
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हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस डीडी बसंल की युगलपीठ ने पारित आदेश में याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि पब्लिक डोमेन में फ्री सूचना पहुंचाने का प्रस्ताव आकर्षक है परंतु व्यवहारिक नहीं। बता दें कि एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस एनजीओ की तरफ से याचिका लगाई गई थी। इसमें कहा गया था कि सिविल जज मुख्य परीक्षा की कापियां सार्वजनिक होना चाहिए।सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिकाएं प्रदान की जानी चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। सिविल जज परीक्षा में आरक्षित श्रेणी के बहुत से पदों पर सिलेक्शन नहीं किया गया है। जिसके कारण परीक्षा परिणाम के आधार पर चयन प्रक्रिया के निष्पक्ष होने पर आशंका बनी हुई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित फैसलों का हवाला भी दिया गया था।
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युगलपीठ ने सुनवाई के बाद 25 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को पारित अपने फैसले में कहा है कि सूचना के अधिकार के एक्ट में कई जानकारी नहीं प्रदान करने का उल्लेख किया गया है। आरटीआई के तहत अनावश्यक जानकारी मांगी जाने लगी है। जिसके कारण जानकारी प्राप्त करने तथा उसे उपलब्ध करवाने में कर्मचारियों का समय बर्बाद होता है। अगर इसको बढ़ावा दिया जाएगा तो कर्मचारियों का 75 प्रतिशत समय इसी कार्य में बर्बाद हो जाएगा। कोर्ट ने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि किसी उम्मीदवार द्वारा लिखित उत्तर पुस्तिका उसकी गोपनीय व व्यक्तिगत जानकारी है। उम्मीदवार की मर्जी के खिलाफ उसे किसी को नहीं दे सकते हैं।
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