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Jabalpur: अंतरजातीय विवाह करने पर नहीं हो धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत कार्रवाई, फैसला सुरक्षित

Mon, 14 Nov 2022 08:51 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 14 Nov 2022 08:51 PM IST
सार

भोपाल निवासी आजम खान, एचएल हरदेनिया सहित दायर आधा दर्जन याचिकाओं में कहा गया था कि प्रदेश सरकार द्वारा लागू किया गया धर्म स्वतंत्रता अधिनियम अवैधानिक है।

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Jabalpur: Action should not be taken on inter-caste marriage under Religious Freedom Act, decision reserved
court new - फोटो : istock

विस्तार

मध्य प्रदेश सरकार के धर्म स्वतंत्रता कानून को अवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में आधा दर्जन याचिका दायर की गई हैं। अंतरजातीय विवाह करने पर उक्त कानून के तहत कार्रवाई नहीं किए जाने की अंतरिम राहत चाहते हुए हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया गया था। हाईकोर्ट जस्टिस सुजय पॉल तथा जस्टिस जस्टिस प्रकाशचंद्र गुप्ता की युगलपीठ ने सुनवाई के बाद अंतरिम राहत पर फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए हैं।
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बता दें कि भोपाल निवासी आजम खान, एचएल हरदेनिया सहित दायर आधा दर्जन याचिकाओं में कहा गया था कि प्रदेश सरकार द्वारा लागू किया गया धर्म स्वतंत्रता अधिनियम अवैधानिक है। यह अधिनियम संविधान की अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 के सिद्धांतों तथा व्यक्ति के धर्म परिवर्तन व धर्मनिरपेक्षता के अधिकार का उल्लंघन कर रहा है। याचिका में कहा गया था कि इस अधिनियम की धारा 3, 4, 5, 6, 7, 10, 12 व 13 के प्रावधान संविधान में मिले मौलिक अधिकारों के विपरीत हैं।
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याचिका में कहा गया था कि बालिग व्यक्तियों को संविधान में स्वैच्छा से शादी का अधिकार प्राप्त है। नए कानून में डराकर, धमकाकर, छुपाकर शादी करने पर तीन से दस साल की सजा का प्रावधान है और अन्य व्यक्ति भी शिकायत कर सकता है। प्रदेश में दो प्रकरण ऐसे दर्ज हुए हैं, जिनका विवाह चार साल पहले हुआ था। विवाह के बाद विवाद होता है तो इस कानून के तहत कार्यवाही हो सकती है।
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याचिकाकर्ताओं की तरफ से अंतरजातीय विवाह करने पर उक्त अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं किए जाने की अंतरिम राहत चाही गई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने ऐसे आदेश पारित किए हैं। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अंतरिम राहत पर फैसला सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा, शुगफता सन्नो खान ने पैरवी की।
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