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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   If duty is not done then no permission is needed to prosecute, Supreme Court overturns High Court's order

MP News: ड्यूटी नहीं की तो मुकदमा चलाने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का आदेश

Sun, 16 Apr 2023 06:58 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: रवींद्र भजनी Updated Sun, 16 Apr 2023 06:58 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में हाईकोर्ट का आदेश पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई ड्यूटी नहीं करता तो उसके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अनुमति की आवश्यकत नहीं है। 

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If duty is not done then no permission is needed to prosecute, Supreme Court overturns High Court's order
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डीएसपी सुरेखा परिवार सहित अन्य पुलिसकर्मियों को 23 साल पुराने प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अभियोजन की अनुमति नहीं होने के कारण जिला न्यायालय द्वारा दर्ज किए गए प्रकरण को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय ओक तथा जस्टिस राजेश बिंदल ने अपील स्वीकार की और कहा कि आधिकारिक कर्तव्यों का पालन स्पष्ट नहीं होने पर अभियोजन की अनुमत्ति आवश्यक नहीं है। युगल पीठ ने निचली अदालत द्वारा तय आरोप को सही मानते हुए हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया।

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अपीलकर्ता डॉ. मुश्ताक मंसूरी की तरफ से दायर अपील में कहा गया था कि उसकी पत्नी महजबी अंजूम ने जबलपुर महिला थाने में उसके तथा परिजनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने धारा 498, 506, 34 तथा दहेज एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था। महिला थाने में पदस्थ एएसआई सुलेखा परमार सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने सात जुलाई 2000 की सुबह लगभग 5 बजे अनूपपुर उसके घर पर दबिश दी थी। पुलिस टीम ने उनके पिता, भाई तथा उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की थी। बाल पकडकर बाहर खींचते हुए लाए थे। इसके अलावा घर में रखे 15 हजार रुपये तथा सोने के जेवर निकाल लिए थे। इसके बाद पुलिस हथकड़ी लगाकर उन्हें पैदल अनूपपुर थाने तक लाई थी। इस दौरान घर के बाहर बडी संख्या में लोग एकत्र हो गए थे। परिचितजन जब थाने पहुंचे तो पुलिस टीम ने उन्हें छोड़ने के एवज में 30 हजार रुपये की मांग की थी। रकम नहीं देने पर पुलिस टीम उन्हें जबलपुर लेकर आई और महिला थाने के लॉकअप में बंद कर दिया था।

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पुलिसकर्मियों के खिलाफ उनके पिता ने जिला न्यायालय में परिवाद दायर किया था। जिला न्यायालय ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। जिला न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सुलेखा परमार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय के समक्ष पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए याचिका को खारिज कर दिया था। जिला न्यायालय ने अनावेदक पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इसके बाद अनावेदक सुलेखा परमार ने फिर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने धारा 197 के तहत अभियोजन की अनुमति नहीं होने के कारण जिला न्यायालय के आदेश को खारिज करने की मांग की थी। उसे स्वीकार कर लिया था।  

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सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि महिला थाना जबलपुर के अधिकार क्षेत्र में अनूपपुर जिला नहीं आता है। इसके बावजूद भी पुलिस टीम ने सुबह पांच बजे दबिश दी। आधिकरिक कर्तव्य स्पष्ट नहीं होने के कारण अभियोजन की अनुमति आवश्यक नही है। सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए जिला न्यायालय के आदेश को सही करार दिया है।

 


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