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MP: अनूपपुर बिजुरी में भ्रष्टाचार मामले में हाईकोर्ट सख्त, कहा- 24 घंटे में पेश करो विभागीय जांच की रिपोर्ट

Mon, 25 Jul 2022 10:37 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 25 Jul 2022 10:37 PM IST
सार

बिजुरी निवासी राजेश द्विवेदी की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि नगर परिषद बिजुरी द्वारा एवं अन्य अधिकारियों की संरक्षण में 50 करोड़ रुपये की राशि से अधिक का भ्रष्टाचार होने संबंधित खबर अखबार में प्रकाशित हुई थी। फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। 

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High court strict in corruption case in Anuppur Bijuri, said-submit report of departmental inquiry in 24 hours
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अनूपपुर जिले की आदिवासी बहुल बिजुरी नगर परिषद में करोड़ों के भ्रष्टाचार संबंधी मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने 24 घंटों में विभागीय जांच की फाइनल रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए हैं।
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बता दें कि बिजुरी निवासी राजेश द्विवेदी की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि बिजुरी नगर परिषद अविकसित है और बहुसंख्यक आबादी आदिवासी है। नगर परिषद बिजुरी द्वारा एवं अन्य अधिकारियों की संरक्षण में 50 करोड़ रुपये की राशि से अधिक का भ्रष्टाचार होने संबंधित खबर अखबार में प्रकाशित हुई थी। इसके बावजूद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। नगर परिषद बिजुरी द्वारा नागरिकों को पीने के लिए काला पानी और गुणवत्ता विहीन सड़क, मनमाने तरीके से बिल बनाकर सरकार के खाते से भुगतान जैसे अनेक कार्यों में अनियमितताएं पाई गई थीं। 
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इतना ही नहीं पूर्व में किए गए ऑडिट रिपोर्ट्स में भी नगर परिषद बिजुरी द्वारा एक बड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया गया था। व्याप्त भ्रष्टाचार और आदिवासियों डेवलपमेंट के लिए दिए गए पैसों का दुरुपयोग होते देख इस संबंध में कई बार संचालक शहरी प्रशासन, विकास निदेशालय भोपाल मप्र, सह संचालक शहरी प्रशासन, विकास निदेशालय शहडोल एवं आर्थिक अपराध शाखा भोपाल को नगर परिषद व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच करने पत्र लिखे गए। जिस पर जांच के आदेश हुए और भ्रष्टाचार होने के संबंध में जांच प्रतिवेतन भी प्रस्तुत किए गए। इसके बावजूद भी दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया था कि जांच में कुल 26 व्यक्ति दोषी पाए गए हैं। जिसमें 18 विभागीय व्यक्तियों के खिलाफ  विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। दोषी अन्य व्यक्तियों के खिलाफ उनके वरिष्ठ अधिकारी को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है। इसके अलावा तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा राज्य सरकार से की गई है। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई दौरान आवेदक की तरफ से एडमिनिस्ट्रेटिव नियुक्त करने की मांग करते हुए आवेदन पेश किया गया। सरकार की तरफ से बताया गया कि विभागीय जांच की समय सीमा निर्धारित की गई है। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता धीरज कुमार तिवारी ने पक्ष रखा।
 
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