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Jabalpur News: सीबीआई जांच की चेतावनी के साथ मिली अंतिम मोहलत, HC ने कहा- याचिकाकर्ता को दें मांगा गया डाटा

Tue, 04 Feb 2025 02:55 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 04 Feb 2025 02:55 PM IST
सार

युगलपीठ ने  कहा है कि अगली सुनवाई में जानकारी प्रस्तुत नहीं करने पर सीबीआई से जांच कराने पर विचार किया जाएगा। युगलपीठ ने अपने कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा मांगा गया डाटा उपलब्ध कराया जाए।

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Final extension given with warning to consider CBI investigation
जबलपुर हाईकोर्ट।

विस्तार

जबलपुर हाईकोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर साल 2002-23 में जीएनएम पाठ्यक्रम में प्रवेश की अनुमति नहीं होने के बावजूद भी रजिस्ट्रार के आदेश पर जिन छात्रों को दाखिले दिए गए थे, उनकी जानकारी प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया था। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से जानकारी प्रस्तुत करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। जस्टिस संजय द्विवेदी तथा जस्टिस एके पालीवाल की युगलपीठ ने अंतिम मोहलत प्रदान करते हुए कहा है कि अगली सुनवाई में जानकारी प्रस्तुत नहीं करने पर सीबीआई से जांच कराने पर विचार किया जाएगा। युगलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा मांगा गया डाटा उपलब्ध कराया जाए।

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गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित किए जाने को चुनौती दी गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान पूर्व में याचिकाकर्ता की तरफ से प्रस्तुत आवेदन में कहा गया था कि नर्सिंग घोटाले की अनियमितताओं में लिप्त एक इंस्पेक्टर को काउंसिल का रजिस्ट्रार और तत्कालीन निदेशक को अध्यक्ष बना दिया गया है। दोनों अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद रजिस्ट्रार अनीता चंद्र और अध्यक्ष जितेश चंद्र शुक्ला को तत्काल पद से हटाने के आदेश जारी किए हैं।
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पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया था कि आदेश के बावजूद भी दोनों अधिकारियों को हटाया नहीं गया है। काउंसिलिंग कार्यालय से रजिस्ट्रार चार बक्से कागजात लेकर गई हैं। दोनों अधिकारियों को पद से नहीं हटाए जाने पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की थी, जिसके बाद सरकार ने 24 घंटे में आदेश का पालन करने का आश्वासन दिया था।
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पिछली सुनवाई के दौरान काउंसिल के रजिस्ट्रार की ओर से बताया गया कि कार्यालय में 13 से 19 दिसंबर तक का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है। इसे गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने कहा था कि आदेश के बावजूद भी डाटा को सुरक्षित नहीं रखा गया। रजिस्ट्रार कोर्ट के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रहे हैं। युगलपीठ ने भोपाल पुलिस आयुक्त तथा साइबर सेल प्रभारी को निर्देश दिया था कि सीसीटीवी फुटेज को पुनः प्राप्त करने के लिए सभी संभावित प्रयास करें। तत्कालीन रजिस्ट्रार के फोन लोकेशन की भी जानकारी प्राप्त करें, जिससे कार्यालय में उनकी भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज की भी जांच करें, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि अपराधियों ने क्या-क्या चुराया है। युगलपीठ ने 15 दिनों में सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए थे।


युगलपीठ ने सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर साल 2002-23 में जीएनएम पाठ्यक्रम में प्रवेश की अनुमति नहीं होने के बावजूद भी रजिस्ट्रार के आदेश पर जिन छात्रों को दाखिला दिया गया था, उनकी जानकारी प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया था। याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने समय प्रदान करने का आग्रह किया। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त चेतावनी के साथ अंतिम अवसर प्रदान करते हुए अगली सुनवाई 10 फरवरी को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।

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