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Jabalpur: दामाद को खाली करना होगा ससुर का मकान, HC ने याचिकाकर्ता को दिया 30 दिन का समय, जानिए क्या है मामला?
Wed, 29 Jan 2025 02:36 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2025 02:36 PM IST
सार
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अनावेदक वृद्ध सेवानिवृत्त कर्मचारी है और भविष्य निधि से अंशकालीन पेंशन मिल रही है। उन्हें अपनी बीमार पत्नी और बच्चों के देखरेख के लिए मकान की आवश्यकता है। जिसे आधार मानते हुए युगलपीठ ने अपील खारिज कर दी।
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जबलपुर हाईकोर्ट
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विस्तार
मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट की युगलपीठ ने एक अहम आदेश में कहा है कि स्वेच्छा से रहने की अनुमति देने के बाद भी माता पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण व कल्याण अधिनियम 2007 के तहत दामाद को मकान खाली करने का आदेश दिया जा सकता है। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने सुनवाई में पाया कि वृद्ध ससुर के पास भविष्य निधि पेंशन ही आय का स्त्रोत है। पत्नी और बच्चों के पालन के लिए उसे मकान की आवश्यकता है। युगलपीठ ने दामाद को तीस दिनों के अंदर मकान खाली करने के आदेश जारी किए हैं।
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दरअसल, भोपाल निवासी दिलीप मरमठ की तरफ से दायर याचिका में ससुर का मकान को खाली किए जाने के आदेश को चुनौती दी गयी थी। अपील में कहा गया था कि उसके ससुर नारायण वर्मा 78 साल ने माता पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के तहत एसडीएम के समक्ष अपील दायर की थी। एसडीएम ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए ससुर के पक्ष में आदेश पारित किए थे। जिसके खिलाफ उसने कलेक्टर भोपाल के समक्ष अपील प्रस्तुत की थी। कलेक्टर द्वारा अपील खारिज करने के बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। एकलपीठ के याचिका खारिज किए जाने के कारण उक्त अपील दायर की गई है।
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अपील में तर्क दिया गया था कि माता पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण व कल्याण अधिनियम 2007 की धारा 2 में दी गई बच्चों की परिभाषा के अंतर्गत दामाद नहीं आता है। इसके अलावा उसने घर के निर्माण के लिए दस लाख रुपये दिये थे। इस संबंध में उसके द्वारा बैंक स्टेटमेंट भी प्रस्तुत किया गया था। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अनावेदक वृद्ध ने बेटी ज्योति और अपीलकर्ता दामाद दिलीप मरमठ को अपने मकान में रहने की अनुमति दी। जिसके बदले में उन्होंने वृद्ध का ख्याल रखना स्वीकार किया था। साल 2018 में एक दुर्घटना में बेटी की मौत हो गई थी। जिसके बाद दामाद ने दूसरी शादी कर ली। इसके बाद दामाद ने वृद्ध ससुर को खाना खर्चा देना बंद कर दिया। जिसके कारण उसने उक्त एक्ट के तहत आवेदन किया था।
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युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि दामाद के विरुद्ध इस अधिनियम के अंतर्गत निष्कासन का प्रकरण चल सकता है। संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम के अंतर्गत संपत्ति का स्थानांतरण नहीं किया गया है। अनावेदक वृद्ध बीएचईएल का सेवानिवृत्त कर्मचारी है और भविष्य निधि से अंशकालीन पेंशन मिल रही है। उन्हें अपनी बीमार पत्नी और बच्चों के देखरेख के लिए मकान की आवश्यकता है। जिसे आधार मानते हुए युगलपीठ ने अपील को खारिज कर दी और याचिकाकर्ता को 30 दिन में मकान खाली करने के निर्देश दिए।
