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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   Decision on conducting MPPSC Special Exam 2019 in Supreme Court, next hearing will be on 28th

MP News: MPPSC स्पेशल परीक्षा 2019 कराने पर फैसला सुप्रीम कोर्ट के पाले में, 28 को होगी अगली सुनवाई

Tue, 11 Apr 2023 12:10 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: रवींद्र भजनी Updated Tue, 11 Apr 2023 12:10 PM IST
सार

MPPSC 2019 स्पेशल परीक्षा का मसला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। स्पेशल परीक्षा कराने के हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर 28 अप्रैल को सुनवाई होगी। 

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Decision on conducting MPPSC Special Exam 2019 in Supreme Court, next hearing will be on 28th
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एससी-एसटी व ओबीसी के लगभग 2700 अभ्यर्थियों की विशेष परीक्षा कराने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई थी। उस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विशेष परीक्षा को याचिका के निर्णय के अधीन रखने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजय कुमार की बैंच ने अनावेदकों को नोटिस जारी किए हैं। अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।  

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सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन ने दायर की है। आवेदकों की ओर से कहा गया है कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश संविधान के अनुच्छेद-14 के विरुद्ध है। एक चयन में दो अलग-अलग परीक्षाएं नहीं ली जा सकती। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की विशेष परीक्षा आयोजित कर तत्पश्चात् नॉर्मलाइजेशन कर सभी अभ्यर्थियों का साक्षात्कार कराया जाए। उपरोक्त प्रक्रिया छह महीने में संपन्न कर ली जाए। आवेदकों का कहना है कि  उक्त वर्ग के अभ्यर्थियों की विशेष परीक्षा कराई जाती है तो उत्तर पुस्तिकाओं को जांचने वाला पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर मूल्यांकन करेगा। इससे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हो सकता है। विशेष परीक्षा संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। मप्र राज्य परीक्षा सेवा नियम 2015 के किसी भी नियम में विशेष परीक्षा कराने का प्रावधान नहीं है। न ही नियमों में नॉर्मलाइजेशन से संबंधित कोई प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट ने उक्त तर्कों को गंभीरता से लिया। साथ ही लोक सेवा आयोग तथा मध्यप्रदेश शासन से 15 दिन में जवाब मांगा है। कोर्ट ने संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया याचिका के निर्णय अधीन रखने के निर्देश दिए है। वकील रामेश्वर सिंह ठाकुर ने यह जानकारी दी।

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