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फैसला: विवाद के दौरान सिर में पत्थर से हमला करने से हुई थी मौत, हाईकोर्ट ने दस साल की सजा काटने पर किया रिहा
Sun, 11 Oct 2026 10:43 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 10:43 PM IST
सार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पत्थर से एक वार के बाद हुई मौत के मामले में भगवत कुमरे की आजीवन कारावास की सजा घटाकर दस साल कर दी। अदालत ने माना कि अचानक हुए विवाद में हमला करने से पूर्व नियोजित हत्या की मंशा साबित नहीं हुई। दस साल पूरे होने पर रिहाई के आदेश दिए।
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मप्र हाईकोर्ट
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विवाद के दौरान सिर पर पत्थर से हमला करने किए जाने के कारण मौत होने को गैर इरादतन हत्या मानते हुए सजा में कटौती की है। हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक तथा राज कुमार चौबे की युगलपीठ ने अपीलकर्ता की सजा दस साल पूरी हो जाने के कारण अपीलकर्ता को रिहा करने के आदेश जारी किए हैं।
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बता दें कि अपीलकर्ता भगवत कुमरे की तरफ से छिंदवाड़ा जिला न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा से दंडित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। अपील में कहा गया था कि 19 मई 2016 को शाम शिवाजी और अपीलकर्ता के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान अपीलकर्ता ने मौके पर पड़ा पत्थर उठाकर शिवाजी के सिर पर वार कर दिया। घायल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया और नौ दिन तक उपचार के बाद 28 मई 2016 को उसकी मौत हो गई।
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याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि अपीलकर्ता पहले से हथियार लेकर नहीं आया था और अचानक विवाद होने के दौरान उसने मौके से पत्थर उठाकर केवल एक वार किया गया था। अपीलकर्ता द्वारा दोबारा हमला नहीं किया। जिससे हत्या करने की पूर्व नियोजित मंशा साबित नहीं हुई। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराध की प्रकृति निर्धारित करने के लिए हथियार, चोट का स्थान, घटना की परिस्थितियों और आरोपी की मंशा का समग्र मूल्यांकन आवश्यक है।
युगलपीठ ने सुनवाई के बाद अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए उम्र की सजा को दस साल के कारावास में तब्दील करने के आदेश जारी किए। अपीलकर्ता द्वारा दस साल की सजा पूरी कर लेने के कारण उसे तत्काल रिहा करने के निर्देश युगलपीठ ने जारी किए हैं।
