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Jabalpur News:मोबाइल एप्स के लिए नहीं है नियामक एजेंसी,एमपी हाईकोर्ट में याचिका,केन्द्र से मांगा जवाब
Thu, 24 Apr 2025 03:17 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, जबलपुर
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Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Thu, 24 Apr 2025 03:17 PM IST
सार
मोबाइल एप के जरिए कई तरह के साइबर क्राइम हो रहे हैं । इनको रोकने के लिए एप्स पर नजर रखने वाली नियामक एजेंसी होनी चाहिए। इसको लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इसमें कोर्ट ने केन्द्र सरकार से जवाब मांगा है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कंप्यूटर और मोबाइल एप की निगरानी के लिए नियामक एजेंसी का गठन किए जाने की मांग की गई है। इसके लिए एमपी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में कहा गया है कि नियामक एजेंसी नहीं होने के कारण धोखाधड़ी करने वाले कंप्यूटर व मोबाइल एप जनता तक सीधे पहुंच रहे हैं। इसकी वजह से साइबर क्राइम लगतार बढ़ रहे हैं।
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एप मांगते हैं कई तरह की जानकारी
याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की गयी है। जबलपुर निवासी अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि कंप्यूटर व मोबाइल में मौजूद गूगल प्ले स्टोर और एपल स्टोर से डाउनलोड किए गए एप उपयोगकर्ता की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहे हैं। एप उपयोगकर्ता की जानकारियां कई कंपनियों को साझा करते हैं, जिससे साइबर ठगी की जाती है। कई एप ऐसे होते हैं जिनमें कॉन्टेक्ट या कैमरा का कोई उपयोग नहीं होता फिर भी इंस्टॉल करने के बाद ये सभी एप्लीकेशन की परमिशन मांगते हैं। इस तरह से मोबाइल ही डाटा चोरी करने का एक यंत्र चल रहा है। देश में डिजिटल क्रांति के साथ-साथ साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।
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एप के लिए नियामक एजेंसी की मांग
आम नागरिकों की गोपनीय जानकारी, बैंकिंग विवरण और व्यक्तिगत डेटा चोरी हो जाते हैं। जनहित याचिका में कहा गया कि वर्तमान कानूनी ढांचा केवल तब सक्रिय होता है, जब किसी एप्लिकेशन के जरिए पहले ही नुकसान हो चुका होता है। अगर कोई एप नुकसान पहुंचाता है, तब संबंधित एजेंसियां उसकी जांच करती हैं और उसे प्रतिबंधित करती हैं। जनहित याचिका में मांग की गई है कि इसकी रोकथाम के लिए कड़े नियम बनाए जाएं। याचिका में कहा गया था कि नियामक एजेंसी नहीं होने के कारण धोखाधडी करने वाले एप जनता तक पहुंच रहे हैं। इससे बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान, पहचान की चोरी तथा बड़े पैमाने पर गोपनीयता का उल्लंघन किया जा रहा है। याचिका में सचिव व निदेशक केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, महानिदेशक उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र पुणे, एपल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पाेरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड मुंबई तथा श्योमी टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को अनावेदक बनाया गया है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष स्वयं रखा।
regulatory agency for mobile apps petition has been filed in the Madhya Pradesh High Court
