फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   Consent of policemen required for band training

Jabalpur News: बैंड प्रशिक्षण के लिए पुलिसकर्मियों की सहमति जरूरी, हाईकोर्ट ने खारिज किया सरकार का आवेदन

Fri, 08 Nov 2024 01:39 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 08 Nov 2024 01:39 PM IST
सार

बिना सहमति पुलिसकर्मियों को बैंड प्रशिक्षण में शामिल किए जाने के खिलाफ दस पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि पुलिस बैंड प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों की सहमति आवश्यक है।

विज्ञापन
Consent of policemen required for band training
जबलपुर हाईकोर्ट।

विस्तार

बैंड प्रशिक्षण के लिए पुलिसकर्मियों की सहमति अनिवार्य होने के संबंध में हाईकोर्ट जारी आदेश को लेकर सरकार ने उसे वापस लेने के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया था। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद सरकार के आवेदन को खारिज कर दिया। एकलपीठ ने सरकार को कानूनी प्रावधान अपनाने की स्वतंत्रता प्रदान की है।

विज्ञापन


गौरतलब है कि बिना सहमति पुलिसकर्मियों को बैंड प्रशिक्षण में शामिल किए जाने के खिलाफ दस पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए जबलपुर मुख्यपीठ की एकलपीठ ने 6 अगस्त 2024 को जारी अपने आदेश में कहा था कि पुलिस बैंड प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों की सहमति आवश्यक है। बिना सहमति यह प्रशिक्षण अनिवार्य नहीं किया जा सकता। सरकार ने इस आदेश को वापस लेने के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
विज्ञापन


अपील में कहा गया था कि मुख्यपीठ ने इंदौर खंडपीठ द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए यह आदेश जारी किया था। इसके बाद ग्वालियर खंडपीठ ने दायर याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा कि पुलिसकर्मियों को बैंड प्रशिक्षण के लिए तैयार किया जा सकता है। इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ द्वारा पारित आदेशों में अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


एकलपीठ ने सरकार के आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि ग्वालियर खंडपीठ में याचिका की सुनवाई के दौरान इंदौर खंडपीठ के आदेश को न्यायालय के समक्ष विचारार्थ नहीं रखा गया था। इसके अलावा, याचिकाकर्ता विशेष सशस्त्र बल के सदस्य थे, जिनके पास नियमित पुलिसिंग कर्तव्य नहीं होते हैं, जैसे कानून व्यवस्था बनाए रखना और अपराधों की जांच करना। एकलपीठ ने याचिका खारिज करते हुए सरकार को कानूनी प्रावधानों के उपयोग की स्वतंत्रता प्रदान की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed