फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   Compulsory retirement cannot be provided contrary to the prescribed rules

Jabalpur News: नियमों के विपरीत नहीं दे सकते अनिवार्य सेवानिवृत्ति, हाईकोर्ट से कर्मचारी को मिली राहत

Tue, 27 Aug 2024 02:38 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 27 Aug 2024 02:38 PM IST
सार

 एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि नियमों का पालन न करते हुए याचिकाकर्ता को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। इसके बाद एकलपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में आदेश जारी किए।

विज्ञापन
Compulsory retirement cannot be provided contrary to the prescribed rules
high court

विस्तार

फार्मूला 50:20 के तहत अयोग्य मानते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान किए जाने के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन ने पाया कि संवीक्षा सेवा समिति ने सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया। एकलपीठ ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को 50 प्रतिशत वेतन का भुगतान करने के आदेश जारी किए हैं।

विज्ञापन


सतना निवासी दीपक बाजपेई की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि वह सामान्य न्याय तथा निशक्त कल्याण विभाग में वर्ष 1996 में भृत्य के रूप में पदस्थ हुए थे। उन्हें वर्ष 2016 में सहायक ग्रेड तीन में पदोन्नति दी गई थी। इसके बाद वर्ष 2018 में संवीक्षा सेवा समिति ने उन्हें फार्मूला 50:20 के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान कर दी। याचिका में कहा गया था कि समिति ने उनके पूरे सेवाकाल का सही ढंग से आकलन नहीं किया। उनके पूरे सेवाकाल में केवल अनाधिकृत रूप से कार्य में अनुपस्थित रहने के संबंध में चेतावनी दर्ज की गई थी, जिसे बाद में नियमित कर दिया गया था।
विज्ञापन


सरकार की ओर से बताया गया कि अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण याचिकाकर्ता को सेवा से पृथक किया गया। अनाधिकृत छुट्टियों को इस उद्देश्य से नियमित किया गया था ताकि उनकी सेवा पुस्तिका में व्यवधान न आए।
विज्ञापन
विज्ञापन


एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि सरकार के नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों को पिछले पांच वर्षों के दौरान पदोन्नति मिली है, उन्हें सामान्यतः अनिवार्य सेवानिवृत्ति नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा, पिछले दो वर्षों में उनकी एसीआर ग्रेडिंग 2 से कम नहीं होनी चाहिए। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि नियमों का पालन न करते हुए याचिकाकर्ता को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। इसके बाद एकलपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में आदेश जारी किए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed