एमपी: अभियोजन स्वीकृति के पांच साल बाद भी आरोप पत्र नहीं, हाईकोर्ट ने ईओडब्ल्यू डीजी से मांगा हलफनामा
अभियोजन की स्वीकृति मिलने के पांच साल बाद भी ईओडब्ल्यू द्वारा आरोप पत्र दाखिल नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने देरी को गंभीर मानते हुए ईओडब्ल्यू महानिदेशक से व्यक्तिगत हलफनामा पेश कर जवाब देने के निर्देश दिए।
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अभियोजन की स्वीकृति मिलने के पांच साल बाद भी ईओडब्ल्यू द्वारा आरोप पत्र पेश नहीं किए जाने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की युगलपीठ ने मामले में ईओडब्ल्यू के महानिदेशक को व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं।
ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग को लेकर रायसेन जिले की बरेली तहसील में पदस्थ सहायक शिक्षक सीमा धाकड़ और उमराव धाकड़ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि वर्ष 2013 में छात्रों को साइकिल वितरण के लिए उनके खातों में राशि जमा की गई थी। संबंधित प्राचार्य ने उनके खातों से राशि निकालकर लाभार्थियों को साइकिल खरीदने के लिए नकद राशि दे दी थी। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने मामले की जांच कर उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि मामले में अन्य सह-आरोपियों का विचारण 8 अगस्त 2023 को समाप्त हो चुका है। वहीं, याचिकाकर्ताओं के खिलाफ 2 दिसंबर 2021 को अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसके बावजूद ईओडब्ल्यू ने अब तक मामले में आरोप पत्र दाखिल नहीं किया है। याचिका में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग की गई।
युगलपीठ ने अभियोजन की स्वीकृति मिलने के पांच साल बाद भी आरोप पत्र दाखिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि इतनी लंबी देरी प्रथम दृष्टया जांच अधिकारी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है तथा भ्रष्टाचार की आशंका पैदा करती है। युगलपीठ ने ईओडब्ल्यू के महानिदेशक को व्यक्तिगत हलफनामा पेश कर देरी के संबंध में जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
