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Bhopal Gas Tragedy: आईसीएमआर के चेयरमैन को आना होगा कोर्ट में, आदेश का पालन नहीं होने पर हाईकोर्ट सख्त
Thu, 13 Oct 2022 09:03 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 13 Oct 2022 09:03 PM IST
सार
अवमानना याचिका में कहा गया था कि गैस त्रासदी के पीड़ित व्यक्तियों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने हैं। अस्पतालों में आवश्यकता अनुसार उपकरण व दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल गैस त्रासदी के संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू व जस्टिस डीडी बसंल ने इंडियल काउसिंल ऑफ मेडिकल रिसर्च के चेयरमैन को तलब किया है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेश के पालन नहीं करने पर क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। याचिका पर अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस त्रासदी में पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मॉनिटरिंग कमेटी का गठित करने के निर्देश भी जारी किए थे। मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने तथा रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने संबंधी निर्देश भी जारी किए थे। जिसके बाद उक्त याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी। याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका दायर की गई थी।
अवमानना याचिका में कहा गया था कि गैस त्रासदी के पीड़ित व्यक्तियों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने हैं। अस्पतालों में आवश्यकता अनुसार उपकरण व दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। बीएमएचआरसी के भर्ती नियम का निर्धारण नहीं होने के कारण डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ स्थायी तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करते हैं। अवमानना याचिका में केन्द्रीय परिवार कल्याण विभाग के सचिव रंजन भूषण, केन्द्रीय रसायन व उर्वरक विभाग के सचिव आरती आहूजा, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस, भोपाल गैस त्रासदी सहायत एव पुनर्वास विभाग के सचिव मोहम्मद सुलेमान, आईसीएमआर के वरिष्ठ डिप्टी डायरेक्टर आर राम तथा बीएमएसआरसी के संचालक डॉ. प्रभा तथा एनआईआरई के संचालक राजनारायण तिवारी को अनावेदक बनाया गया था।
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याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने बीएमएचआरसी में जारी भर्ती प्रक्रिया पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उक्त आदेश जारी किए। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता काशी पटैल ने पैरवी की।
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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस त्रासदी में पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मॉनिटरिंग कमेटी का गठित करने के निर्देश भी जारी किए थे। मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने तथा रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने संबंधी निर्देश भी जारी किए थे। जिसके बाद उक्त याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी। याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका दायर की गई थी।
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अवमानना याचिका में कहा गया था कि गैस त्रासदी के पीड़ित व्यक्तियों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने हैं। अस्पतालों में आवश्यकता अनुसार उपकरण व दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। बीएमएचआरसी के भर्ती नियम का निर्धारण नहीं होने के कारण डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ स्थायी तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करते हैं। अवमानना याचिका में केन्द्रीय परिवार कल्याण विभाग के सचिव रंजन भूषण, केन्द्रीय रसायन व उर्वरक विभाग के सचिव आरती आहूजा, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस, भोपाल गैस त्रासदी सहायत एव पुनर्वास विभाग के सचिव मोहम्मद सुलेमान, आईसीएमआर के वरिष्ठ डिप्टी डायरेक्टर आर राम तथा बीएमएसआरसी के संचालक डॉ. प्रभा तथा एनआईआरई के संचालक राजनारायण तिवारी को अनावेदक बनाया गया था।
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याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने बीएमएचआरसी में जारी भर्ती प्रक्रिया पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उक्त आदेश जारी किए। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता काशी पटैल ने पैरवी की।
