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भोपाल गैस त्रासदी: मेडिकल रिपोर्ट का डिजिटलीकरण का कार्य हो जाएगा 6 माह में पूर्ण, सरकार ने पेश किया हलफनामा

Wed, 19 Feb 2025 07:57 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 19 Feb 2025 07:57 PM IST
सार

भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के मेडिकल रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण में तेजी आई है, अब रोज़ 20,000 पृष्ठ स्कैन हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर अमल न होने पर अवमानना याचिका लंबित है। 

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Bhopal Gas Tragedy: Digitization of medical reports will be completed in 6 months
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विस्तार

भोपाल गैस त्रासदी से प्रभावित पीड़ितों के मेडिकल रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण कार्य में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त मशीनें स्थापित की गई हैं। अब प्रतिदिन 20,000 पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे अनुमान है कि लगभग 17 लाख पृष्ठों का कार्य आगामी छह महीनों में पूरा कर लिया जाएगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य सरकार के हलफनामे को रिकॉर्ड में लेते हुए अगली सुनवाई 22 फरवरी को निर्धारित की है।
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डिजिटलीकरण कार्य में देरी पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में बताया गया था कि 2014 से पूर्व के मेडिकल रिकॉर्ड अत्यधिक पुराने होने के कारण प्रतिदिन केवल 3,000 पृष्ठों को ही स्कैन किया जा सकता है, जिससे इस प्रक्रिया को पूरा करने में 550 दिन लगेंगे। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि राज्य सरकार इस कार्य को लेकर गंभीर नहीं है।
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अदालत ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव तथा बीएमएचआरसी के निदेशक को संयुक्त बैठक कर अंतिम कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन समेत अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए 20 दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में गैस पीड़ितों के उपचार और पुनर्वास से संबंधित प्रावधानों को लागू करने के लिए मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया था।

कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि यह कमेटी हर तीन माह में रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इसके आधार पर हाईकोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा।


अवमानना याचिका और कोर्ट मित्र की भूमिका
मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं को लागू न किए जाने के कारण 2015 में एक अवमानना याचिका भी दायर की गई थी। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने हलफनामे के माध्यम से अदालत को डिजिटलीकरण प्रक्रिया में हुई प्रगति की जानकारी दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र के रूप में अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने मामले की पैरवी की।
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