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Jabalpur News: दुराचार के आरोपी रेलवे अफसर की दूसरी बार जमानत याचिका खारिज, पीड़िता के शीघ्र बयान के निर्देश

Wed, 12 Feb 2025 10:35 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 12 Feb 2025 10:35 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी रेलवे अधिकारी विनोद कोरी की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी पर सहकर्मी से दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का आरोप है। पीड़िता के बयान दर्ज न होने और संभावित धमकी के मद्देनजर कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। 

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Jabalpur  Bail plea of railway officer accused of misconduct rejected for the second time
high court

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी रेलवे अधिकारी विनोद कोरी की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज कर दी। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि पीड़िता के बयान और परीक्षण के बाद ही आरोपी दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द पीड़िता का परीक्षण कराए और भोपाल एफएसएल से फोटो संबंधी रिपोर्ट पेश करे।

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क्या है पूरा मामला?
पश्चिम मध्य रेलवे के कार्मिक विभाग में पदस्थ विनोद कोरी पर उनकी सहकर्मी महिला ने दुष्कर्म और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इससे पहले हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत दी थी, लेकिन यह निर्देश दिया था कि उसे जबलपुर से अन्यत्र पदस्थ किया जाए। हालांकि, जमानत मिलने के बाद भी आरोपी जबलपुर आया और पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव बनाने लगा। इतना ही नहीं, वह पीड़िता का पीछा भी करने लगा।
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हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?
पीड़िता ने आरोपी की हरकतों के सबूत के तौर पर फोटो प्रस्तुत करते हुए हाईकोर्ट में उसकी जमानत निरस्त करने की याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए आरोपी की पहली जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद रेलवे अधिकारी विनोद कोरी ने दोबारा जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
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पीड़िता की ओर से अधिवक्ता निखिल भट्ट ने जमानत आवेदन का विरोध करते हुए दलील दी कि ट्रायल कोर्ट में अभी तक पीड़िता के बयान दर्ज नहीं हुए हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यदि आरोपी को जमानत दी गई, तो वह एक बार फिर पीड़िता को धमका सकता है। इन तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी की दूसरी जमानत याचिका को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि जब तक पीड़िता के बयान दर्ज नहीं हो जाते, तब तक आरोपी जमानत के लिए पुनः आवेदन नहीं कर सकता। कोर्ट के इस फैसले से पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

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