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Jabalpur News: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को पसंद के अनुसार रिक्त पदों पर करो नियुक्त, हाईकोर्ट के निर्देश

Thu, 03 Oct 2024 09:26 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 03 Oct 2024 09:26 PM IST
सार

दमोह निवासी रिचा ताम्रकार, सागर निवासी अमन दुबे, हल्के भाई, रोहित चौधरी, हरिओम यादव सहित अलग-अलग जिलों के दो दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों की ओर से यह मामला दायर किया गया था। इसमें कहा गया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने संयुक्त काउंसलिंग करके आरक्षित वर्ग के ढाई हजार से अधिक शिक्षकों को उनकी चॉइस के विरुद्ध ट्रायबल विभाग द्वारा संचालित स्कूलों में नियुक्ति दे दी।

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Appoint reserved category candidates to vacant posts as per their choice
high court

विस्तार

मप्र हाईकोर्ट ने आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान अभ्यर्थियों को उनकी चॉइस के अनुरूप शिक्षा विभाग में रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रदान करने के निर्देश राज्य शासन को दिए हैं। जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने उक्त आदेश का पालन कर 21 अक्टूबर तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही शासन की उस आपत्ति को भी निरस्त कर दिया, जिसमें प्रभावित उम्मीदवारों को पक्षकार बनाने का मुद्दा उठाया गया था। न्यायालय ने कहा कि जिन मामलों में शासन की नीतियों तथा कानून की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है, उनमें संभावित प्रभावित व्यक्तियों को पक्षकार बनाना आवश्यक नहीं होता।
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दमोह निवासी रिचा ताम्रकार, सागर निवासी अमन दुबे, हल्के भाई, रोहित चौधरी, हरिओम यादव सहित अलग-अलग जिलों के दो दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों की ओर से यह मामला दायर किया गया था। इसमें कहा गया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने संयुक्त काउंसलिंग करके आरक्षित वर्ग के ढाई हजार से अधिक शिक्षकों को उनकी चॉइस के विरुद्ध ट्रायबल विभाग द्वारा संचालित स्कूलों में नियुक्ति दे दी। यह नियुक्ति याचिकाकर्ताओं को उनके गृह जिले से 300 से 800 किमी दूर है। स्कूल शिक्षा विभाग के उक्त रवैये के विरुद्ध याचिकाएं दायर की गई हैं। आवेदकों की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट ने आयुक्त लोक शिक्षण को सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी वाले प्रकरण में दिए दिशा-निर्देशों के अनुरूप याचिकाओं पर विचार कर निर्णय लेने कहा था। आरोप है कि आयुक्त ने महाधिवक्ता कार्यालय के अभिमत के आधार पर उक्त समस्त अभ्यार्थियों के प्रकरण निरस्त कर यह कहा कि किसी भी अभ्यर्थी का चॉइस के आधार पर पदस्थापना का दावा मान्य नहीं होगा। न्यायालय को बताया गया कि आयुक्त ने याचिकाकर्ताओं से कम अंक वाले हजारों अभ्यर्थियों को स्कूल शिक्षा विभाग में उनकी चॉइस के अनुसार उनके गृह जिलों में उनके ही वर्ग में पदस्थापित किया गया है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिए। अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह ने पक्ष रखा।   
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