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MP High Court: थाना परिसरों में मंदिर निर्माण पर पेश किया नहीं जवाब, HC ने 25 हजार कॉस्ट लगाने की दी चेतावनी
Tue, 19 Nov 2024 07:56 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 Nov 2024 07:56 PM IST
सार
थाना परिसरों में मंदिर निर्माण पर जवाब पेश नहीं किया गया। ऐसे में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एमपी सरकार पर कॉस्ट लगाई है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के थाना परिसरों में मंदिरों के निर्माण के मामले में सरकार की तरफ से जवाब पेश नहीं किया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने सरकार को समय प्रदान करते हुए चेतावनी दी है कि जवाब पेश नहीं करने पर 25 हजार रुपये की कॉस्ट लगाई जाएगी। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 12 दिसंबर को निर्धारित की है।
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जबलपुर निवासी एडवोकेट ओपी यादव की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों में धार्मिक स्थलों के निर्माण पर प्रतिबंधित आदेश जारी किए थे। पुलिस थाने भी सार्वजनिक स्थलों की श्रेणी में आते हैं। सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंधित आदेश के बावजूद भी मध्यप्रदेश के कई थाने में मंदिरों का निर्माण करवाया गया है या करवाया जा रहा है। न्यायालयीन आदेशों को नजरअंदाज कर थाना परिसर के अंदर मंदिर निर्माण कराना सुप्रीम कोर्ट आदेशों का खुला उल्लंघन है।
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याचिकाकर्ता की तरफ से जिले के चार थाना में किए गए मंदिर निर्माण की फोटो भी याचिका के साथ प्रस्तुत की गई थी। याचिका में राहत चाही गई थी कि थाना परिसर में बने सभी मंदिरों को तत्काल हटाया जाए। इसके अलावा संबंधित थाना प्रभारियों के खिलाफ सिविल सर्विस रूल्स के तहत कार्यवाही की जाए। याचिका में प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह विभाग, नगरीय प्रशासन, डीजीपी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक जबलपुर सहित जिले के सिविल लाइंस, विजय नगर, मदन महल और लार्डगंज को अनावेदक बनाया गया था।
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युगलपीठ ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद प्रदेश के पुलिस थानों में मंदिर निर्माण पर रोक लगाते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सतीश वर्मा, अमित पटेल और ग्रीष्म जैन ने पक्ष रखा।
