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Madhya Pradesh: सजा पूरी होने के बाद भी जेल में रहा 47 महीने, पीड़ित को तीन लाख का मुआवजा देने के निर्देश

Wed, 27 Jul 2022 06:58 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 27 Jul 2022 06:58 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के एक कैदी को सजा पूरी होने के बाद भी रिहा नहीं किया गया। तीन साल 11 महीने उसने सजा पूरी होने के बाद जेल में काटे। हाईकोर्ट ने अब पीड़ित को तीन लाख का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। 

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47 months in jail even after completion of sentence, instructions to pay compensation of 3 lakhs to the victim
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सजा पूरी होने के बावजूद भी तीन साल 11 माह 5 दिन जेल में रखे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस एसए धर्माधिकारी ने मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए पीड़ित को दो माह में तीन लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने के आदेश जारी किए हैं। एकलपीठ ने रजिस्ट्रार विजिलेंस को दो माह में जांच कर रजिस्ट्रार जनरल को रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है। साथ ही जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ विधिवत कार्रवाई करने का भी आदेश दिया है।
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छिंदवाड़ा जिले के थाना भिचुवा अंतर्गत ग्राम पथरी निवासी इंदल सिंह की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि जिला न्यायालय ने हत्या के आरोप में 14 मार्च 2005 को उसे उम्रकैद की सजा से दंडित किया था। जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने अपील की सुनवाई करते हुए अपराध को गैर इरादतन हत्या का मानते हुए सजा की अवधि 5 साल तथा जुर्माना 1 हजार रुपये यथावत रखा। आदेश की प्रति रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से जेल अधिक्षक व अतिरिक्त जिला न्यायाधीश छिंदवाड़ा को भेजी गई थी। सजा की अवधि 25 सितंबर 2009 को पूरी हो जाने के बावजूद भी उसे जेल से रिहा नहीं किया गया।
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अधिवक्ता ने 25 जून 2012 में हाई कोर्ट के आदेश के साथ जेल अधीक्षक तथा अतिरिक्त जिला न्यायाधीश को पत्र लिखा था। जिसके बाद अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने रिहाई वारंट जारी किया और उसे 2 जुलाई 2012 को रिहा किया गया। याचिका में कहा गया था कि 3 साल 11 माह 5 दिन उसे अवैध हिरासत में रखा गया था। याचिका में पूरन सिंह प्रकरण का हवाला देते हुए अवैध हिरासत के लिए मुआवजे मांग गया था।
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याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जिला व सत्र न्यायाधीश से रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि 1 जुलाई 2012 को रिहाई आदेश जारी किए गए हैं। एकलपीठ ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित को मुआवजे तथा जांच के आदेश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अरुण विश्वकर्मा ने पैरवी की। 

 
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