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जबलपुर: नर्सिंग कॉलेज का रिकॉर्ड लेकर रवाना हो गया वाहन, अब कल होगी सुनवाई
Wed, 11 May 2022 08:54 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 11 May 2022 08:54 PM IST
सार
प्रदेशभर में संचालित नर्सिंग कॉलेज की रिपोर्ट हाईकोर्ट ने 24 घंटों में तलब की थी। आज हुई सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि 453 कॉलेजों का रिकॉर्ड लेकर वाहन रवाना हो गया है। कोर्ट ने कहा कि कल इस पर सुनवाई करेंगे।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में संचालित सभी नर्सिंग कॉलेज की निरीक्षण रिपोर्ट 24 घंटों में पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पी के कौरव की युगलपीठ को बताया कि 453 कॉलेजों का रिकॉर्ड लेकर वाहन रवाना हो गया है। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित की है।
बता दें कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2000-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारिण मापदण्ड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है।
याचिका के साथ ऐसे कॉलेज की सूची व फोटो प्रस्तुत किए गए थे। याचिका में कहा गया था कि जब कॉलेज ही नहीं हैं तो छात्रों को कैसे पढ़ाया जाता होगा। याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ऐसे कॉलेजों को अनावेदक बनाने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए थे। याचिका की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने 55 कॉलेजों से सिर्फ सात कॉलेजों को अनावेदक बनाया है। याचिकाकर्ता को अपनी आपत्ति काउसिंल के समक्ष प्रस्तुत करना था, परंतु उसने ऐसा नहीं किया। युगलपीठ ने प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
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याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कौंसिल की तरफ से निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। जिस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए युगलपीठ ने 24 घंटों में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए गए थे। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से उक्त जानकारी पेश की गई। सरकार की तरफ से युगलपीठ को बताया गया कि याचिका में जिन 55 कॉलेज का उल्लेख किया गया है, उनसे भी सभी दस्तावेज पेश करने नोटिस जारी कर दिए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेजा ने पैरवी की।
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बता दें कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2000-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारिण मापदण्ड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है।
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याचिका के साथ ऐसे कॉलेज की सूची व फोटो प्रस्तुत किए गए थे। याचिका में कहा गया था कि जब कॉलेज ही नहीं हैं तो छात्रों को कैसे पढ़ाया जाता होगा। याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ऐसे कॉलेजों को अनावेदक बनाने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए थे। याचिका की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने 55 कॉलेजों से सिर्फ सात कॉलेजों को अनावेदक बनाया है। याचिकाकर्ता को अपनी आपत्ति काउसिंल के समक्ष प्रस्तुत करना था, परंतु उसने ऐसा नहीं किया। युगलपीठ ने प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
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याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कौंसिल की तरफ से निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। जिस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए युगलपीठ ने 24 घंटों में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए गए थे। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से उक्त जानकारी पेश की गई। सरकार की तरफ से युगलपीठ को बताया गया कि याचिका में जिन 55 कॉलेज का उल्लेख किया गया है, उनसे भी सभी दस्तावेज पेश करने नोटिस जारी कर दिए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेजा ने पैरवी की।
