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जबलपुर: होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष को बना दिया वाइल्ड लाइफ बोर्ड का सदस्य, जवाब पेश करने सरकार को मिली मोहलत
Mon, 04 Apr 2022 08:15 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 04 Apr 2022 08:15 PM IST
सार
जबलपुर हाईकोर्ट में सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई हुई। ये याचिका मध्य प्रदेश में गठित किए गए वाइल्ड लाइफ बोर्ड को लेकर लगाई गई थी। इसमें बताया गया है कि मध्य प्रदेश वाइल्ड लाइफ बोर्ड के पुनर्गठन में नियमों का पालन नहीं किया गया। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष को भी इसका सदस्य बनाया गया है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश वाइल्ड लाइफ बोर्ड के पुनर्गठन में नियमों का पालन नहीं किए जाने का मामला कोर्ट में है। इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ को बताया गया कि नव गठित कमेटी में होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष को सदस्य बनाया गया है। युगलपीठ ने सरकार को जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय प्रदान किया है।
बता दें कि भोपाल निवासी अजय दुबे की तरफ से 2019 में याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला है। वन प्राणियों के संरक्षण में मप्र वाइल्ड लाइफ बोर्ड की भूमिका अहम रहती है। प्रदेश सरकार ने 3 अगस्त 2019 को मप्र वाइल्ड लाइफ बोर्ड का पुनर्गठन किया, परंतु वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 6 के तहत प्रदेश सरकार ने आवश्यक नियम नहीं बनाए हैं। जिसके अभाव में मप्र राज्य वन्य प्राणी बोर्ड का गठन किया जाना अवैधानिक है। पुनर्गठित वन्य प्राणी संरक्षण बोर्ड में अनुसूचित जनजाति के दो गैर सरकारी सदस्यों को शामिल नहीं किया गया है, जो नियम का उल्लंघन है। इसके अलावा राशीद किदवई, केके सिंह तथा बृजेश सिंह को वन्य प्राणी में रुचि होने के कारण सदस्य बनाया गया है। नियम अनुसार गैर सरकारी सदस्य को वन्य प्राणी संरक्षण में एक्सपर्ट होना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि राजनैतिक सिफारिशों, भाई-भतीजावाद और भ्रष्ट आचरण के कारण बोर्ड में अयोग्य सदस्यों की नियुक्ति हुई है। याचिका में बोर्ड को भंग किए जाने की राहत चाही गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया था कि पूर्व में गठित बोर्ड को भंग कर दिया गया। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नए बोर्ड का गठन कर दिया गया है। याचिकाकर्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया था कि नवगठित बोर्ड में भी डॉ. सुरेन्द्र तिवारी तथा अभिलाष खांडेकर को वन्य प्राणी में रुचि होने के कारण सदस्य बनाया गया है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष को सदस्य बनाया गया है। पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने दोनों सदस्यों को याचिका में अनावेदक बनाए जाने के आवेदन को स्वीकार करते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से उक्त जानकारी युगलपीठ के समक्ष पेश की गई। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद अनावेदकों को जवाब पेश करने की मोहलत प्रदान करते हुए अगली सुनवाई 19 अप्रैल को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की।
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बता दें कि भोपाल निवासी अजय दुबे की तरफ से 2019 में याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला है। वन प्राणियों के संरक्षण में मप्र वाइल्ड लाइफ बोर्ड की भूमिका अहम रहती है। प्रदेश सरकार ने 3 अगस्त 2019 को मप्र वाइल्ड लाइफ बोर्ड का पुनर्गठन किया, परंतु वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 6 के तहत प्रदेश सरकार ने आवश्यक नियम नहीं बनाए हैं। जिसके अभाव में मप्र राज्य वन्य प्राणी बोर्ड का गठन किया जाना अवैधानिक है। पुनर्गठित वन्य प्राणी संरक्षण बोर्ड में अनुसूचित जनजाति के दो गैर सरकारी सदस्यों को शामिल नहीं किया गया है, जो नियम का उल्लंघन है। इसके अलावा राशीद किदवई, केके सिंह तथा बृजेश सिंह को वन्य प्राणी में रुचि होने के कारण सदस्य बनाया गया है। नियम अनुसार गैर सरकारी सदस्य को वन्य प्राणी संरक्षण में एक्सपर्ट होना चाहिए।
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याचिका में कहा गया है कि राजनैतिक सिफारिशों, भाई-भतीजावाद और भ्रष्ट आचरण के कारण बोर्ड में अयोग्य सदस्यों की नियुक्ति हुई है। याचिका में बोर्ड को भंग किए जाने की राहत चाही गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया था कि पूर्व में गठित बोर्ड को भंग कर दिया गया। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नए बोर्ड का गठन कर दिया गया है। याचिकाकर्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया था कि नवगठित बोर्ड में भी डॉ. सुरेन्द्र तिवारी तथा अभिलाष खांडेकर को वन्य प्राणी में रुचि होने के कारण सदस्य बनाया गया है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष को सदस्य बनाया गया है। पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने दोनों सदस्यों को याचिका में अनावेदक बनाए जाने के आवेदन को स्वीकार करते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से उक्त जानकारी युगलपीठ के समक्ष पेश की गई। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद अनावेदकों को जवाब पेश करने की मोहलत प्रदान करते हुए अगली सुनवाई 19 अप्रैल को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की।
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