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जबलपुर: बिना भौतिक सत्यापन के निजी अस्पताल संचालन की दी जा रही अनुमति, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब
Wed, 26 Jan 2022 01:11 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 26 Jan 2022 01:11 PM IST
सार
जबलपुर शहर में बिना भौतिक सत्यापन के बड़े पैमाने पर निजी अस्पतालों के संचालन की स्वीकृति दिए जाने को लेकर जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है। कोर्ट ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।)
- फोटो : iStock
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विस्तार
जबलपुर शहर में बिना भौतिक सत्यापन के बड़े पैमाने पर निजी अस्पतालों के संचालन की स्वीकृति दिए जाने को कटघरे में रखते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ व जस्टिस पुरुषेन्द्र कौरव की युगलपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् अनावेदकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह जनहित याचिका लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट विशाल बघेल की ओर से दायर की गई है। जिसमें कहा गया है कि प्राइवेट अस्पताल संचालन के लिए बड़े पैमाने पर अनुमति प्रदान की जा रही हैं, लेकिन इसके लिए उनका भौतिक सत्यापन नहीं किया जा रहा है। उक्त अस्पताल के पास खुद की बिल्डिंग है या नहीं, आग से बचाव की क्या व्यवस्था है, स्टाफ की क्या स्थिति इस संबंध में जांच किए बगैर ही उनके संचालन की अनुमति प्रदान की जा रही है, जो कि अवैधानिक है।
मामले में मप्र शासन के प्रमुख सचिव, डायरेक्टर हेल्थ सर्विस, रीजनल डायरेक्टर हेल्थ सर्विस, मेयर नगर निगम को पक्षकार बनाया गया है। मामले की सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित सेठ ने पक्ष रखा।
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यह जनहित याचिका लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट विशाल बघेल की ओर से दायर की गई है। जिसमें कहा गया है कि प्राइवेट अस्पताल संचालन के लिए बड़े पैमाने पर अनुमति प्रदान की जा रही हैं, लेकिन इसके लिए उनका भौतिक सत्यापन नहीं किया जा रहा है। उक्त अस्पताल के पास खुद की बिल्डिंग है या नहीं, आग से बचाव की क्या व्यवस्था है, स्टाफ की क्या स्थिति इस संबंध में जांच किए बगैर ही उनके संचालन की अनुमति प्रदान की जा रही है, जो कि अवैधानिक है।
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मामले में मप्र शासन के प्रमुख सचिव, डायरेक्टर हेल्थ सर्विस, रीजनल डायरेक्टर हेल्थ सर्विस, मेयर नगर निगम को पक्षकार बनाया गया है। मामले की सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित सेठ ने पक्ष रखा।
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