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MP News: मेडिकल विश्वविद्यालय अंक घोटाला, प्रोफेसर दंपति को किया गया बर्खास्त, HC में लंबित है याचिका

Sat, 05 Nov 2022 08:05 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Sat, 05 Nov 2022 08:05 PM IST
सार

बर्खास्त दंपति का कहना है कि अंक घोटाले के बाद उनके घर पर ईओडब्ल्यू ने छापा मारा था। ईओडब्ल्यू द्वारा जो आंकड़ा दिया गया है वह गलत है। ईओडब्लयू ने बैंक लोन जानकारी सार्वजनिक नहीं की। मुख्य पद पर बैठे अधिकारी लगातार गलत कर रहें है।

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Jabalpur Medical University Marks Scam Dr Trupti Gupta and Ashok Sahu sacked
Medical University Jabalpur - फोटो : Jabalpur Medical University

विस्तार

मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी में हुए अंक घोटाले को उजागर करने वालीं डॉ तृप्ति गुप्ता और उनके पति को बर्खास्त कर दिया गया है। अंक घोटाला उजागर होने के बाद 14 साल पहले हुए उनकी नियुक्ति के संबंध में विभागीय जांच शुरू की गई थी। अब जांच कमेटी की अनुशंसा पर दंपति की नियुक्ति को अवैध मानते हुए उन्हें बर्खास्त किया गया है। हालांकि, विभागीय जांच के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका लंबित है।

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दरअसल, डॉ. तृप्ति गुप्ता को साल 2008 में संविदा पर एसोसिएट प्रोफेसर पद पर नियुक्त किया गया था। तीन साल बाद 2011 को उनका नियमितिकरण किया गया था। जिसके बाद उन्हें दो प्रमोशन दिए गए। डॉ. तृप्ति के पति डॉ. अशोक साहू को भी 2008 में संविदा पर एसोसिएट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति दी की गई थी। साल 2018 में आदर्श सेवा भर्ती के तहत उन्हें प्रोफेसर बना दिया गया था। 
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मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी में प्रभारी परीक्षा नियंत्रक पद पर कार्य करने के दौरान उन्होंने कुलपति व परीक्षा नियंत्रक की अनुमति के बिना एक मेल किया। यह मेल परीक्षा और मार्कशीट तैयार करने वाली ठेका कंपनी माइंड लॉजिट द्वारा छात्रों के अंक बढाने के संबंध में संबंधित अधिकारियों को किया गया था। अंक घोटाला उजागर होने के बाद कंपनी को ब्लैक लिस्ट करते हुए ठेका निरस्त कर दिया गया। इस दौरान आगरा मेडिकल यूनिवर्सिटी ने फर्जीवाड़ा करने वाली कंपनी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई थी।
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डॉ. तृप्ति गुप्ता ने बताया कि अंक घोटाला उजागर होने के बाद उनकी और उनकी पति की नियुक्ति को लेकर विभागीय जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान मांगने पर भी उन्हें दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए गए। जांच कमेटी ने ईमेल के जरिए मुझे पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया गया था। जिसके लिए उन्होंने समय देने का आग्रह किया, लेकिन जांच कमेटी ने मेल का जवाब नहीं दिया। जिसके बाद जांच कमेटी ने नियुक्ति के समय पर्याप्त योग्यता नहीं होने के आधार पर उन्हें बर्खास्त करने की अनुशंसा कर दी। 

डॉ. गुप्ता ने बताया कि प्रमुख सचिव, डीएमई सहित अन्य चयन समिति ने उन्हें नियुक्ति प्रदान की थी। उनके साथ पांच अन्य लोगों को नियुक्ति दी गई थी। बाद में दो अन्य व्यक्तियों को भी नियुक्तियां दी गईं थीं। नियुक्ति के लिए तीन साल का टीचिंग अनुभव अनिर्वाय था, लेकिन नियुक्त किए गए सभी सात व्यक्तियों के पास यह अनुभव नहीं था। 

सरकार ने मेडिकल काउसिंल ऑफ इंडिया को नियुक्ति के लिए नियम शिथिल करने के संबंध में पत्र लिखा था। उन्होंने कहा कि सिर्फ मेरी और मेरे पति की नियुक्ति के खिलाफ जांच शुरू की गई, जबकि अन्य लोग मेडिकल कॉलेज में कार्यरत है। विभागीय जांच के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जो अभी लंबित है। इसके बाद भी जांच कमेटी की अनुशंसा पर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।  


बर्खास्त दंपति का कहना है कि अंक घोटाले के बाद उनके घर पर ईओडब्ल्यू ने छापा मारा था। ईओडब्ल्यू द्वारा जो आंकड़ा दिया गया है वह गलत है। ईओडब्लयू ने बैंक लोन जानकारी सार्वजनिक नहीं की। मुख्य पद पर बैठे अधिकारी लगातार गलत कर रहें है। कोई सत्य को उजागर नहीं करना चाहता, क्योंकि उनके ऊपर दवाब हो सकता है। दंपति ने कहा कि सिर्फ हमारे खिलाफ कार्रवाई हो रही है, जबकि हम सत्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। 

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