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जबलपुर: 12वीं की परीक्षा में छात्रा को करो शामिल, हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत, बिना अनुमति रिजल्ट नहीं होगा घोषित
Wed, 16 Feb 2022 08:59 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 16 Feb 2022 08:59 PM IST
सार
मप्र हाईकोर्ट से कक्षा बारहवीं की छात्रा को राहत मिली है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने प्रवेश पत्र जारी करने के निर्देश देते हुए उसे 17 फरवरी से होने वाली परीक्षा में शामिल किए जाने के अंतरिम आदेश दिए हैं। इसके साथ ही एकलपीठ ने छात्रा का परीक्षा परिणाम बिना अनुमति घोषित न किए जाने के निर्देश दिए हैं।
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मप्र हाईकोर्ट से कक्षा बारहवीं की छात्रा को राहत मिली है।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
मप्र हाईकोर्ट से कक्षा बारहवीं की छात्रा को राहत मिली है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने प्रवेश पत्र जारी करने के निर्देश देते हुए उसे 17 फरवरी से होने वाली परीक्षा में शामिल किए जाने के अंतरिम आदेश दिए हैं। इसके साथ ही एकलपीठ ने छात्रा का परीक्षा परिणाम बिना अनुमति घोषित न किए जाने के निर्देश दिए हैं।
जबलपुर की छात्रा जिया साहू की ओर से याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि वह जेके कॉन्वेंट स्कूल जबलपुर की नियमित छात्रा है। सितंबर में स्कूल की ओर से परीक्षा फार्म ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जमा किया गया था। जिसे ऑनलाइन स्वीकार कर लिया गया। जिसके उपरांत स्कूल द्वारा उसके तिमाही एवं 6 मई परीक्षा के नंबर भी बोर्ड को भेजे गए थे, किंतु उस समय बोर्ड ने कोई आपत्ति नहीं की, लेकिन इसके बाद भी उसका प्रवेश पत्र नहीं भेजा गया। जिस पर यह याचिका दायर की गई। मामले में बोर्ड की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता छात्रा का सत्र समय पूरा नहीं हुआ है, इसीलिए उसे प्रवेश पत्र नहीं दिया गया है। जिस पर याचिकाकर्ता की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया कि कोरोना काल में सभी रिजल्ट विलंब से घोषित किए गए, किंतु सत्र समय से चालू हुए हैं। छात्रा का सत्र पूर्ण हो चुका है जिस पर न्यायालय ने उक्त अंतरिम आदेश देते हुए बोर्ड को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा।
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जबलपुर की छात्रा जिया साहू की ओर से याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि वह जेके कॉन्वेंट स्कूल जबलपुर की नियमित छात्रा है। सितंबर में स्कूल की ओर से परीक्षा फार्म ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जमा किया गया था। जिसे ऑनलाइन स्वीकार कर लिया गया। जिसके उपरांत स्कूल द्वारा उसके तिमाही एवं 6 मई परीक्षा के नंबर भी बोर्ड को भेजे गए थे, किंतु उस समय बोर्ड ने कोई आपत्ति नहीं की, लेकिन इसके बाद भी उसका प्रवेश पत्र नहीं भेजा गया। जिस पर यह याचिका दायर की गई। मामले में बोर्ड की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता छात्रा का सत्र समय पूरा नहीं हुआ है, इसीलिए उसे प्रवेश पत्र नहीं दिया गया है। जिस पर याचिकाकर्ता की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया कि कोरोना काल में सभी रिजल्ट विलंब से घोषित किए गए, किंतु सत्र समय से चालू हुए हैं। छात्रा का सत्र पूर्ण हो चुका है जिस पर न्यायालय ने उक्त अंतरिम आदेश देते हुए बोर्ड को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा।
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