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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur: Challenge to amend the Prevention of Corruption Act, information sought in relation to the order passed by any other court

जबलपुर: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन को चुनौती, किसी अन्य न्यायालय द्वारा पारित आदेश के संबंध में मांगी जानकारी

Wed, 23 Feb 2022 08:36 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 23 Feb 2022 08:36 PM IST
सार

केन्द्र सरकार द्वारा जुलाई 2018 को एक्ट में संशोधन किया गया है। जिसके बाद जांच एजेन्सियों को भ्रष्ट लोक सेवकों पर कार्रवाई के लिए विभागीय अनुमति लेना आवश्यक है। इसे चुनौती देते हुए याचिका लगाई गई है। 

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Jabalpur: Challenge to amend the Prevention of Corruption Act, information sought in relation to the order passed by any other court
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस एमएस भट्टी की युगलपीठ ने इस संबंध में किसी अन्य न्यायालय द्वारा आदेश पारित किए जाने के संबंध में याचिकाकर्ता से जानकारी मांगी है। याचिका पर अगली सुनवाई 14 मार्च को निर्धारित की गई है।
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नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि भ्रष्ट लोक सेवकों पर कार्रवाई के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम बनाया गया था। केन्द्र व राज्य सरकार की जांच एजेन्सियां भ्रष्ट लोक सेवकों के खिलाफ कार्रवाई करने स्वतंत्र थीं। केन्द्र सरकार द्वारा जुलाई 2018 को एक्ट में संशोधन किया गया है। जिसके बाद जांच एजेन्सियों को भ्रष्ट लोक सेवकों पर कार्रवाई के लिए विभागीय अनुमति लेना आवश्यक है। याचिका में कहा गया है कि प्रदेश में कई लोक सेवकों के खिलाफ जांच कई सालों से लंबित है। संशोधित एक्ट के कारण जांच एजेन्सी विभागीय अनुमति के बिना लोक सेवक के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती है। विभागीय अनुमति नहीं मिलने के कारण लंबित शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो सकेगी। इस बंधककारी नियम से जांच एजेन्सियों की कार्रवाई प्रभावित होगी।
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इसके अलावा आराधना भार्गव ने भी केन्द्र सरकार द्वारा किए गए संशोधन के संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी गई थी। युगलपीठ द्वारा दोनों याचिकाओं की सुनवाई संयुक्त रूप से की जारी रही है। बुधवार को सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याकिचाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद कुमार श्रीवास्तव तथा अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।
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