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जबलपुर: एडीपीओ भर्ती में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को चुनौती, हाईकोर्ट ने फैसला किया सुरक्षित
Sat, 26 Feb 2022 08:32 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 26 Feb 2022 08:32 PM IST
सार
एडीपीओ भर्ती में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण को कटघरे में रखा गया है। हाईकोर्ट ने सुनवाई पश्चात अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है।
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Jabalpur High Court
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारियों की लोक सेवा आयोग द्वारा की जा रही भर्तियों में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। जस्टिस शील नागू एवं जस्टिस डीके पालीवाल की युगलपीठ ने शनिवार को मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है।
मामला जबलपुर निवासी शिवम गौतम की ओर से दायर किया गया है। जिसमें एडीपीओ भर्ती में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण को कटघरे में रखा गया है। मामले में शासन की ओर से कहा गया कि इंद्रा शाहनी के प्रकरण में निर्धारित 50 फीसदी की सीमा संसद द्वारा 103वां शंशोधन कर समाप्त किया जा चुका है तथा इस याचिका में सिर्फ ओबीसी के ही 27 फीसदी आरक्षण को 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन करने का उल्लेख किया गया। जबकि प्रदेश में 73 फीसदी आरक्षण प्रवर्तन में है तथा ओबीसी का 27 फीसदी आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने उचित एवं न्यायोचित मान्य किया है।
आज दिनांक तक मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के अलावा देश की किसी भी हाइकोर्ट ने ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण को हस्तक्षेप नहीं किया है। 50 फीसदी की सीमा केवल ओबीसी के 27 फीसदी के संबंध में लागू नहीं होती। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 जनवरी 2022 को आदेश पारित किया गया है, जिसमें ओबीसी का 27 फीसदी तथा ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण मान्य किया गया है। इसके कारण अब 50 फीसदी की सीमा अस्तित्व हीन हो चुकी है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। मामले में शासन की ओर से विशेष आधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक शाह ने पक्ष रखा।
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मामला जबलपुर निवासी शिवम गौतम की ओर से दायर किया गया है। जिसमें एडीपीओ भर्ती में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण को कटघरे में रखा गया है। मामले में शासन की ओर से कहा गया कि इंद्रा शाहनी के प्रकरण में निर्धारित 50 फीसदी की सीमा संसद द्वारा 103वां शंशोधन कर समाप्त किया जा चुका है तथा इस याचिका में सिर्फ ओबीसी के ही 27 फीसदी आरक्षण को 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन करने का उल्लेख किया गया। जबकि प्रदेश में 73 फीसदी आरक्षण प्रवर्तन में है तथा ओबीसी का 27 फीसदी आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने उचित एवं न्यायोचित मान्य किया है।
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आज दिनांक तक मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के अलावा देश की किसी भी हाइकोर्ट ने ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण को हस्तक्षेप नहीं किया है। 50 फीसदी की सीमा केवल ओबीसी के 27 फीसदी के संबंध में लागू नहीं होती। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 जनवरी 2022 को आदेश पारित किया गया है, जिसमें ओबीसी का 27 फीसदी तथा ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण मान्य किया गया है। इसके कारण अब 50 फीसदी की सीमा अस्तित्व हीन हो चुकी है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। मामले में शासन की ओर से विशेष आधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक शाह ने पक्ष रखा।
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