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मध्यप्रदेश: गलत मोतियाबिंद ऑपरेशन की शिकार दो महिलाओं की एक-एक आंख निकाली
Mon, 19 Aug 2019 06:33 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाल, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाल, इंदौर
Published by: Trainee Trainee
Updated Mon, 19 Aug 2019 06:33 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : फाइल फोटो
मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान एक स्थानीय अस्पताल में कथित तौर पर बैक्टीरिया के घातक संक्रमण से 11 मरीजों के नेत्र की रोशनी जाने का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि दो अन्य पीड़ित महिलाओं के बारे में खुलासा हुआ है कि संक्रमण ज्यादा फैलने से डॉक्टरों को उनकी एक-एक आंख निकालनी पड़ी।
मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी प्रवीण जड़िया ने सोमवार को बताया कि इंदौर नेत्र चिकित्सालय में मुन्नी बाई रघुवंशी और राधा यादव का पांच अगस्त को मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया था। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद दोनों मरीजों की संबंधित आंख में बैक्टीरिया का संक्रमण ज्यादा फैल गया था। नतीजतन 13-14 अगस्त को डॉक्टरों को एक और सर्जरी के जरिए दोनों मरीजों की एक-एक आंख निकालनी पड़ी थी। अगर संक्रमण मरीजों के मस्तिष्क तक पहुंच जाता, तो उनकी जान को खतरा भी हो सकता था।
जड़िया ने बताया कि वर्तमान में दोनों मरीजों के शरीर में बैक्टीरिया का संक्रमण नहीं है। उनकी संक्रमित आंख निकाले जाने के ऑपरेशन के बाद उनके घाव सूख रहे हैं। घाव सूखने के बाद आंख की खाली जगह पर कॉस्मेटिक सर्जरी के जरिए कृत्रिम आंख लगाई जाएगी।
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मध्य प्रदेश सरकार बिगड़े मोतियाबिंद ऑपरेशन के शिकार आठ मरीजों का इलाज इंदौर के चोइथराम हॉस्पिटल में करा रही है, जबकि तीन गंभीर मरीजों को चेन्नई के शंकर नेत्रालय भेजने का निर्णय किया गया है।
चोइथराम हॉस्पिटल के मैनेजिंग ट्रस्टी अश्विनी वर्मा ने बताया कि आंख गंवाने वाली दोनों महिलाओं को 10 दिन बाद दोबारा बुलाया गया है। इस बीच, गैर सरकारी स्वास्थ्य नेटवर्क जन स्वास्थ्य अभियान मध्यप्रदेश ने इंदौर नेत्र चिकित्सालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
नेटवर्क के कार्यकर्ता अमूल्य निधि ने कहा कि इस अस्पताल में दोनों महिलाओं के पांच अगस्त को किए गए मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान कथित बैक्टीरिया संक्रमण फैल गया था। इसके बावजूद मेडिकल प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए अस्पताल में नए मरीजों की नेत्र सर्जरी की जाती रही थी। नतीजतन आठ अगस्त को मोतियाबिंद ऑपरेशन से गुजरे 11 अन्य मरीजों की संबंधित आंख की रोशनी भी संक्रमण के कारण चली गई।
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मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी प्रवीण जड़िया ने सोमवार को बताया कि इंदौर नेत्र चिकित्सालय में मुन्नी बाई रघुवंशी और राधा यादव का पांच अगस्त को मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया था। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद दोनों मरीजों की संबंधित आंख में बैक्टीरिया का संक्रमण ज्यादा फैल गया था। नतीजतन 13-14 अगस्त को डॉक्टरों को एक और सर्जरी के जरिए दोनों मरीजों की एक-एक आंख निकालनी पड़ी थी। अगर संक्रमण मरीजों के मस्तिष्क तक पहुंच जाता, तो उनकी जान को खतरा भी हो सकता था।
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जड़िया ने बताया कि वर्तमान में दोनों मरीजों के शरीर में बैक्टीरिया का संक्रमण नहीं है। उनकी संक्रमित आंख निकाले जाने के ऑपरेशन के बाद उनके घाव सूख रहे हैं। घाव सूखने के बाद आंख की खाली जगह पर कॉस्मेटिक सर्जरी के जरिए कृत्रिम आंख लगाई जाएगी।
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मध्य प्रदेश सरकार बिगड़े मोतियाबिंद ऑपरेशन के शिकार आठ मरीजों का इलाज इंदौर के चोइथराम हॉस्पिटल में करा रही है, जबकि तीन गंभीर मरीजों को चेन्नई के शंकर नेत्रालय भेजने का निर्णय किया गया है।
चोइथराम हॉस्पिटल के मैनेजिंग ट्रस्टी अश्विनी वर्मा ने बताया कि आंख गंवाने वाली दोनों महिलाओं को 10 दिन बाद दोबारा बुलाया गया है। इस बीच, गैर सरकारी स्वास्थ्य नेटवर्क जन स्वास्थ्य अभियान मध्यप्रदेश ने इंदौर नेत्र चिकित्सालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
नेटवर्क के कार्यकर्ता अमूल्य निधि ने कहा कि इस अस्पताल में दोनों महिलाओं के पांच अगस्त को किए गए मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान कथित बैक्टीरिया संक्रमण फैल गया था। इसके बावजूद मेडिकल प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए अस्पताल में नए मरीजों की नेत्र सर्जरी की जाती रही थी। नतीजतन आठ अगस्त को मोतियाबिंद ऑपरेशन से गुजरे 11 अन्य मरीजों की संबंधित आंख की रोशनी भी संक्रमण के कारण चली गई।
