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Ujjain Mahakal: महाकाल मंदिर में मस्जिद निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
Fri, 07 Nov 2025 06:55 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Fri, 07 Nov 2025 06:55 PM IST
सार
Indore News: सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल मंदिर विस्तारीकरण के लिए तोड़ी गई तकिया मस्जिद के पुनर्निर्माण की याचिका पर फैसला दे दिया है। याचिकाकर्ताओं ने इसे वक्फ की संपत्ति बताया था लेकिन कोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई को सही माना है।
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10 माह पहले मस्जिद को विस्तारीकरण की जद में आने पर तोड़ा गया था।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
उज्जैन महाकाल मंदिर (Ujjain Mahakal) विस्तारीकरण परियोजना के तहत हटाई गई तकिया मस्जिद को दोबारा बनवाने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया है। शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने इस मामले में प्रशासन के हक में फैसला सुनाया। यह मामला करीब 10 माह पुराना है, जब मस्जिद को विस्तारीकरण की जद में आने पर तोड़ा गया था। इस फैसले के बाद अब कई दिनों से बंद पड़ा महाकाल मंदिर विस्तारीकरण का काम फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
क्या है पूरा मामला?
इसी साल 11 जनवरी 2025 को, उज्जैन जिला प्रशासन ने महाकाल मंदिर के शक्ति पथ के पास बनी पार्किंग से लगी जमीन को खाली करवाने के लिए बड़ी कार्रवाई की थी। इस दौरान वहां मौजूद 257 मकानों के साथ तकिया मस्जिद को भी ध्वस्त कर दिया गया था। मुस्लिम पक्ष का दावा था कि यह 200 वर्ष पुरानी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है। वहीं, प्रशासन ने इसे अवैध निर्माण बताते हुए मकानों और मस्जिद को तोड़ा था।
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
तकिया मस्जिद को गिराए जाने के खिलाफ, मस्जिद में नमाज़ अदा करने वाले तेरह नमाजियों ने इस कार्रवाई को इंदौर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने जमीन को वक्फ की बताते हुए मस्जिद तोड़ने की प्रक्रिया को गलत ठहराया था। हालांकि, पहले सिंगल बेंच और फिर डबल बेंच, दोनों ने ही याचिकाकर्ताओं की अपील को खारिज कर दिया था और प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने भी अपील की खारिज
हाईकोर्ट में हार के बाद, पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में महाकाल मंदिर के लिए ली गई जमीन के अधिग्रहण को गलत बताया गया था। इसमें आरोप लगाया गया कि वक्फ की जमीन पर गलत तरीके से अधिग्रहण किया गया और विध्वंस से पहले भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिग्रहण को चुनौती देने वाली और मस्जिद बनाने की अपील को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील सैयद अशहर अली वारसी ने भी पुष्टि की है कि सुप्रीम कोर्ट से उनकी अपील खारिज हो गई है।
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क्या है पूरा मामला?
इसी साल 11 जनवरी 2025 को, उज्जैन जिला प्रशासन ने महाकाल मंदिर के शक्ति पथ के पास बनी पार्किंग से लगी जमीन को खाली करवाने के लिए बड़ी कार्रवाई की थी। इस दौरान वहां मौजूद 257 मकानों के साथ तकिया मस्जिद को भी ध्वस्त कर दिया गया था। मुस्लिम पक्ष का दावा था कि यह 200 वर्ष पुरानी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है। वहीं, प्रशासन ने इसे अवैध निर्माण बताते हुए मकानों और मस्जिद को तोड़ा था।
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हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
तकिया मस्जिद को गिराए जाने के खिलाफ, मस्जिद में नमाज़ अदा करने वाले तेरह नमाजियों ने इस कार्रवाई को इंदौर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने जमीन को वक्फ की बताते हुए मस्जिद तोड़ने की प्रक्रिया को गलत ठहराया था। हालांकि, पहले सिंगल बेंच और फिर डबल बेंच, दोनों ने ही याचिकाकर्ताओं की अपील को खारिज कर दिया था और प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने भी अपील की खारिज
हाईकोर्ट में हार के बाद, पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में महाकाल मंदिर के लिए ली गई जमीन के अधिग्रहण को गलत बताया गया था। इसमें आरोप लगाया गया कि वक्फ की जमीन पर गलत तरीके से अधिग्रहण किया गया और विध्वंस से पहले भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिग्रहण को चुनौती देने वाली और मस्जिद बनाने की अपील को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील सैयद अशहर अली वारसी ने भी पुष्टि की है कि सुप्रीम कोर्ट से उनकी अपील खारिज हो गई है।
