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Loksabha Election: पहले आम चुनाव से ही रहा सभी दलों के आकर्षण का केंद्र आदिवासी, साधने आते रहे इंदिरा-राजीव
Fri, 09 Feb 2024 08:00 AM IST
दिनेश शर्मा
कमलेश सेन, इंदौर
कमलेश सेन, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 09 Feb 2024 08:00 AM IST
सार
झाबुआ अब रतलाम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। आरंभ से ही झाबुआ में साक्षरता प्रतिशत बहुत कम रहा है। 1951 में ग्रामीण क्षेत्र और शिक्षा और साक्षरता का न्यूनतम होना इस क्षेत्र में मुख्य वजह रहा है।
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पहले चुनाव में झाबुआ संसदीय सीट की स्थिति
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश का झाबुआ ऐसा आदिवासी क्षेत्र है जहां से सभी राजनीतिक दलों के नेता चुनाव प्रचार अभियान का शुरुआत करते हैं। ये सिलसिला पहले आम चुनाव से चला आ रहा है। पहले राजीव-इंदिरा आते थे, अब पीएम मोदी आ रहे हैं।
विधानसभा चुनाव 2023 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झाबुआ में आमसभा को संबोधित किया था, वहीं कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी ने झाबुआ अंचल से सटे धार जिले के कुक्षी में सभा को संबोधित किया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी झाबुआ में कई बार आए थे। अब लोकसभा चुनाव 2024 के पहले पीएम मोदी फिर यहां से चुनाव प्रचार का आगाज करने वाले हैं। इस तरह से साफ जाहिर होता है कि आदिवासी वोट पर सभी दलों की निगाहें होती हैं।
देश में लोकसभा चुनाव 2024 की हलचल आरंभ हो गई है। अंतरिम बजट पेश किया जा चुका है, राजनैतिक सभाओं और यात्रा के दौर शुरू हो चुके हैं। मध्यभारत का आदिवासी बहुल जिला झाबुआ, जो देश के पहले चुनाव 1951 से ही लोकसभा क्षेत्र था और वह भी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था। मध्य भारत में कुल नौ लोकसभा सीटें थीं, उसमें से झाबुआ आदिवासी क्षेत्र की आरक्षित सीट थी।
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झाबुआ में आजादी के पूर्व राजशाही रही और आजादी के बाद यह मध्य भारत का हिस्सा बना। आदिवासी बहुल क्षेत्र होने से यह क्षेत्र लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रहा है। वर्तमान में विधानसभा में जिले की पांचों सीटें आरक्षित हैं।
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विधानसभा चुनाव 2023 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झाबुआ में आमसभा को संबोधित किया था, वहीं कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी ने झाबुआ अंचल से सटे धार जिले के कुक्षी में सभा को संबोधित किया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी झाबुआ में कई बार आए थे। अब लोकसभा चुनाव 2024 के पहले पीएम मोदी फिर यहां से चुनाव प्रचार का आगाज करने वाले हैं। इस तरह से साफ जाहिर होता है कि आदिवासी वोट पर सभी दलों की निगाहें होती हैं।
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देश में लोकसभा चुनाव 2024 की हलचल आरंभ हो गई है। अंतरिम बजट पेश किया जा चुका है, राजनैतिक सभाओं और यात्रा के दौर शुरू हो चुके हैं। मध्यभारत का आदिवासी बहुल जिला झाबुआ, जो देश के पहले चुनाव 1951 से ही लोकसभा क्षेत्र था और वह भी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था। मध्य भारत में कुल नौ लोकसभा सीटें थीं, उसमें से झाबुआ आदिवासी क्षेत्र की आरक्षित सीट थी।
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झाबुआ में आजादी के पूर्व राजशाही रही और आजादी के बाद यह मध्य भारत का हिस्सा बना। आदिवासी बहुल क्षेत्र होने से यह क्षेत्र लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रहा है। वर्तमान में विधानसभा में जिले की पांचों सीटें आरक्षित हैं।
झाबुआ लोकसभा सीट पर पहले चुनाव में प्रत्याशी
- फोटो : अमर उजाला
अब रतलाम झाबुआ संसदीय क्षेत्र
झाबुआ अब रतलाम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। आरंभ से ही झाबुआ में साक्षरता प्रतिशत बहुत कम रहा है। 1951 में ग्रामीण क्षेत्र और शिक्षा और साक्षरता का न्यूनतम होना इस क्षेत्र में मुख्य वजह रहा है।
अमर सिंह डामोर थे पहले सांसद
1925 में जन्मे अमरसिंह डामोर झाबुआ संसदीय क्षेत्र के 1951 में पहले निर्वाचित सांसद थे। आपने हाईस्कूल तक की शिक्षा इंदौर में प्राप्त की थी। डामोर इंदौर नगर कांग्रेस के सचिव भी रहे थे। वे राज्य प्रजामंडल और झाबुआ कांग्रेस पिछड़ा वर्ग के सदस्य भी रहे थे।
प्रथम चुनाव में झाबुआ संसदीय सीट के 3 लाख 69 हजार 32 मतदाता थे। उसमें से 1 लाख 40 हजार 946 मतदाताओं ने वोट डाला था, यानि मात्र 38.19 प्रतिशत ने अपने मत का उपयोग किया था। चुनाव मैदान में तीन उम्मीदवार मैदान में थे और अमरसिंह डामोर 13,148 मतों से विजयी रहे थे। उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के प्रताप सिंह को पराजित किया था। आजादी के आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका और पार्टी के नेतृत्व के प्रति देश में सहानुभूति की लहर थी। इसलिए जाहिर है कि देश के पहले आम चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार सर्वाधिक विजयी हुए थे।
2009 से हुई रतलाम-झाबुआ सीट
झाबुआ लोकसभा क्षेत्र 2004 तक स्वतंत्र लोकसभा क्षेत्र था। 2002 के परिसीमन के बाद 2009 से झाबुआ रतलाम लोकसभा क्षेत्र में शामिल हो गया और यह सीट रतलाम झाबुआ संसदीय क्षेत्र के रूप में जाना जाने लगा।
2019 में भाजपा के गुमान सिंह डामोर जीते
2019 के लोकसभा चुनाव में रतलाम झाबुआ लोकसभा क्षेत्र में 9 उम्मीदवार मैदान में थे। कुल मतदाता 18 लाख 51 हजार 112 थे, जबकि वोट 14 लाख 509 ने डाला था। मतदान 75.66 प्रतिशत रहा था। नोटा में 35 हजार 431 वोट पड़े थे। इस चुनाव में भाजपा के गुमान सिंह डामोर जीते थे। उन्होंने कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया को 90 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।
झाबुआ अब रतलाम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। आरंभ से ही झाबुआ में साक्षरता प्रतिशत बहुत कम रहा है। 1951 में ग्रामीण क्षेत्र और शिक्षा और साक्षरता का न्यूनतम होना इस क्षेत्र में मुख्य वजह रहा है।
अमर सिंह डामोर थे पहले सांसद
1925 में जन्मे अमरसिंह डामोर झाबुआ संसदीय क्षेत्र के 1951 में पहले निर्वाचित सांसद थे। आपने हाईस्कूल तक की शिक्षा इंदौर में प्राप्त की थी। डामोर इंदौर नगर कांग्रेस के सचिव भी रहे थे। वे राज्य प्रजामंडल और झाबुआ कांग्रेस पिछड़ा वर्ग के सदस्य भी रहे थे।
प्रथम चुनाव में झाबुआ संसदीय सीट के 3 लाख 69 हजार 32 मतदाता थे। उसमें से 1 लाख 40 हजार 946 मतदाताओं ने वोट डाला था, यानि मात्र 38.19 प्रतिशत ने अपने मत का उपयोग किया था। चुनाव मैदान में तीन उम्मीदवार मैदान में थे और अमरसिंह डामोर 13,148 मतों से विजयी रहे थे। उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के प्रताप सिंह को पराजित किया था। आजादी के आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका और पार्टी के नेतृत्व के प्रति देश में सहानुभूति की लहर थी। इसलिए जाहिर है कि देश के पहले आम चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार सर्वाधिक विजयी हुए थे।
2009 से हुई रतलाम-झाबुआ सीट
झाबुआ लोकसभा क्षेत्र 2004 तक स्वतंत्र लोकसभा क्षेत्र था। 2002 के परिसीमन के बाद 2009 से झाबुआ रतलाम लोकसभा क्षेत्र में शामिल हो गया और यह सीट रतलाम झाबुआ संसदीय क्षेत्र के रूप में जाना जाने लगा।
2019 में भाजपा के गुमान सिंह डामोर जीते
2019 के लोकसभा चुनाव में रतलाम झाबुआ लोकसभा क्षेत्र में 9 उम्मीदवार मैदान में थे। कुल मतदाता 18 लाख 51 हजार 112 थे, जबकि वोट 14 लाख 509 ने डाला था। मतदान 75.66 प्रतिशत रहा था। नोटा में 35 हजार 431 वोट पड़े थे। इस चुनाव में भाजपा के गुमान सिंह डामोर जीते थे। उन्होंने कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया को 90 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।
