{"_id":"645a2fe0666c4c7af304b5f5","slug":"there-were-four-dead-bodies-on-me-i-was-also-considered-dead-i-shouted-and-said-to-take-me-out-2023-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Khargone Bus Accident: 'चार लाशें थी मेरे ऊपर, मुझे भी मरा समझ लिया, मैं चिल्लाया- निकालो मुझे'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Khargone Bus Accident: 'चार लाशें थी मेरे ऊपर, मुझे भी मरा समझ लिया, मैं चिल्लाया- निकालो मुझे'
Tue, 09 May 2023 05:59 PM IST
अभिषेक चेंडके
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
Published by: अभिषेक चेंडके
Updated Tue, 09 May 2023 05:59 PM IST
सार
खरगोन के समीप हुए बस हादसे को घायल जीवन भर नहीं भूल सकते। घायलों ने हादसे के बाद बस के भीतर के हाल बताए, जो दिल दहलाने वाले थे।
विज्ञापन
घायल ने सुनाई आंखों देखी।
- फोटो : amar ujala digital
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
खरगोन के समीप दसंगा ब्रिज से नीचे गिरी बस में 25 लोगों की मौतें हो गई। 20 से ज्यादा लोग जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कुछ खुशकिस्मत भी हैं जिन्हें ज्यादा चोटें नहीं आईं। घायल इस हादसे को जीवनभर नहीं भूल सकते। घायलों ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान हादसे के बाद बस के भीतर के हालात बताए, जो दिल दहलाने वाले थे। बस के भीतर खून बिखरा पड़ा था। दर्द से लोग चीख रहे थे, कुछ लोगों की सांसें थम चुकी थीं। खरगोन के जिला अस्पताल में भर्ती घायल युवक मोहम्मद हनीफ खान ने हादसे का आंखो देखा हाल बताया।
विज्ञापन
बोनट के पास बैठा था, बस गिरी तो लगा कि अब जिंदगी खत्म
हनीफ खान ने बताया कि वह बस के बोनट के पास ही बैठा था। बस में सारी सीटें भर गई थीं और दस-पंद्रह यात्री बस में खड़े थे। ड्राइवर ने बस की रफ्तार तेज कर रखी थी। पुल के पास बस नहीं संभली। जैसे ही बस रैलिंग को तोड़ते हुए नदी में गिरने लगी तो मैंने आंखें बंद कर ली, लगा अब नहीं बच पाऊंगा, बस पलटकर नदी में गिरी। नदी सूखी थी और चट्टानों से बस टकरा गई। बस का दरवाजा भी नहीं खुल रहा था। आसपास के ग्रामीण मदद के लिए आए। उन्होंने खिड़की के शीशे तोड़कर घायलों को निकाला।
विज्ञापन
लाशों के नीचे मैं दबा था
मैं बोनट के पास था। इस वजह से बस के गिरते समय लोग आगे की तरफ गिरे। मैंने दरवाजे को पकड़ लिया था। इस वजह से चट्टान से टकराने से बच गया। जो लोग आगे की तरफ गिरे, उनके चेहरे और सिर में कांच घुस गए और पत्थरों की चोट सीधे सिर पर लगी। मेरे ऊपर खून से लथपथ चार लोग गिरे। चारों मर चुके थे। मेरे एक हाथ की हड्डी टूट गई थी। मैं उन्हें अपने ऊपर से हटा भी नहीं पा रहा था। जब बस में शीशा तोड़कर एक ग्रामीण युवक घायलों को निकालने के लिए आया तो मैंने पैर हिलाया। चिल्लाकर कहा कि मैं जिंदा हूं। मुझे बचाओ। तब उसने ऊपर से चार लाशों को हटाकर निकाला। हादसे के आधे घंटे बाद मुझे बस से निकाल कर अस्पताल पहुंचाया गया।
विज्ञापन
