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Indore News: खुरसानी इमली के पेड़ कटे पर वन विभाग ने नकार दिया, कहा- हमने पेड़ ले जाने की अनुमति भी नहीं दी
Sat, 01 Jul 2023 06:47 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sat, 01 Jul 2023 06:47 PM IST
सार
मांडू में दुर्लभ प्रजाति के खुरसानी इमली के पेड़ काटने पर भड़के आदिवासी, वन विभाग कह रहा पेड़ काटे ही नहीं गए
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पेड़ काटने के बाद हैदराबाद शिफ्ट किए गए
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के पास मांडू में खुरसानी इमली के दुर्लभ पेड़ काटे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर जहां आदिवासी इस मामले पर प्रशासन को घेर रहे हैं वहीं अधिकारी इस पर बात करने से बच रहे हैं। मांडू में पेड़ काटे जाने के मामले पर जब अमर उजाला ने वन विभाग के अधिकारियों से बात की तो वे साफ साफ इससे इनकार कर गए। उन्होंने कहा कि पेड़ काटे ही नहीं गए। जबकि पेड़ काटे जाने और पेड़ हैदराबाद ले जाने के तमाम वीडियो उपलब्ध हैं।
क्या है मामला
इंदौर के पास धार जिले के मांडू में बेहद दुर्लभ प्रजाति के खुरासानी इमली के पेड़ हैं। अपने खास स्वाद के साथ ही ये औषधीय गुणों के लिए भी जाने जाते हैं। दुनियाभर में भारी डिमांड वाले इन पेड़ों को काटने की अनुमति प्रशासन ने हैदराबाद की ग्रीन किंगडम नामक प्राइवेट कंपनी को दी है। अब इन्हें काटने का विरोध तेज होता जा रहा है। आदिवासियों का कहना है कि हमने कई सालों तक इन पेड़ों को सहेजा और बड़ा किया। जब ये पेड़ हमारा घर चलाने लगे तो प्रशासनिक अधिकारियों ने एक कंपनी से मिलीभगत कर नियमविरुद्ध पेड़ों को कटवा दिया। अब ये पेड़ देश के नामचीन अरबपतियों के घरों में लाखों रुपए लेकर लगाए जाएंगे। कंपनी का कहना है कि हमने वन विभाग और जिला प्रशासन से अनुमति लेने के बाद में ही यह पेड़ काटे हैं जबकि वनविभाग कह रहा है कि न तो हमने कोई अनुमति दी है न ही पेड़ काटे गए हैं।
पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी
तत्कालीन रेंजर ब्रजेंद्र तिवारी का कहना है कि दो पेड़ काटे गए थे जिन्हें वापस लगा दिया। वे फिर से फलने लगे हैं। दो पेड़ काटे जाने के बाद कलेक्टर ने अनुमति पर प्रतिबंध लगा दिया था जिसके बाद कोई पेड़ नहीं काटा गया। तिवारी ने कहा कि यह घटना भी मेरे कार्यकाल में नहीं हुई। उस वक्त वहां पर प्रवेश पाटीदार रेंजर थे और अभी महेश अहिरवार रेंजर हैं। तिवारी का कहना है कि वन विभाग पेड़ काटने की अनुमति जारी भी नहीं करता है। यह पेड़ राजस्व विभाग की भूमि में लगे थे और राजस्व विभाग ही इन पेड़ों को काटने की अनुमति देता है। वन विभाग कटे पेड़ों को ले जाने के लिए अनुज्ञा पत्र जारी करता है वह भी हमने जारी नहीं किया था।
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बड़ा सवाल- अनुमति जारी नहीं की तो पेड़ हैदराबाद कैसे गए?
वन विभाग का कहना है कि कटे पेड़ों को ले जाने के लिए विभाग अनुमति पत्र जारी करता है लेकिन जब अनुमति दी ही नहीं गई तो फिर पेड़ ट्रकों के माध्यम से कैसे मांडू से हैदराबाद तक ले जाए गए। वहीं कंपनी का कहना है कि वन विभाग की अनुमति से ही पेड़ों को ले जाया गया।
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क्या है मामला
इंदौर के पास धार जिले के मांडू में बेहद दुर्लभ प्रजाति के खुरासानी इमली के पेड़ हैं। अपने खास स्वाद के साथ ही ये औषधीय गुणों के लिए भी जाने जाते हैं। दुनियाभर में भारी डिमांड वाले इन पेड़ों को काटने की अनुमति प्रशासन ने हैदराबाद की ग्रीन किंगडम नामक प्राइवेट कंपनी को दी है। अब इन्हें काटने का विरोध तेज होता जा रहा है। आदिवासियों का कहना है कि हमने कई सालों तक इन पेड़ों को सहेजा और बड़ा किया। जब ये पेड़ हमारा घर चलाने लगे तो प्रशासनिक अधिकारियों ने एक कंपनी से मिलीभगत कर नियमविरुद्ध पेड़ों को कटवा दिया। अब ये पेड़ देश के नामचीन अरबपतियों के घरों में लाखों रुपए लेकर लगाए जाएंगे। कंपनी का कहना है कि हमने वन विभाग और जिला प्रशासन से अनुमति लेने के बाद में ही यह पेड़ काटे हैं जबकि वनविभाग कह रहा है कि न तो हमने कोई अनुमति दी है न ही पेड़ काटे गए हैं।
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पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी
तत्कालीन रेंजर ब्रजेंद्र तिवारी का कहना है कि दो पेड़ काटे गए थे जिन्हें वापस लगा दिया। वे फिर से फलने लगे हैं। दो पेड़ काटे जाने के बाद कलेक्टर ने अनुमति पर प्रतिबंध लगा दिया था जिसके बाद कोई पेड़ नहीं काटा गया। तिवारी ने कहा कि यह घटना भी मेरे कार्यकाल में नहीं हुई। उस वक्त वहां पर प्रवेश पाटीदार रेंजर थे और अभी महेश अहिरवार रेंजर हैं। तिवारी का कहना है कि वन विभाग पेड़ काटने की अनुमति जारी भी नहीं करता है। यह पेड़ राजस्व विभाग की भूमि में लगे थे और राजस्व विभाग ही इन पेड़ों को काटने की अनुमति देता है। वन विभाग कटे पेड़ों को ले जाने के लिए अनुज्ञा पत्र जारी करता है वह भी हमने जारी नहीं किया था।
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बड़ा सवाल- अनुमति जारी नहीं की तो पेड़ हैदराबाद कैसे गए?
वन विभाग का कहना है कि कटे पेड़ों को ले जाने के लिए विभाग अनुमति पत्र जारी करता है लेकिन जब अनुमति दी ही नहीं गई तो फिर पेड़ ट्रकों के माध्यम से कैसे मांडू से हैदराबाद तक ले जाए गए। वहीं कंपनी का कहना है कि वन विभाग की अनुमति से ही पेड़ों को ले जाया गया।
