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MP: स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े,मजदूरी की, 94 साल की आयु में सीखा हारमोनियम, वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद मोहन की कहानी

Sat, 22 Mar 2025 12:00 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: उदित दीक्षित Updated Sat, 22 Mar 2025 12:00 PM IST
सार

Anand Mohan Mathur: इंदौर के वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी आनंद मोहन माथुर का जन्म अंग्रेजी हुकूमत में हुआ था। किशोरावस्था में ही वे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए। इसके कारण उनके पिता को सरकारी नौकरी गंवानी पड़ी। पढ़िए, उनके जीवन से जुड़ी खास बातें...

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Senior Advocate Anand Mohan Mathur Died at 97 age Know About His Life Story in Hindi
आनंद मोहन माथुर का 97 वर्ष की आयु में निधन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर के वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी आनंद मोहन माथुर नहीं रहे। लंबे समय से बीमार चल रहे माथुर ने 97 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनका जन्म धार के मिशन अस्पताल में 23 जुलाई 1927 को हुआ था। वे जिंदादिल और बगावती तेवर रखने वाले व्यक्ति थे। वे गरीबों और मजबूरों की हमेशा मदद करते थे, लेकिन गलत बात को कभी सहन नहीं करते थे। आइए, अब जानते हैं आनंद मोहन माथुर के जीवन से जुड़ी खास बातें...     

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स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया, परेशानियां झेली 
आनंद मोहन माथुर का जन्म अंग्रेजी हुकूमत के दौरे में हुआ था। अंग्रेजों का अत्याचार देखकर वे बड़े हुए। किशोरावस्था में ही वे स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने लगे। इसके कारण उनके पिता को सरकारी नौकरी गंवानी पड़ी और खुद उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। इससे उनका बचपन संघर्ष और गरीबी में बीता। उन्हें डॉक्टर बनना था, ऐसे में उन्होंने मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया, लेकिन रुपये नहीं होने के कारण कॉलेज की फीस नहीं भर पाए। इस कारण उन्हें जब भी किसी निर्धन होनहार छात्र के बारे में पता चलता था तो वे उसकी मदद करते थे। खुद डॉक्टर नहीं बन पाने पर उन्होंने अपने पिता से कहा था कि मैं तो डॉक्टर नहीं बन पाया, लेकिन आपकी पौती को डॉक्टर जरूर बनाऊंगा। उन्होंने अपना यह वादा निभाया भी, उनकी बेटी पूनम  डॉक्टर हैं। अपने जीवन में आनंद मोहन माथुर ने देश और समाजसेवा को पहले महत्व दिया, फिर अपने परिवार की चिंता की।
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मजदूरी की, कॉलेज में पढ़ाया, अधिवक्ता बने 
इंदौर में बीते शुरुआती दिनों में आनंद मोहन माथुर ने मालवा मिल में बदली मजदूर के रूप में भी काम किया था। उन्होंने कॉलेज में बच्चों को भी पढ़ाया। अधिवक्ता बनने के बाद उन्हें जो केस फीस मिलती थी, उसका बड़ा हिस्सा वे समाजसेवा से जुड़े कामों में खर्च करते थे। उन्होंने अपने खर्च पर इंदौर की कान्ह नदी पर एक झूला ब्रिज बनवाया। साथ ही, आनंद मोहन माथुर सभागृह का निर्माण भी कराया। उन्होंने अपनी बेशकीमती जमीन समाज से जुड़े कामों के लिए दे दी थी।  

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बेटी को विदा कर भोपाल रवाना हुए 
वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद मोहन माथुर के जीवन का एक किस्सा भोपाल गैसकांड से भी जुड़ा है। दरअसल, जिस दिन भोपाल में गैसकांड हुआ, उसी दिन उनकी बेटी पूनम माथुर की शादी थी। देर रात आनंदजी को भोपाल से बुलावा आया कि वे जितनी जल्दी हो सके, भोपाल आ जाए। ऐसे में माथुर ने बेटी पूनम को विदा किया और फिर तुरंत भोपाल के लिए रवाना हो गए। उन्होंने ही इस गैसकांड के खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई थी और डाउ केमिकल फैक्टरी पर मुआवजा देने के लिए दबाव बनाया।

बगावती तेवर रहे माथुर के
माथुरजी वैसे परोपकारी और दरियादिल थे। लेकिन, अन्याय के खिलाफ उनके तेवर हमेशा बगावती रहते थे। उन्होंने सरकार के खिलाफ कई याचिकाएं लगाईं और आंदोलनों में भी हिस्सा लिया। बिना कोई फीस लिए उन्होंने कई गरीब निर्धन परिवारों के केस लड़े और उन्हें न्याय दिलाया। कई जनहित याचिकाएं भी उन्होंने प्रदेश और शहर की भलाई के लिए लगाई। मच्छीबाजार सड़क निर्माण, शेखर नगर बस्ती हटाने के विरोध में उन्होंने सड़क पर आकर लड़ाई लड़ी।

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94 साल की उम्र में सीखा हारमोनियम
आनंद मोहन माथुर संगीत प्रेमी भी थे। उन्होंने 94 साल की उम्र में हारमोनियम सिखा। इसके बाद वे हर दिन उस पर रियाज भी किया करते थे। वे हिंदी के अलावा अंग्रेजी, मराठी और गुजराती भाषा भी जानते थे। 

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