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Indore News: पीथमपुर में जहरीले कचरे पर सुनवाई टली, 27 फरवरी को है जलाने का आदेश
Mon, 24 Feb 2025 06:16 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Mon, 24 Feb 2025 06:16 PM IST
सार
Indore News: पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के जलने के ट्रायल रन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है, क्योंकि जज बीआर गवई अवकाश पर हैं। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 27 फरवरी से कचरा जलाने का आदेश जारी कर दिया है।
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पीथमपुर में रामकी इंडस्ट्री में कचरा रखा है।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के जलने के संबंध में 27 फरवरी से प्रारंभ होने वाले ट्रायल रन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई स्थगित कर दी गई है। सोमवार को इस मामले में इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ता चिन्मय मिश्र द्वारा दाखिल याचिका की सुनवाई तय थी, परंतु सुप्रीम कोर्ट के जज बीआर गवई के अवकाश पर होने के कारण यह कार्यवाही टल गई।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को जलाने का आदेश जारी कर दिया है, जिसके तहत 27 फरवरी से पहले चरण की शुरुआत की जाएगी। मिश्र ने बताया कि उन्होंने पहले ट्रायल से पहले ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आवेदन कर दिया है, और वे 18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार एवं उसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस भेजकर उनसे प्रतिक्रिया मांगी थी। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि 1984 की उस भयानक त्रासदी में 5,479 लोगों की मौत हो गई थी और पांच लाख से अधिक लोग दिव्यांग हो गए थे।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य के अधिकार और इंदौर शहर समेत आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए उत्पन्न जोखिमों को ध्यान में रखते हुए इस याचिका का संज्ञान लिया है। 2-3 दिसंबर 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से अत्यधिक जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट का रिसाव हुआ था, जिसने एक महा त्रासदी का रूप धारण कर लिया था। जस्टिस बीआर गवई और आगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 3 दिसंबर 2024 और 6 जनवरी 2025 के आदेशों को चुनौती देते हुए याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की थी। याचिकाकर्ता चिन्मय मिश्र ने एडवोकेट सर्वम ऋतम खरे के माध्यम से सुप्रीम अदालत में दायर याचिका में कहा कि वह पीथमपुर में 337 टन खतरनाक रासायनिक कचरे के निस्तारण के अधिकारियों के निर्णय से अत्यंत चिंतित हैं। निस्तारण स्थल के एक किलोमीटर के दायरे में कम से कम चार-पांच गांव स्थित हैं, जहां के निवासियों का जीवन और स्वास्थ्य गंभीर जोखिम में है। साथ ही यह भी उल्लेखनीय है कि 'गंभीर नदी' औद्योगिक क्षेत्र के पास से बहती है और 'यशवंत सागर बांध' को पानी की आपूर्ति करती है।
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18 फरवरी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सीधे कचरा जलाने के आदेश जारी किए थे। हाई कोर्ट के निर्देशानुसार, पहले चरण में 10 मीट्रिक टन कचरा 27 फरवरी से जलाया जाएगा, उसके बाद 4 मार्च से अगला 10 मीट्रिक टन और 10 मार्च से अंतिम 10 मीट्रिक टन कचरा ट्रायल रन में जलाया जाएगा। इस प्रकार कुल 30 मीट्रिक टन कचरे का ट्रायल रन किया जाएगा और इसकी रिपोर्ट 27 मार्च को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी। यदि ट्रायल रन के दौरान शासन पक्ष को किसी भी प्रकार की चिंता उत्पन्न होती है, तो वे बीच में ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में हस्तक्षेप करने का विकल्प अपना सकते हैं।
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दूसरी ओर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को जलाने का आदेश जारी कर दिया है, जिसके तहत 27 फरवरी से पहले चरण की शुरुआत की जाएगी। मिश्र ने बताया कि उन्होंने पहले ट्रायल से पहले ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आवेदन कर दिया है, और वे 18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार एवं उसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस भेजकर उनसे प्रतिक्रिया मांगी थी। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि 1984 की उस भयानक त्रासदी में 5,479 लोगों की मौत हो गई थी और पांच लाख से अधिक लोग दिव्यांग हो गए थे।
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साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य के अधिकार और इंदौर शहर समेत आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए उत्पन्न जोखिमों को ध्यान में रखते हुए इस याचिका का संज्ञान लिया है। 2-3 दिसंबर 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से अत्यधिक जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट का रिसाव हुआ था, जिसने एक महा त्रासदी का रूप धारण कर लिया था। जस्टिस बीआर गवई और आगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 3 दिसंबर 2024 और 6 जनवरी 2025 के आदेशों को चुनौती देते हुए याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की थी। याचिकाकर्ता चिन्मय मिश्र ने एडवोकेट सर्वम ऋतम खरे के माध्यम से सुप्रीम अदालत में दायर याचिका में कहा कि वह पीथमपुर में 337 टन खतरनाक रासायनिक कचरे के निस्तारण के अधिकारियों के निर्णय से अत्यंत चिंतित हैं। निस्तारण स्थल के एक किलोमीटर के दायरे में कम से कम चार-पांच गांव स्थित हैं, जहां के निवासियों का जीवन और स्वास्थ्य गंभीर जोखिम में है। साथ ही यह भी उल्लेखनीय है कि 'गंभीर नदी' औद्योगिक क्षेत्र के पास से बहती है और 'यशवंत सागर बांध' को पानी की आपूर्ति करती है।
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18 फरवरी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सीधे कचरा जलाने के आदेश जारी किए थे। हाई कोर्ट के निर्देशानुसार, पहले चरण में 10 मीट्रिक टन कचरा 27 फरवरी से जलाया जाएगा, उसके बाद 4 मार्च से अगला 10 मीट्रिक टन और 10 मार्च से अंतिम 10 मीट्रिक टन कचरा ट्रायल रन में जलाया जाएगा। इस प्रकार कुल 30 मीट्रिक टन कचरे का ट्रायल रन किया जाएगा और इसकी रिपोर्ट 27 मार्च को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी। यदि ट्रायल रन के दौरान शासन पक्ष को किसी भी प्रकार की चिंता उत्पन्न होती है, तो वे बीच में ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में हस्तक्षेप करने का विकल्प अपना सकते हैं।
