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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Pipliyahana pond dried up in April itself, the treatment plant that fills it does not even run for 24 hours

Indore: अप्रैल में ही सूख गया पिपलियाहाना तालाब, उसे भरने वाला ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं चलता 24 घंंटे

Mon, 24 Apr 2023 06:19 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Mon, 24 Apr 2023 06:19 PM IST
सार

तालाब के समीप जिला कोर्ट की बिल्डिंग बन रही है। इसके लिए पहले तालाब की जमीन पर ही निर्माण शुरू कर दिया गया था, लेकिन शहर के गणमान्य नागरिकों और जनता ने विरोध किया तो कोर्ट बिल्डिंग को पीछे हटकर बनाने का फैसला लेना पड़ा।

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Pipliyahana pond dried up in April itself, the treatment plant that fills it does not even run for 24 hours
अप्रैल मेें ही सूख गया पिपलियापाला तालाब। - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

इंदौर के पूर्वी क्षेत्र में आसपास के इलाकों का भूजल स्तर बढ़ाने वाला पिपलियाहाना तालाब खुद का जलस्तर ठीक नहीं रख पा रहा है। अप्रैल में ही तालाब 90 प्रतिशत सूख गया, जबकि पिछले साल जून तक यह भरा था। तालाब में हर दिन पांच लाख लीटर पानी देने वाला ट्रीटमेंट प्लांट भी पूरी क्षमता से नहीं चलता। ज्यादातर समय बंद रहता है। 

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ग्रीन ट्रिब्यूनल ने तालाब के जलभराव क्षेत्र को मुक्त रखने को कहा था। इसके बावजूद कोर्ट परिसर के निर्माण के लिए पहले तालाब के बीच में बनाई गई 12 फुट चौड़ी दीवार भी नहीं तोड़ी गई। एक अच्छे खासे तालाब को मैदान में तब्दील करने की तैयारी की जा रही है।
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इस तालाब के समीप जिला कोर्ट की नई बिल्डिंग बन रही है। इसके लिए पहले तालाब की जमीन पर ही निर्माण शुरू कर दिया गया था, लेकिन शहर के गणमान्य नागरिकों और जनता ने विरोध किया तो कोर्ट बिल्डिंग को पीछे हटाकर बनाने का फैसला लेना पड़ा। तालाब की जमीन तो बच गई, लेकिन उसे पानीदार बनाने के लिए नगर निगम की पहल नहीं हो रही है।
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बंद मिला ट्रीटमेंट प्लांट
तालाब के समीप आधा एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है। इस प्लांट से दो पाइप तालाब से जोड़े गए हैं, जो पांच लाख लीटर पानी पहुंचाने के लिए हैं, लेकिन इतना पानी पहुंचता नहीं है। प्लांट की मैदानी सचाई जानने के लिए अमर उजाला की टीम पहुंची तो वह बंद मिला और पानी भी तालाब में नहीं जा रहा था। टीम को देखकर कर्मचारी ने फिर प्लांट शुरू कर दिया और कहने लगा कि प्लांट में आटोमैटिक है। इस प्लांट को 10 साल तक संचालित करने वाली एजेंसी के कर्ताधर्ता मनमीत लुहाड़िया का कहना है कि प्लांट पूरी क्षमता से चलता है, लेकिन तालाब में पानी नहीं रहता है।


कैचमेेंट एरिया हो गया खत्म
इस तालाब को संरक्षित रखने के लिए पूर्व पार्षद समीर चिटनीस ने काफी प्रयास किए थे, लेकिन उनके निधन के बाद जनप्रतिनिधियों ने तालाब की तरफ ध्यान देना बंद कर दिया। आईडीए की स्कीम-140 में कई प्लाॅट तालाब के केचमेंट एरिया में काट दिए गए। चार लेन सड़क के कारण दूसरी तरफ का पानी भी तालाब मे आना बंद हो गया। इस कारण तालाब अब जल्दी सूख जाता है। पूर्व सभापति अजय सिंह नरुका का कहना है कि यदि ट्रीटमेंट प्लांट पूरी क्षमता से चले तो तालाब का जलस्तर ठीक रहता है। पिछले साल जून तक तालाब में पर्याप्त पानी था।

 

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