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Indore News: बेसमेंट में बनी अवैध दुकानों के लिए बिल्डर और निगम अधिकारी भी जिम्मेदार
Sat, 21 Sep 2024 06:42 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sat, 21 Sep 2024 06:42 PM IST
सार
बेसमेंट की टूटती दुकानों पर छलका दुकानदारों का दर्द, हाईकोर्ट के नए आदेश से भी जागी दुकानदारों की उम्मीदें, अहिंसा टॉवर में निगम द्वारा सील किया बेसमेंट का दफ्तर खुलवाया।
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INDORE NEWS
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल, इंदौर
विस्तार
बिल्डिंग के बेसमेंट में पार्किंग की जगह बनी दुकान और दफ्तर सील किए जाने पर उनके मालिक खुलकर तो विरोध नहीं कर रहे, मगर सवाल उठा रहे हैं कि इस गुनाह के लिए क्या वे अकेले जिम्मेदार हैं? बिल्डर और नगर निगम इंजीनियर का कोई गुनाह नहीं?
कई साल से भर रहे प्रापर्टी टैक्स
नगर निगम ने बेसमेंट में पार्किंग की जगह कमर्शियल उपयोग की जांच करने पर पाया कि ज्यादातर जगह दुकान या दफ्तर बनाकर न केवल बेचे गए, बल्कि उसकी रजिस्ट्री भी हुई। बिजली कनेक्शन के साथ ही प्रापर्टी टैक्स भी जमा किया जा रहा। इन लोगों ने बरसों पहले लाखों रुपए देकर दुकान और दफ्तर खरीदे। अब इन्हें हटने के लिए कह रहे हैं तो हाथ में सिर्फ रजिस्ट्री का कागज भर रह जाएगा। आखिर इस नुकसान का खामियाजा उन्हें अकेले क्यों भुगतना पड़ रहा है।
रजिस्ट्री कैसे कर दी गई
प्रशासन की मुहिम से जिनकी दुकान या दफ्तर पर ताले लगे हैं, उनका कहना है कि बिल्डर जब पार्किंग की जगह दुकान बना रहा था, तभी नगर निगम के बिल्डिंग ऑफिसर ने क्यों नहीं रोका। सब-रजिस्ट्रार ने रजिस्ट्री कैसे कर दी? ये दो काम नहीं होते तो कोई दुकान क्यों खरीदता? अब कार्रवाई हो रही है, तो केवल दुकानदार मारा जा रहा है, जबकि बिल्डर और नगर निगम इंजीनियर पर कार्रवाई की कोई बात नहीं कर रहा। इनकी भी तो जिम्मेदारी तय होना चाहिए।
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हाईकोर्ट के आदेश पर खुल गया है अहिंसा टॉवर में बेसमेंट का दफ्तर
बहरहाल, ज्यादातर दुकानदारों की कोशिश है कि प्रशासन को सहमति- पत्र देकर दुकान खोल ली जाए। कुछ ने पत्र दे भी दिए हैं। इनका मानना है कि थोड़ा वक्त मिल जाएगा, तो समझ सकेंगे कि आगे क्या करना है। इस बीच अहिंसा टॉवर में बेसमेंट का दफ्तर हाईकोर्ट के आदेश पर खुल गया है। नगर निगम ने दफ्तर मालिक को नोटिस दिए बिना सील लगा दी थी, जिसे लेकर हाइकोर्ट में अर्जेंट सुनवाई हुई और आदेश की कॉपी मिलने के तीन घंटे में दफ्तर की सील खोलने के लिए कहा गया। दूसरे दुकानदार भी इस रास्ते पर जा सकते हैं कि उन्हें भी नोटिस नहीं मिले हैं। प्रशासन की कार्रवाई में उन जगहों के बेसमेंट जरूर खाली होने की उम्मीद जागी है, जहां पूरी बिल्डिंग का उपयोग कोई एक मालिक कर रहा है। जैसे अस्पताल वगैरह में पार्किंग खाली हो सकती है कि वहां कमर्शियल कामकाज हो रहा था। भले ही कुछ समय के लिए ही सही, मगर पार्किंग में गाड़ियां दिखाई देंगी कि प्रशासन की सख्ती है।
विधायक हार्डिया ने खुलवाई नवनीत टॉवर और नवनीत प्लाजा की दुकानें
प्रशासन ने नवनीत टॉवर और नवनीत प्लाजा में लोअर ग्राउंड पर बनी दुकानों को सील कर दिया था। अधिकारियों का कहना था कि पार्किंग के लिए छोड़ी गई जगह पर दुकानें बना दी हैं। दुकानदारों ने विधायक महेंद्र हार्डिया, महापौर परिषद के सदस्य राजेश उदावत और इलाके के पार्षद पति दिनेश सोनगरा से गुहार लगाई और कहा कि पार्किंग की जगह दुकानें नहीं हैं, फिर भी सील कर दी है। इस पर विधायक हार्डिया ने अधिकारियों से जांच करने के लिए कहा। जांच में जब साफ हो गया कि पार्किंग में दुकानें नहीं बनी हैं, तो तुरंत ही सील खुलवा दी गई। दुकानदारों ने वहीं हार्डिया को हार पहना दिया। दुकान खुलवाने पर हाडिया का स्वागत किया दुकानदारों ने।
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कई साल से भर रहे प्रापर्टी टैक्स
नगर निगम ने बेसमेंट में पार्किंग की जगह कमर्शियल उपयोग की जांच करने पर पाया कि ज्यादातर जगह दुकान या दफ्तर बनाकर न केवल बेचे गए, बल्कि उसकी रजिस्ट्री भी हुई। बिजली कनेक्शन के साथ ही प्रापर्टी टैक्स भी जमा किया जा रहा। इन लोगों ने बरसों पहले लाखों रुपए देकर दुकान और दफ्तर खरीदे। अब इन्हें हटने के लिए कह रहे हैं तो हाथ में सिर्फ रजिस्ट्री का कागज भर रह जाएगा। आखिर इस नुकसान का खामियाजा उन्हें अकेले क्यों भुगतना पड़ रहा है।
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रजिस्ट्री कैसे कर दी गई
प्रशासन की मुहिम से जिनकी दुकान या दफ्तर पर ताले लगे हैं, उनका कहना है कि बिल्डर जब पार्किंग की जगह दुकान बना रहा था, तभी नगर निगम के बिल्डिंग ऑफिसर ने क्यों नहीं रोका। सब-रजिस्ट्रार ने रजिस्ट्री कैसे कर दी? ये दो काम नहीं होते तो कोई दुकान क्यों खरीदता? अब कार्रवाई हो रही है, तो केवल दुकानदार मारा जा रहा है, जबकि बिल्डर और नगर निगम इंजीनियर पर कार्रवाई की कोई बात नहीं कर रहा। इनकी भी तो जिम्मेदारी तय होना चाहिए।
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हाईकोर्ट के आदेश पर खुल गया है अहिंसा टॉवर में बेसमेंट का दफ्तर
बहरहाल, ज्यादातर दुकानदारों की कोशिश है कि प्रशासन को सहमति- पत्र देकर दुकान खोल ली जाए। कुछ ने पत्र दे भी दिए हैं। इनका मानना है कि थोड़ा वक्त मिल जाएगा, तो समझ सकेंगे कि आगे क्या करना है। इस बीच अहिंसा टॉवर में बेसमेंट का दफ्तर हाईकोर्ट के आदेश पर खुल गया है। नगर निगम ने दफ्तर मालिक को नोटिस दिए बिना सील लगा दी थी, जिसे लेकर हाइकोर्ट में अर्जेंट सुनवाई हुई और आदेश की कॉपी मिलने के तीन घंटे में दफ्तर की सील खोलने के लिए कहा गया। दूसरे दुकानदार भी इस रास्ते पर जा सकते हैं कि उन्हें भी नोटिस नहीं मिले हैं। प्रशासन की कार्रवाई में उन जगहों के बेसमेंट जरूर खाली होने की उम्मीद जागी है, जहां पूरी बिल्डिंग का उपयोग कोई एक मालिक कर रहा है। जैसे अस्पताल वगैरह में पार्किंग खाली हो सकती है कि वहां कमर्शियल कामकाज हो रहा था। भले ही कुछ समय के लिए ही सही, मगर पार्किंग में गाड़ियां दिखाई देंगी कि प्रशासन की सख्ती है।
विधायक हार्डिया ने खुलवाई नवनीत टॉवर और नवनीत प्लाजा की दुकानें
प्रशासन ने नवनीत टॉवर और नवनीत प्लाजा में लोअर ग्राउंड पर बनी दुकानों को सील कर दिया था। अधिकारियों का कहना था कि पार्किंग के लिए छोड़ी गई जगह पर दुकानें बना दी हैं। दुकानदारों ने विधायक महेंद्र हार्डिया, महापौर परिषद के सदस्य राजेश उदावत और इलाके के पार्षद पति दिनेश सोनगरा से गुहार लगाई और कहा कि पार्किंग की जगह दुकानें नहीं हैं, फिर भी सील कर दी है। इस पर विधायक हार्डिया ने अधिकारियों से जांच करने के लिए कहा। जांच में जब साफ हो गया कि पार्किंग में दुकानें नहीं बनी हैं, तो तुरंत ही सील खुलवा दी गई। दुकानदारों ने वहीं हार्डिया को हार पहना दिया। दुकान खुलवाने पर हाडिया का स्वागत किया दुकानदारों ने।
