ये पुनर्विकास या विनाश: मणिकर्णिका घाट पर देवी अहिल्याबाई की धरोहर पर चला बुलडोजर, इंदौर में बढ़ रहा गुस्सा
बनारस के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा और घाट के एक हिस्से को ध्वस्त किए जाने से विवाद गहरा गया। इस घटना को लेकर इतिहासकारों और समाज के विभिन्न वर्गों में विरोध देखा जा रहा है। साथ ही सिस्टम पर कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। क्योंकि एक ओर सरकार लोकमाता की त्रि-जन्म शताब्दी समारोह देशभर में मना रही है। वहीं, दूसरी ओर बनारस से आई तस्वीर लोकआस्था पर गहरी चोट कर रही हैं।
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विस्तार
बनारस में प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर तारकेश्वर महादेव मंदिर के समीप देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा और मणिकर्णिका घाट का एक हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया, जिसका विरोध बनारस से इंदौर तक हो रहा है। देवी अहिल्याबाई ने खासगी जागीर से कई धार्मिक और लोकहित के कार्य कराए थे।
देवी अहिल्याबाई एक न्यायप्रिय, धार्मिक और दानवीर होल्कर राजवंश की तीसरी शासिका थीं, जिनका कार्यकाल 28 वर्ष पांच माह (1767-1795) रहा। दो सौ तीस वर्ष बाद भी उनकी कार्यप्रणाली, उनके व्यक्तित्व और दानशीलता को स्मरण किया जाता है। हाल ही में देवी अहिल्याबाई का त्रि-जन्म शताब्दी समारोह देशभर में मनाया गया था। अहिल्याबाई द्वारा अपने कार्यकाल में कराए गए कार्य शानो-शौकत और सत्ता के वैभव के नहीं थे, बल्कि वे लोक और जन-उपयोगी थे।
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गुजरात के सोमनाथ मंदिर के आधुनिक पुनरुद्धार कार्य के 75 वर्ष होने पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ मंदिर गए। यह वही सोमनाथ मंदिर है, जिसके जीर्णोद्धार कार्य में देवी अहिल्याबाई होलकर ने 1783 में सहयोग दिया था।
कितना प्राचीन है घाट
मणिकर्णिका घाट का निर्माण देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा 1791 में करवाया गया था। अपनी पौराणिक मान्यता के कारण यह प्रसिद्ध 84 घाटों में शामिल है। धर्मशास्त्र का इतिहास, जिसके लेखक पांडुरंग वामन काणे हैं, के अनुसार शिव के कान की मणि इसी घाट पर किसी कुंड में गुम हुई थी, इसलिए इस घाट को मणिकर्णिका घाट के नाम से जाना जाता है। इस घाट पर शवों का दाह संस्कार होता है।
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क्या कहते हैं इतिहासकार
प्रसिद्ध इतिहासकार और दशपुर प्राच्य शोध संस्थान के निदेशक डॉ. कैलाश चंद्र पांडेय का कहना है कि देवी अहिल्याबाई होलकर ने देशभर में लोक और जन-उपयोगी कार्य किए। देवी शिवभक्त थीं, इसलिए उन्होंने मणिकर्णिका घाट का कार्य करवाया था। जहां तक उनकी प्रतिमा का सवाल है, उसे कार्य से पहले ही संरक्षित कर लेना था ताकि कोई नुकसान न हो। यह बहुत दुःखद है। होल्कर इतिहासकार और पूर्व कुलपति डॉ. शिवनारायण यादव का कहना है कि इतिहास की धरोहर को संरक्षित किए जाने के बजाय उन्हें नष्ट किया जाना गलत है।
क्या है योजना
जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास योजना का शिलान्यास किया था। घाट का विकास रूपा फाउंडेशन, कोलकाता के फंड से हो रहा है, जिसके तहत 29,350 वर्ग मीटर क्षेत्र में कार्य होना है। मणिकर्णिका घाट में शवों के धुएं के लिए चिमनी और बाढ़ से बचाव का कार्य किया जाना है।
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