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Indore News: इंदौर के पांच नर्सिंग कॉलेज सील, हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई, कई संचालक फरार
Mon, 27 May 2024 08:53 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Mon, 27 May 2024 08:53 PM IST
सार
मप्र का बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज घोटाला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। हजारों स्टूडेंट्स का करियर इसमें दांव पर लग गया है।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर के पांच नर्सिंग कॉलेज को सोमवार को सील किया गया। राजस्व और मेडिकल की टीम ने इन कॉलेजों के गेट पर हाईकोर्ट के नोटिस चस्पा किए और इन्हें सील कर दिया। सोमवार दोपहर अचानक इन कॉलेजों में पहुंची टीमों ने यहां पर मौजूद कर्मचारियों से भी पूछताछ की। दरअसल हाल ही में इन कॉलेजों में अनियमितताओं के चलते हाई कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके बाद सोमवार शाम को एसडीएम ओमप्रकाश बडकुल, एसडीएम घनश्याम धनगर सहित प्रशासन की अलग-अलग टीमों ने इन कॉलेजों को सील करने की कार्रवाई शुरू की।
क्या है मामला
नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े की शुरुआत 2020 में हुई थी। 2019 तक प्रदेश में 450 नर्सिंग कॉलेज रजिस्टर थे। 2020 में कोरोना काल आ गया और इस दौरान 2020 से 2022 तक 200 नए नर्सिंग कॉलेज पंजीकृत हुए। लाखों की संख्या में यहां पर छात्रों ने एडमिशन ले लिए। बाद में छात्रों को परीक्षा और अन्य मामलों को लेकर संदेह होने लगा। छात्रों ने जब अपने स्तर पर जांच की तो पता चला कि कई कॉलेज फर्जी हैं और इन्हें मान्यता नहीं मिली है। इस जांच के बाद उन्होंने साक्ष्य जुटाकर अदालत में याचिकाएं दायर की। जबलपुर में वकील विशाल बघेल और ग्वालियर में वकील दिलीप शर्मा ने कोर्ट में याचिकाएं लगाईं। इन याचिकाओं को सुनने के बाद कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को दे दी। सीबीआई ने पहले चरण में प्रदेश के 700 से ज्यादा नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 308 कॉलेजों की जांच की। इसमें सीबीआई ने 169 नर्सिंग कॉलेजों को सूटेबल यानी पूर्ण, 66 कॉलेजों को अनसूटेबल यानी अपूर्ण कैटेगरी में रखा जबकि, 73 कॉलेजों को अनुपयुक्त बता दिया। इन सभी कॉलेजों में एक लाख से ज्यादा छात्रों ने एडमिशन लिया था।
सीबीआई अधिकारी भी फंसे
इसके बाद इसमें नया मोड़ आया और पता चला कि इस घोटाले की जांच जिन सीबीआई अधिकारियों को दी गई थी वे ही रिश्वत लेकर कॉलेजों को क्लीन चिट दे रहे थे। इतने ही नहीं मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने भी उन कॉलेजों को बेहतर संस्थानों में शामिल कर दिया जिनके संचालक पहले से ही जांच एजेंसी की रिमांड पर हैं। इसके बाद भ्रष्ट सीबीआई अफसरों पर केस दर्ज हुए।
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एक लाख से अधिक छात्रों का भविष्य अंधेरे में
अभी तक इस मामले में सीबीआई के अधिकारियों समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई की टीम इन सभी से दिल्ली में पूछताछ कर रही है। इनसे पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं। प्रदेश सरकार नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने संबंधी आयोग गठन करने पर काम कर रही है। साथ ही छात्रों के लिए राज्य स्तर पर प्रवेश परीक्षा लेने पर भी विचार किया जा रहा है। इन सबके बीच छात्रों का भविष्य भी अधर में लटका है। जिन छात्र-छात्राओं की अभी परीक्षा रूकी हुई। उस पर सरकार को जल्द निर्णय लेना है। इससे एक लाख से ज्यादा बच्चे प्रभावित है।
क्यों सील हुए पांचों कॉलेज
इंदौर के ये पांचों कॉलेज छात्रों को परीक्षा दिलाने के बाद मार्कशीट नहीं दे पा रहे थे। इनमें से कुछ कॉलेजों ने छात्रों से पूरी फीस भी ले रखी है और छात्रों का आरोप है कि हमारी फीस भी नहीं लौटाई जा रही है। कई छात्रों के दस्तावेज भी इन कॉलेजों के पास में जमा हैं। इन सभी शिकायतों की वजह से हाईकोर्ट ने इन्हें सील करने का आदेश दिया है। जांच के लिए बनाई गई टीमें छात्रों के भी बयान ले रही हैं।
इंदौर जिले में पांच नर्सिंग कॉलेज सील
दत्तात्रेय, राय एकेडमी, वर्मा यूनियन नर्सिंग, मृत्युंजय नर्सिंग और देवी अहिल्या नर्सिंग कॉलेज।
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क्या है मामला
नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े की शुरुआत 2020 में हुई थी। 2019 तक प्रदेश में 450 नर्सिंग कॉलेज रजिस्टर थे। 2020 में कोरोना काल आ गया और इस दौरान 2020 से 2022 तक 200 नए नर्सिंग कॉलेज पंजीकृत हुए। लाखों की संख्या में यहां पर छात्रों ने एडमिशन ले लिए। बाद में छात्रों को परीक्षा और अन्य मामलों को लेकर संदेह होने लगा। छात्रों ने जब अपने स्तर पर जांच की तो पता चला कि कई कॉलेज फर्जी हैं और इन्हें मान्यता नहीं मिली है। इस जांच के बाद उन्होंने साक्ष्य जुटाकर अदालत में याचिकाएं दायर की। जबलपुर में वकील विशाल बघेल और ग्वालियर में वकील दिलीप शर्मा ने कोर्ट में याचिकाएं लगाईं। इन याचिकाओं को सुनने के बाद कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को दे दी। सीबीआई ने पहले चरण में प्रदेश के 700 से ज्यादा नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 308 कॉलेजों की जांच की। इसमें सीबीआई ने 169 नर्सिंग कॉलेजों को सूटेबल यानी पूर्ण, 66 कॉलेजों को अनसूटेबल यानी अपूर्ण कैटेगरी में रखा जबकि, 73 कॉलेजों को अनुपयुक्त बता दिया। इन सभी कॉलेजों में एक लाख से ज्यादा छात्रों ने एडमिशन लिया था।
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सीबीआई अधिकारी भी फंसे
इसके बाद इसमें नया मोड़ आया और पता चला कि इस घोटाले की जांच जिन सीबीआई अधिकारियों को दी गई थी वे ही रिश्वत लेकर कॉलेजों को क्लीन चिट दे रहे थे। इतने ही नहीं मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने भी उन कॉलेजों को बेहतर संस्थानों में शामिल कर दिया जिनके संचालक पहले से ही जांच एजेंसी की रिमांड पर हैं। इसके बाद भ्रष्ट सीबीआई अफसरों पर केस दर्ज हुए।
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एक लाख से अधिक छात्रों का भविष्य अंधेरे में
अभी तक इस मामले में सीबीआई के अधिकारियों समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई की टीम इन सभी से दिल्ली में पूछताछ कर रही है। इनसे पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं। प्रदेश सरकार नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने संबंधी आयोग गठन करने पर काम कर रही है। साथ ही छात्रों के लिए राज्य स्तर पर प्रवेश परीक्षा लेने पर भी विचार किया जा रहा है। इन सबके बीच छात्रों का भविष्य भी अधर में लटका है। जिन छात्र-छात्राओं की अभी परीक्षा रूकी हुई। उस पर सरकार को जल्द निर्णय लेना है। इससे एक लाख से ज्यादा बच्चे प्रभावित है।
क्यों सील हुए पांचों कॉलेज
इंदौर के ये पांचों कॉलेज छात्रों को परीक्षा दिलाने के बाद मार्कशीट नहीं दे पा रहे थे। इनमें से कुछ कॉलेजों ने छात्रों से पूरी फीस भी ले रखी है और छात्रों का आरोप है कि हमारी फीस भी नहीं लौटाई जा रही है। कई छात्रों के दस्तावेज भी इन कॉलेजों के पास में जमा हैं। इन सभी शिकायतों की वजह से हाईकोर्ट ने इन्हें सील करने का आदेश दिया है। जांच के लिए बनाई गई टीमें छात्रों के भी बयान ले रही हैं।
इंदौर जिले में पांच नर्सिंग कॉलेज सील
दत्तात्रेय, राय एकेडमी, वर्मा यूनियन नर्सिंग, मृत्युंजय नर्सिंग और देवी अहिल्या नर्सिंग कॉलेज।
