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MP Election Result 2023: 15 सीटों पर प्रत्याशियों को भारी पड़ा नोटा, हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट इसमें पड़े
Mon, 04 Dec 2023 05:29 PM IST
दिनेश शर्मा
कमलेश सेन, इंदौर
कमलेश सेन, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 04 Dec 2023 05:29 PM IST
सार
नोटा का प्रयोग 2013 के चुनाव से आरंभ हुआ था। यदि कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं हो तो वोटर यह बटन दबा सकता है। मप्र विधानसभा चुनाव 2013 में 1.90, वर्ष 2018 में 1.42 और 2023 में 0.98 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया।
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नोटा
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विस्तार
प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों के परिणाम घोषित हो गए हैं। कुछ विधानसभा क्षेत्र ऐसे रहे हैं, जहां विजयी मतों पर नोटा भारी रहा है। यानी जितने अंतर से हार जीत हुई, उससे ज्यादा वोट नोटा 'उक्त प्रत्याशियों में से कोई पसंद नहीं' को मिले हैं। यदि नोटा के मत किसी दल के प्रत्याशी को मिलते तो उसकी हार जीत में बदल जाती।
ऐसी ही एक सीट शाजापुर की है, जहां भाजपा के अरुण भीमावद ने कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री हुकुमचंद कराड़ा को 28 मतों से पराजित किया, जबकि यहां नोटा में 1534 मत दिए गए। इसी तरह प्रदेश में शिवराजसिंह मंत्रिमंडल के मंत्री कमल पटेल हरदा में 870 मतों से हार गए परंतु वहां नोटा में 2375 मत आए। मतदाता की पसंद जब कोई उम्मीदवार नहीं होता है तो इस तरह की स्थिति बनती रहेगी।
राइट तू रिकॉल और नोटा अब मतदाताओं के लिए असरदार उपाय है, जिसे वोटर अपनी मर्जी से इस्तेमाल कर सकता है। अब उम्मीदवारों को भी अपने प्रचार के दौरान मतदाताओं को आगाह करना होगा कि नोटा के बजाय हमें मौका दें।
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2013 से मिला नोटा का अधिकार
जो भी हो इस बार 2023 में प्रदेश में कुछ सीटों पर नोटा की अहम भूमिका रही। नोटा का प्रयोग 2013 के चुनाव से आरंभ हुआ था। यदि कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं हो तो वोटर यह बटन दबा सकता है। मप्र विधानसभा चुनाव 2013 में 1.90, वर्ष 2018 में 1.42 और 2023 में 0.98 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया। जाहिर है नोटा के इस्तेमाल का प्रतिशत धीरे धीरे कम होता जा रहा है।
इन सीटों पर हार जीत में नोटा भारी
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ऐसी ही एक सीट शाजापुर की है, जहां भाजपा के अरुण भीमावद ने कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री हुकुमचंद कराड़ा को 28 मतों से पराजित किया, जबकि यहां नोटा में 1534 मत दिए गए। इसी तरह प्रदेश में शिवराजसिंह मंत्रिमंडल के मंत्री कमल पटेल हरदा में 870 मतों से हार गए परंतु वहां नोटा में 2375 मत आए। मतदाता की पसंद जब कोई उम्मीदवार नहीं होता है तो इस तरह की स्थिति बनती रहेगी।
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राइट तू रिकॉल और नोटा अब मतदाताओं के लिए असरदार उपाय है, जिसे वोटर अपनी मर्जी से इस्तेमाल कर सकता है। अब उम्मीदवारों को भी अपने प्रचार के दौरान मतदाताओं को आगाह करना होगा कि नोटा के बजाय हमें मौका दें।
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2013 से मिला नोटा का अधिकार
जो भी हो इस बार 2023 में प्रदेश में कुछ सीटों पर नोटा की अहम भूमिका रही। नोटा का प्रयोग 2013 के चुनाव से आरंभ हुआ था। यदि कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं हो तो वोटर यह बटन दबा सकता है। मप्र विधानसभा चुनाव 2013 में 1.90, वर्ष 2018 में 1.42 और 2023 में 0.98 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया। जाहिर है नोटा के इस्तेमाल का प्रतिशत धीरे धीरे कम होता जा रहा है।
इन सीटों पर हार जीत में नोटा भारी
| विधानसभा क्षेत्र | विजयी दल | मतों से जीत | नोटा में पड़े मत |
| मांधाता | भाजपा | 589 | 1544 |
| धरमपुरी | भाजपा | 356 | 2455 |
| शाजापुर | भाजपा | 28 | 1534 |
| गुन्नौर | भाजपा | 1160 | 2012 |
| सोहागपुर | भाजपा | 1762 | 2362 |
| भीकनगांव | कांग्रेस | 603 | 1799 |
| राजपुर | कांग्रेस | 890 | 1683 |
| मनावर | कांग्रेस | 708 | 1814 |
| महिदपुर | कांग्रेस | 290 | 1417 |
| सेंधवा | कांग्रेस | 1677 | 5098 |
| थांदला | कांग्रेस | 1340 | 3108 |
| गोहद | कांग्रेस | 697 | 790 |
| हरदा | कांग्रेस | 870 | 2375 |
| सेमरिया | कांग्रेस | 637 | 1068 |
| टिमरनी | कांग्रेस | 950 | 2561 |
