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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   MP Election: Hoshgambad seat is Kurukshetra of family war, in 1998 Congress defeated BJP by 15 votes.

MP Election: पारिवारिक रण का कुरुक्षेत्र है होशगांबाद सीट, 1998 में कांग्रेस ने BJP को 15 वोटों से हराया था

Wed, 25 Oct 2023 01:18 PM IST
Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Wed, 25 Oct 2023 01:18 PM IST
सार

होशंगाबाद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस और भाजपा ने दो भाइयों को टिकट देकर इस क्षेत्र को चर्चा में ला दिया है। पूर्व स्पीकर डॉ. सीताशरण शर्मा भाजपा से तो गिरजा शंकर शर्मा कांग्रेस से मैदान में हैं।

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MP Election: Hoshgambad seat is Kurukshetra of family war, in 1998 Congress defeated BJP by 15 votes.
मध्यप्रदेश चुनाव 2023 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नर्मदापुरम यानी होशंगाबाद विधानसभा क्षेत्र नर्मदा किनारे बसा है। यहां सेठानी घाट पर नर्मदा का मनोरम दृश्य नजर आता है। इस बार चुनाव में होशंगाबाद की खूब चर्चा हो रही है, कारण यह है कि यहां से कांग्रेस और भाजपा ने दो भाइयों को टिकट देकर इस क्षेत्र को चर्चा में ला दिया है। पूर्व स्पीकर डॉ. सीताशरण शर्मा भाजपा से तो गिरजा शंकर शर्मा कांग्रेस से मैदान में हैं।
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मध्यभारत का विधानसभा क्षेत्र रहा होशंगाबाद
1952 से 1972 तक यहां से कांग्रेस जीतती रही, यानि 20 साल तक कांग्रेस का गढ़ रहा। 1975 में जब देश में आपातकाल और जयप्रकाश के आंदोलन की गूंज थी उस दौर में 1977 में जनता पार्टी की प्रचंड विजय हुई थी। इसके बाद 1980 से 1998 तक कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा विजयी होती रही। मधुकर राव हर्णे का तीन बार विजय और तीन बार पराजय का रिकॉर्ड है।
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सविता ने 15 मतों से हर्णे को पराजित किया
1990 में मधुकर राव हर्णे ने कांग्रेस के विनय कुमार दीवान को पराजित किया था, वर्ष 1998 में विनयकुमार दीवान की बेटी सविता दीवान ने मधुकरराव हर्णे को मात्र 15 मतों से पराजित किया था। 2003 में हर्णे से सरिता दीवान पराजित हो गईं। इस तरह कभी हार तो कभी जीत का खेल चलता रहा। वर्ष 2003 में गिरिजाशंकर शर्मा इटारसी भाजपा से चुनाव जीत चुके हैं। 2008 में वे होशंगाबाद से भाजपा से विजयी रहे। इसके बाद पार्टी पर उपेक्षा का आरोप लगाकर गिरिजाशंकर शर्मा कांग्रेस में शामिल हो गए।
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तीन बार सीताशरण विजयी रहे
1990 से 1998 तक तीन बार इटारसी से सीताशरण शर्मा भाजपा से विजयी रहे। 2018 में वे होशंगाबाद से भाजपा से विजयी रहे थे। वे 2014 से 2019 तक प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे थे। सीताशरण शर्मा से सरताज सिंह चुनाव में पराजित हो गए थे। इसके बाद सरताज सिंह ने भाजपा छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। वहां भी उनका मन नहीं लगा कुछ समय बाद वे पुनः भाजपा में आ गए थे।

गोद गए हैं गिरिजाशंकर शर्मा
गिरिजाशंकर शर्मा और सीताशरण शर्मा भाई -भाई है। यदि प्रदेश विधानसभा की सदस्य पुस्तिका देखें तो गिरिजाशंकर शर्मा के पिता स्व. नन्हेलाल दर्ज है और सीताशरण शर्मा के पिता का नाम रामलाल शर्मा दर्ज है। विश्वसनीय सूत्रों से पता चला कि गिरिजाशंकर शर्मा गोद गए थे। असल में वे दोनों सगे भाई हैं। चुनावों में हर बार कई रिश्तेदार उम्मीदवार के रूप में खड़े होते हैं और आपसी सबंध तार-तार होते रहे हैं। देखना है कि भाई-भाई की सियासी जंग में किसको जीत हासिल होगी। यह भी सच है कि चुनाव में कोई भी जीते विधायक पद घर में ही रहेगा।

होशंगाबाद सीट की रोचक जानकारी
  • 1998 में सरिता दीवान मात्र 15 मतों से विजयी हुई थी।
  • 2013 में सीताशरण शर्मा सर्वाधिक 49,296 मतों से विजयी होने का रिकॉर्ड बना चुके हैं।
  • चुनाव में अब तक के सर्वाधिक 18 उम्मीदवार 2018 में थे।
  • 1990 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राधा-रानी भी मैदान में थे।
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