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MP Election: खंडवा में अपना गढ़ बचाने भाजपा की नई रणनीति, कांग्रेस भी किला भेदने को तैयार
Sun, 12 Nov 2023 07:43 AM IST
दिनेश शर्मा
कमलेश सेन, इंदौर
कमलेश सेन, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 12 Nov 2023 07:43 AM IST
सार
1990 से पिछले 34 वर्ष से खंडवा सीट पर भाजपा का एकक्षत्र राज है। हुकुम पहलवान यादव, पूरणमल शर्मा और देवेंद्र वर्मा विजय होते रहे हैं। खंडवा से भगवंतराव मंडलोई, हुकुम यादव और देवेंद्र वर्मा तीन -तीन बार विजयी हुए हैं।
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मध्यप्रदेश चुनाव 2023
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
खंडवा जिसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जगजाहिर है। प्रख्यात साहित्यकार माखनलाल चतुर्वेदी की कर्म स्थली, गायक और फ़िल्मकार किशोर कुमार की जन्म स्थली रही है खंडवा। धार्मिक रूप से संत सिंगाजी की समाधि स्थल के समीप और दादाजी धूनी का स्थल खंडवा में है। खंडवा अपनी राजनीतिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। नगर पालिका के सदस्य से प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले खंडवा के भगवंतराव मंडलोई ही थे। वे दो बार 1957 कार्यवाहक और 1962 -63 में प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।
खंडवा विधानसभा 1952 एवं 1957 में आरक्षित सीट थी। 1962 से 2003 तक यह सीट सामान्य रही। नए परिसीमन में यह सीट अनुसूचित जाति के आरक्षित कर दी गई। 1952, 57 एवं 1962 में कांग्रेस से भगवंतराव मंडलोई चुने गए थे। 1967 में जनसंघ के कृष्णराव, 1972 में कांग्रेस फिर जनता लहर 1977 में जनता पार्टी का इस सीट पर कब्ज़ा रहा। भगवंतराव मंडलोई की बहू नंदा मंडलोई इस चुनाव में पराजित हो गई थीं। 1980 में कांग्रेस के गंगाचरण मिश्रा विजय रहे थे। इस चुनाव में नंदा मंडलोई ने निर्दलीय चुनाव में अपना भाग्य आजमाया, पर उनकी जमानत जब्त हो गई थी। 1985 में नंदा मंडलोई कांग्रेस से विजय रहीं। 1990 में वे भाजपा के हुकुम पहलवान से हार गई थीं।
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वर्ष 1990 से पिछले 34 वर्ष से खंडवा सीट पर भाजपा का एकक्षत्र राज है। हुकुम पहलवान यादव, पूरणमल शर्मा और देवेंद्र वर्मा विजय होते रहे हैं। खंडवा से भगवंतराव मंडलोई, हुकुम यादव और देवेंद्र वर्मा तीन -तीन बार विजयी हुए हैं। इस बार खंडवा से पिछले तीन चुनावों में लगातार विजय होते रहे देवेंद्र वर्मा को टिकट न देते हुए भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष कंचन मुकेश तनवे को टिकट दिया है। उन्हें भी टिकट विरोध का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस से कुंदन मालवीय को उम्मीदवार घोषित किया था, उनका भी कांग्रेस में विरोध हुआ है। दोनों दलों में आंतरिक विरोध है। देखना है क्या भाजपा का यह किला कांग्रेस भेद पाएगी। यह चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगा।
मतदाता संख्या
नोटा का इस्तेमाल : 2013 -4314 और 2018 में 2581
रोचक जानकारी
कुछ रोचक नाम
1952 से 2018 के मध्य कुछ नाम रोचक रहे, जैसे किसान धामु, भास्कर राव, लालू, मामू, छविकान्त, रखो भैया और बाली भैया प्रमुख हैंं।
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खंडवा विधानसभा 1952 एवं 1957 में आरक्षित सीट थी। 1962 से 2003 तक यह सीट सामान्य रही। नए परिसीमन में यह सीट अनुसूचित जाति के आरक्षित कर दी गई। 1952, 57 एवं 1962 में कांग्रेस से भगवंतराव मंडलोई चुने गए थे। 1967 में जनसंघ के कृष्णराव, 1972 में कांग्रेस फिर जनता लहर 1977 में जनता पार्टी का इस सीट पर कब्ज़ा रहा। भगवंतराव मंडलोई की बहू नंदा मंडलोई इस चुनाव में पराजित हो गई थीं। 1980 में कांग्रेस के गंगाचरण मिश्रा विजय रहे थे। इस चुनाव में नंदा मंडलोई ने निर्दलीय चुनाव में अपना भाग्य आजमाया, पर उनकी जमानत जब्त हो गई थी। 1985 में नंदा मंडलोई कांग्रेस से विजय रहीं। 1990 में वे भाजपा के हुकुम पहलवान से हार गई थीं।
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वर्ष 1990 से पिछले 34 वर्ष से खंडवा सीट पर भाजपा का एकक्षत्र राज है। हुकुम पहलवान यादव, पूरणमल शर्मा और देवेंद्र वर्मा विजय होते रहे हैं। खंडवा से भगवंतराव मंडलोई, हुकुम यादव और देवेंद्र वर्मा तीन -तीन बार विजयी हुए हैं। इस बार खंडवा से पिछले तीन चुनावों में लगातार विजय होते रहे देवेंद्र वर्मा को टिकट न देते हुए भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष कंचन मुकेश तनवे को टिकट दिया है। उन्हें भी टिकट विरोध का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस से कुंदन मालवीय को उम्मीदवार घोषित किया था, उनका भी कांग्रेस में विरोध हुआ है। दोनों दलों में आंतरिक विरोध है। देखना है क्या भाजपा का यह किला कांग्रेस भेद पाएगी। यह चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगा।
मतदाता संख्या
| कुल मतदाता | 272559 |
| पुरुष | 138034 |
| महिला | 134508 |
| थर्ड जेंडर | 17 |
नोटा का इस्तेमाल : 2013 -4314 और 2018 में 2581
रोचक जानकारी
- 1977 में पहली उम्मीदवार नंदा मंडलोई
- सर्वाधिक मतदान वर्ष 2018 में न्यूनतम मतदान 1952 में हुआ था।
- लगातार तीन बार विजय होने में भाजपा के देवेंद्र वर्मा का नाम हैं।
- सबसे कम उम्मीदवार मैदान में वर्ष 62, 67 और 2013 में 3 रहे, सर्वाधिक वर्ष 1993 में 14 रहे हैं।
- सबसे कम मतों से विजय हुकुम यादव की वर्ष 1998 में 71 मतों से रही है।
- सबसे बड़ी विजय वर्ष 2013 में देवेंद्र वर्मा की 34071 मतों से रही है।
कुछ रोचक नाम
1952 से 2018 के मध्य कुछ नाम रोचक रहे, जैसे किसान धामु, भास्कर राव, लालू, मामू, छविकान्त, रखो भैया और बाली भैया प्रमुख हैंं।
