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MP Election 2023: चौथी लिस्ट से बदले कई समीकरण, बगावत की आशंका खत्म करने आई बैकफुट पर भाजपा
सार
अब सबकी निगाहें उन बचे हुए 94 नामों पर हैं, और अटकल यह लगाई जा रही है कि इस सूची में कितने विधायकों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
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MP Election 2023
- फोटो : AMAR UJALA
विस्तार
बगावत की आशंका और मजबूत विकल्प न मिलने के कारण मध्यप्रदेश में भाजपा बैकफुट पर आ गई है। सोमवार को जारी पार्टी उम्मीदवार की चौथी सूची से यह साफ हो गया है कि मापदंड पर मैनेजमेंट भारी पड़ा और जिन लोगों को उम्मीदवारी की दौड़ से बाहर बताया जा रहा था, वे दमदारी दिखाकर टिकट पाने में सफल हो गए। कई विधानसभा क्षेत्रों में ना चाहते हुए भी वर्तमान विधायकों को भी मौका देना पड़ा। वैसे पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने इन नामों की अनुशंसा करने से परहेज नहीं किया था। अब सबकी निगाहें उन बचे हुए 94 नामों पर हैं, और अटकल यह लगाई जा रही है कि इस सूची में कितने विधायकों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
सर्वे में कमजोर माने गए थे बिसाहूलाल और प्रेमसिंह
शिवराज सरकार के दो कैबिनेट मंत्री बिसाहूलाल सिंह और प्रेमसिंह पटेल पार्टी के ही सर्वे में कमजोर माने गए थे, लेकिन जातीय समीकरणों में दोनों की मजबूती ने उन्हें फिर टिकट दिलवा दिया। बिसाहूलाल का गोंड आदिवासियों में और पटेल का भील-भिलाला आदिवासियों में अच्छा प्रभाव माना जाता है। पार्टी के पास यह फीडबैक पहुंचा था कि इन दोनों को उम्मीदवारी से वंचित किया गया तो विंध्य खासकर शहडोल, अनूपपुर, उमरिया तथा निमाड़ यानी बड़वानी, खरगोन और धार के बड़े हिस्से में इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।
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कई मंत्रियों को अभयदान देना पड़ा
अरविंद सिंह भदौरिया, बृजेंद्रप्रसाद सिंह, भारतसिंह कुशवाह को लेकर पार्टी के पास अच्छा फीडबैक नहीं था। इन्हें फिर मौका देने को लेकर प्रदेश के नेताओं में भी एक राय नहीं थी। इन क्षेत्रों से जो नाम विकल्प के रूप में सामने आए थे, उनमें जीत की संभावना बहुत कम होने की वजह से पार्टी को इन्हें फिर से टिकट दे दिया। विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम का भी कोई मजबूत विकल्प पार्टी ढूंढ नहीं पाई। पिछले चुनाव में बहुत कम मतों से जीते गौतम को फिर उम्मीदवार बनाया गया है।
भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद यादव को मौका
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव तीसरी बार उज्जैन दक्षिण से टिकट लाने में कामयाब हो गए। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अपने प्रभाव का उपयोग कर उज्जैन के मास्टर प्लान में हेर-फेर जैसे गंभीर आरोप थे। उनके ओएसडी को तो भ्रष्टाचार में लिप्त होने की वजह से बर्खास्त करना पड़ा। भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी और संघ के एक दिग्गज के हस्तक्षेप के चलते यादव को फिर मौका देना पड़ा।
पुराने चेहरों को वापस लाना पड़ा
पूर्व मंत्री करणसिंह वर्मा को पार्टी ने एक बार फिर इच्छावर से मौका दिया है। वर्मा 2018 का चुनाव हारे थे। भाजपा की राजनीति में वे मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के पसंदीदा माने जाते हैं। पार्टी नेतृत्व के खिलाफ हमेशा मुखर रहे अजय विश्नोई को फिर पाटन से मौका देना पड़ा। 2018 में चुनाव जीतने के बावजूद शिवराज ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में नहीं लिया था।
विरोध के बावजूद मालिनी गौड़ को टिकट
इंदौर चार से तीन बार की विधायक मालिनी गौड़ का पार्टी में ही भारी विरोध था। कई पूर्व पार्षद और पार्टी पदाधिकारी खुलकर मुखालफत कर रहे थे। इन लोगों ने मुख्यमंत्री और नरेंद्रसिंह तोमर के सामने अपनी नाराजगी का इजहार भी किया था। पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद मेघराज जैन ने तो इस क्षेत्र को लेकर जो ट्वीट किया था, उसकी पूरे प्रदेश में चर्चा थी। इसके बावजूद पार्टी ने वहां से गौड़ को फिर मौका दे दिया।
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सर्वे में कमजोर माने गए थे बिसाहूलाल और प्रेमसिंह
शिवराज सरकार के दो कैबिनेट मंत्री बिसाहूलाल सिंह और प्रेमसिंह पटेल पार्टी के ही सर्वे में कमजोर माने गए थे, लेकिन जातीय समीकरणों में दोनों की मजबूती ने उन्हें फिर टिकट दिलवा दिया। बिसाहूलाल का गोंड आदिवासियों में और पटेल का भील-भिलाला आदिवासियों में अच्छा प्रभाव माना जाता है। पार्टी के पास यह फीडबैक पहुंचा था कि इन दोनों को उम्मीदवारी से वंचित किया गया तो विंध्य खासकर शहडोल, अनूपपुर, उमरिया तथा निमाड़ यानी बड़वानी, खरगोन और धार के बड़े हिस्से में इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।
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कई मंत्रियों को अभयदान देना पड़ा
अरविंद सिंह भदौरिया, बृजेंद्रप्रसाद सिंह, भारतसिंह कुशवाह को लेकर पार्टी के पास अच्छा फीडबैक नहीं था। इन्हें फिर मौका देने को लेकर प्रदेश के नेताओं में भी एक राय नहीं थी। इन क्षेत्रों से जो नाम विकल्प के रूप में सामने आए थे, उनमें जीत की संभावना बहुत कम होने की वजह से पार्टी को इन्हें फिर से टिकट दे दिया। विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम का भी कोई मजबूत विकल्प पार्टी ढूंढ नहीं पाई। पिछले चुनाव में बहुत कम मतों से जीते गौतम को फिर उम्मीदवार बनाया गया है।
भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद यादव को मौका
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव तीसरी बार उज्जैन दक्षिण से टिकट लाने में कामयाब हो गए। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अपने प्रभाव का उपयोग कर उज्जैन के मास्टर प्लान में हेर-फेर जैसे गंभीर आरोप थे। उनके ओएसडी को तो भ्रष्टाचार में लिप्त होने की वजह से बर्खास्त करना पड़ा। भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी और संघ के एक दिग्गज के हस्तक्षेप के चलते यादव को फिर मौका देना पड़ा।
पुराने चेहरों को वापस लाना पड़ा
पूर्व मंत्री करणसिंह वर्मा को पार्टी ने एक बार फिर इच्छावर से मौका दिया है। वर्मा 2018 का चुनाव हारे थे। भाजपा की राजनीति में वे मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के पसंदीदा माने जाते हैं। पार्टी नेतृत्व के खिलाफ हमेशा मुखर रहे अजय विश्नोई को फिर पाटन से मौका देना पड़ा। 2018 में चुनाव जीतने के बावजूद शिवराज ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में नहीं लिया था।
विरोध के बावजूद मालिनी गौड़ को टिकट
इंदौर चार से तीन बार की विधायक मालिनी गौड़ का पार्टी में ही भारी विरोध था। कई पूर्व पार्षद और पार्टी पदाधिकारी खुलकर मुखालफत कर रहे थे। इन लोगों ने मुख्यमंत्री और नरेंद्रसिंह तोमर के सामने अपनी नाराजगी का इजहार भी किया था। पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद मेघराज जैन ने तो इस क्षेत्र को लेकर जो ट्वीट किया था, उसकी पूरे प्रदेश में चर्चा थी। इसके बावजूद पार्टी ने वहां से गौड़ को फिर मौका दे दिया।
