Indore Bawadi Accident:सास-बहु आहूती देते-देते चढ़ गई मौत की बलि, बेटा गार्डन में खेलने लगा, इसलिए बच गया
इस हादसे में ११ साल का सोमेश खत्री भी मौत के मुंह में समा गया। वह भी अपने पिता के साथ मंदिर आया था, लेकिन मंदिर में पिता प्रवेश करते, तभी उन्हें फोन आया कि दुकान के बाहर गाड़ी आ चुकी है, उसे खाली कराना है।
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पटेल नगर बावड़ी हादसा कई लोगों के जीवन में ऐसा खालीपन लेकर आया, जो कभी नहीं भर सकता है। एक परिवार से मां, पत्नी और दादी को काल छिनकर ले गया। परिवार में पति, बेटा और पोता अकेले रह गए। यह परिवार है लक्ष्मीकांत भाई पटेल का। रामनवमी की खुशनुमना सुबह परिवारजन सजे-धजे थे। सासू मां दक्षाबेन पटेल ने अपनी बहू कनक से कहा मंदिर में यज्ञ का निमत्रंण आया है, चल थोड़ी देर बैठकर आते है।
उन्हें क्या पता कि अब वे कभी लौटकर नहीं आएंगे। बहू कनक बेटे को भी साथ ले गई थी, लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी कि वह हवन में मां और दादी के साथ बैठने के बजाए गार्डन में खेलने निकल गया और हादसे से बच गया। पटेल परिवार इस इस हादसे में चार महिला सदस्यों को खोया है। परिवारजनों को जो लोग ढांढस बंधाने आते है, वे आंगन में रखी चारों महिलाओं की तस्वीर देख खुद आंसू नहीं रोक पाते है।
बेटे को मंदिर छोड़ दुकान पर आई गाड़ी खाली कराने चले गए पिता
इस हादसे में ११ साल का सोमेश खत्री भी मौत के मुंह में समा गया। वह भी अपने पिता के साथ मंदिर आया था, लेकिन मंदिर में पिता प्रवेश करते, तभी उन्हें फोन आया कि दुकान के बाहर गाड़ी आ चुकी है, उसे खाली कराना है। पिता ने बेटे को कहा कि तु हवन में बैठ, मैं गाड़ी खाली कराकर आता हुं, लेकिन जब वे लौटे तो सोमेश का कही अता-पता नहीं था।
उसका शव भी हादसे के १४ घंटे बाद निकला। परिजनों को लग रहा था कि शायद वह हवन में न बैठा हो और कही चले गया, लेकिन जब रात को उसका शव निकला तो आखरी उम्मीद भी टूट गई।
