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सत्ता की सियासत: बड़ी जीत में सबसे बड़े मददगार, मालवा-निमाड़ के कई जिलों में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला
Sun, 03 Dec 2023 09:22 PM IST
दिनेश शर्मा
अरविंद तिवारी, इंदौर
अरविंद तिवारी, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 03 Dec 2023 09:22 PM IST
सार
भाजपा के दो मंत्री और वरिष्ठ नेता भी इंदौर-उज्जैन संभाग में चुनाव हारे हैं। यहां की 66 में से 48 सीट पर भाजपा को जीत मिली है, जबकि कांग्रेस मात्र 17 सीट पर ही सिमटकर रह गई।
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मालवा निमाड़ की सीटों का गणित
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश में भाजपा की प्रचंड जीत का सेहरा एक बार फिर मालवा निमाड़ के सिर बंध गया है। तमाम पूर्वानुमान को धता बताते हुए यहां एक बार लगभग 2013 जैसे नतीजे दोहराए गए हैं। प्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौर में तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। यहां कांग्रेस नौ में से एक भी सीट नहीं जीत पाई है। इंदौर 1993 में भी भाजपा को ऐसी ही सफलता मिली थी। हालांकि तब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी। मोदी मैजिक का नतीजा बताए जा रहे इन परिणामों में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। भाजपा के दो मंत्री और वरिष्ठ नेता भी इंदौर-उज्जैन संभाग में चुनाव हारे हैं। यहां की 66 में से 48 सीट पर भाजपा को जीत मिली है, जबकि कांग्रेस मात्र 17 सीट पर ही सिमटकर रह गई। सैलाना सीट पर भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश डोडियार ने जीत हासिल की।
मालवा-निमाड़ यानी इंदौर-उज्जैन संभाग से सबसे बड़ी जीत इंदौर-2 में रमेश मैंदोला के खाते में दर्ज हुई है। मैंदोला 1 लाख 7 हजार 47 वोट से चुनाव जीते हैं। वे लगातार चौथी बार यहां से विधायक चुने गए हैं। कांग्रेस के जो दिग्गज नेता चुनाव हारे हैं। उनमें पूर्व मंत्री और कमलनाथ के खास सिपहासालार सज्जन सिंह वर्मा, पूर्व मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ, हुकुमसिंह कराड़ा, बाला बच्चन, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी, भाजपा से कांग्रेस में आए पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी, दिग्विजय मंत्रिमंडल में मंत्री रहे सुभाष सोजतिया और नरेंद्र नाहटा शामिल हैं। भाजपा में शिवराज मंत्रिमंडल के सदस्य राज्यवर्धन सिंह चुनाव हार गए हैं। उन्हें तीन महीने पहले ही भाजपा से कांग्रेस में गए भंवरसिंह शेखावत ने शिकस्त दी। पशुपालन मंत्री प्रेमसिंह पटेल भी बड़वानी सीट पर चुनाव हार गए हैं। उन्हें राजेंद्र मंडलोई ने हराया। सेंधवा सीट पर कांग्रेस के नए चेहरे जयस से ताल्लुक रखने वाले मोंटू सोलंकी ने पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अंतरसिंह आर्य को शिकस्त दी। इसी तरह पहली बार चुनाव लडऩे वाले विपिन जैन ने मंदसौर सीट पर भाजपा के वरिष्ठ विधायक यशपालसिंह सिसोदिया को शिकस्त दी।
विजयवर्गीय की बड़ी जीत, त्रिकोणीय संघर्ष में उषा ठाकुर को फायदा
मालवा निमाड़ में भाजपा के चुनाव अभियान की कमान संभालने वाले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को बड़ी जीत मिली है। उन्होंने इंदौर-1 से कांग्रेस के वर्तमान विधायक संजय शुक्ला को 50 हजार से ज्यादा मतों से शिकस्त दी है। विजयवर्गीय इसके पहले इंदौर-4, इंदौर-2 और महू से विधायक रह चुके हैं। यहां से उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। विजयवर्गीय ने इस प्रचंड जीत को नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जुगल जोड़ी का करिश्मा बताया है। मंत्री उषा ठाकुर महू सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष के बीच अपनी सीट बचाने में सफल रहीं। उन्होंने कांग्रेस के बागी पूर्व विधायक अंतरसिंह दरबार को हराया। यहां पर कांग्रेस के रामकिशोर शुक्ला तीसरे नंबर पर रहे।
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उतार-चढ़ाव के बीच अंततः जीते सखलेचा
प्रदेश के एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा कड़े मुकाबले में अंतिम दौर में जीत पाए। शुरुआती दौर में वे कांग्रेस उम्मीदवार समंदर पटेल से पीछे चल रहे थे, लेकिन आखिरी के तीन-चार राउंड में उन्होंने बढ़त बनाई और अंतत 2364 वोट से जीत गए। यहां पर भाजपा के बागी पूरणमल अहीर को भी 32000 से ज्यादा वोट प्राप्त हुए।
आदिवासी अंचल में कमजोर रहा भाजपा का प्रदर्शन
अंचल की आदिवासी बाहुल्य सीटों पर जरूर भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। यहां 2018 के चुनाव में भी भाजपा कांग्रेस से काफी पीछे रही थी। खरगोन जिले की दोनों आदिवासी सीट भीकनगांव और भगवानपुरा कांग्रेस के खाते में गई हैं, जबकि बड़वानी में चार में से 2 सीट बड़वानी और सेंधवा में कांग्रेस के उम्मीदवार जीते हैं। धार में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित पांच में से चार सीटें कुक्षी, गंधवानी, मनावर और सरदारपुर कांग्रेस को मिली, जबकि धरमपुरी में भाजपा जीती है। अलीराजपुर में दो में से एक। झाबुआ में तीन में से 2 सीट पर भी कांग्रेस और एक पर भाजपा को बढ़त मिली है। पूर्वी निमाड़ यानी खंडवा-बुरहानपुर की दोनों आदिवासी सीट हरसूद और पंधाना भाजपा को मिली। रतलाम में ग्रामीण सीट भाजपा को मिली, जबकि सैलाना में भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश डोडियार चुनाव जीते। डोडियार जयस के सक्रिय कार्यकर्ता रहे और इस बार भारत आदिवासी पार्टी से चुनाव लड़े थे। देवास की बागली सीट पर भी भाजपा को सफलता मिली है।
कांग्रेस के जो बड़े आदिवासी नेता मालवा-निमाड़ में चुनाव जीते हैं, उनमें कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पूर्व मंत्री उमंग सिंघार और कमलनाथ मंत्रिमंडल में शामिल रहे सुरेन्द्रसिंह हनी बघेल शामिल हैं। गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी सीटों पर मिली शिकस्त के बाद भाजपा ने संघ के नेटवर्क के माध्यम से काम शुरू किया था। पेसा एक्ट लागू होने बाद भाजपा को उम्मीद थी कि उसे यहां अच्छी सफलता मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस बार इन सीट पर कांग्रेस और जयस के बीच भी तालमेल नहीं जम पाया था, इसके बावजूद कांग्रेस को अच्छी सफलता मिली।
मालवा निमाड़ - दिग्गज जो हारे
भाजपा
बदनावर - राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव
बड़वानी - प्रेमसिंह पटेल
सेंधवा - अंतरसिंह आर्य
मंदसौर - यशपालसिंह सिसोदिया
महिदपुर - बहादुरसिंह
सुसनेर-राणा विक्रम सिंह
कांग्रेस
सोनकच्छ - सज्जन सिंह वर्मा
राऊ - जीतू पटवारी
महेश्वर - डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ
राजपुर - बाला बच्चन
खरगोन - रवि जोशी
खातेगांव - दीपक जोशी
बुरहानपुर - सुरेंद्रसिंह शेरा
खाचरौद - दिलीप गुर्जर
सैलाना-हर्ष विजय गहलोत
मालवा-निमाड़ में बड़ी जीत
इंदौर-2 - रमेश मैंदोला (भाजपा)
इंदौर-4 - मलिनी गौड़ (भाजपा)
सांवेर - तुलसी सिलावट (भाजपा)
मल्हारगढ़ - जगदीश देवड़ा (भाजपा)
राऊ - मधु वर्मा (भाजपा)
कुक्षी - सुरेंद्रसिंह हनी बघेल (कांग्रेस)
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मालवा-निमाड़ यानी इंदौर-उज्जैन संभाग से सबसे बड़ी जीत इंदौर-2 में रमेश मैंदोला के खाते में दर्ज हुई है। मैंदोला 1 लाख 7 हजार 47 वोट से चुनाव जीते हैं। वे लगातार चौथी बार यहां से विधायक चुने गए हैं। कांग्रेस के जो दिग्गज नेता चुनाव हारे हैं। उनमें पूर्व मंत्री और कमलनाथ के खास सिपहासालार सज्जन सिंह वर्मा, पूर्व मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ, हुकुमसिंह कराड़ा, बाला बच्चन, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी, भाजपा से कांग्रेस में आए पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी, दिग्विजय मंत्रिमंडल में मंत्री रहे सुभाष सोजतिया और नरेंद्र नाहटा शामिल हैं। भाजपा में शिवराज मंत्रिमंडल के सदस्य राज्यवर्धन सिंह चुनाव हार गए हैं। उन्हें तीन महीने पहले ही भाजपा से कांग्रेस में गए भंवरसिंह शेखावत ने शिकस्त दी। पशुपालन मंत्री प्रेमसिंह पटेल भी बड़वानी सीट पर चुनाव हार गए हैं। उन्हें राजेंद्र मंडलोई ने हराया। सेंधवा सीट पर कांग्रेस के नए चेहरे जयस से ताल्लुक रखने वाले मोंटू सोलंकी ने पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अंतरसिंह आर्य को शिकस्त दी। इसी तरह पहली बार चुनाव लडऩे वाले विपिन जैन ने मंदसौर सीट पर भाजपा के वरिष्ठ विधायक यशपालसिंह सिसोदिया को शिकस्त दी।
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मालवा निमाड़ में भाजपा के चुनाव अभियान की कमान संभालने वाले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को बड़ी जीत मिली है। उन्होंने इंदौर-1 से कांग्रेस के वर्तमान विधायक संजय शुक्ला को 50 हजार से ज्यादा मतों से शिकस्त दी है। विजयवर्गीय इसके पहले इंदौर-4, इंदौर-2 और महू से विधायक रह चुके हैं। यहां से उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। विजयवर्गीय ने इस प्रचंड जीत को नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जुगल जोड़ी का करिश्मा बताया है। मंत्री उषा ठाकुर महू सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष के बीच अपनी सीट बचाने में सफल रहीं। उन्होंने कांग्रेस के बागी पूर्व विधायक अंतरसिंह दरबार को हराया। यहां पर कांग्रेस के रामकिशोर शुक्ला तीसरे नंबर पर रहे।
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प्रदेश के एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा कड़े मुकाबले में अंतिम दौर में जीत पाए। शुरुआती दौर में वे कांग्रेस उम्मीदवार समंदर पटेल से पीछे चल रहे थे, लेकिन आखिरी के तीन-चार राउंड में उन्होंने बढ़त बनाई और अंतत 2364 वोट से जीत गए। यहां पर भाजपा के बागी पूरणमल अहीर को भी 32000 से ज्यादा वोट प्राप्त हुए।
आदिवासी अंचल में कमजोर रहा भाजपा का प्रदर्शन
अंचल की आदिवासी बाहुल्य सीटों पर जरूर भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। यहां 2018 के चुनाव में भी भाजपा कांग्रेस से काफी पीछे रही थी। खरगोन जिले की दोनों आदिवासी सीट भीकनगांव और भगवानपुरा कांग्रेस के खाते में गई हैं, जबकि बड़वानी में चार में से 2 सीट बड़वानी और सेंधवा में कांग्रेस के उम्मीदवार जीते हैं। धार में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित पांच में से चार सीटें कुक्षी, गंधवानी, मनावर और सरदारपुर कांग्रेस को मिली, जबकि धरमपुरी में भाजपा जीती है। अलीराजपुर में दो में से एक। झाबुआ में तीन में से 2 सीट पर भी कांग्रेस और एक पर भाजपा को बढ़त मिली है। पूर्वी निमाड़ यानी खंडवा-बुरहानपुर की दोनों आदिवासी सीट हरसूद और पंधाना भाजपा को मिली। रतलाम में ग्रामीण सीट भाजपा को मिली, जबकि सैलाना में भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश डोडियार चुनाव जीते। डोडियार जयस के सक्रिय कार्यकर्ता रहे और इस बार भारत आदिवासी पार्टी से चुनाव लड़े थे। देवास की बागली सीट पर भी भाजपा को सफलता मिली है।
कांग्रेस के जो बड़े आदिवासी नेता मालवा-निमाड़ में चुनाव जीते हैं, उनमें कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पूर्व मंत्री उमंग सिंघार और कमलनाथ मंत्रिमंडल में शामिल रहे सुरेन्द्रसिंह हनी बघेल शामिल हैं। गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी सीटों पर मिली शिकस्त के बाद भाजपा ने संघ के नेटवर्क के माध्यम से काम शुरू किया था। पेसा एक्ट लागू होने बाद भाजपा को उम्मीद थी कि उसे यहां अच्छी सफलता मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस बार इन सीट पर कांग्रेस और जयस के बीच भी तालमेल नहीं जम पाया था, इसके बावजूद कांग्रेस को अच्छी सफलता मिली।
मालवा निमाड़ - दिग्गज जो हारे
भाजपा
बदनावर - राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव
बड़वानी - प्रेमसिंह पटेल
सेंधवा - अंतरसिंह आर्य
मंदसौर - यशपालसिंह सिसोदिया
महिदपुर - बहादुरसिंह
सुसनेर-राणा विक्रम सिंह
कांग्रेस
सोनकच्छ - सज्जन सिंह वर्मा
राऊ - जीतू पटवारी
महेश्वर - डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ
राजपुर - बाला बच्चन
खरगोन - रवि जोशी
खातेगांव - दीपक जोशी
बुरहानपुर - सुरेंद्रसिंह शेरा
खाचरौद - दिलीप गुर्जर
सैलाना-हर्ष विजय गहलोत
मालवा-निमाड़ में बड़ी जीत
इंदौर-2 - रमेश मैंदोला (भाजपा)
इंदौर-4 - मलिनी गौड़ (भाजपा)
सांवेर - तुलसी सिलावट (भाजपा)
मल्हारगढ़ - जगदीश देवड़ा (भाजपा)
राऊ - मधु वर्मा (भाजपा)
कुक्षी - सुरेंद्रसिंह हनी बघेल (कांग्रेस)
