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Indore: महाराष्ट्र के वोटरों को साधने की कोशिश इंदौर से, रेसीडेंसी कोठी का नाम शिवाजी कोठी रखा, विरोध भी शुरू

Mon, 21 Oct 2024 01:38 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Mon, 21 Oct 2024 01:38 PM IST
सार

नाम बदलने की कवायद से भाजपा को महाराष्ट्र चुनाव में इंदौर और आसपास से मदद मिल सकती है, लेकिन नामकरण की राजनीति में नया पेंच भी आ गया है। सोमवार को धनगर समाज के युवा प्रदर्शन करने पहुंचे। उन्होंने  रेसीडेंसी कोठी का नाम बदले जाने की मांग की।

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Indore: Trying to woo the voters of Maharashtra from Indore, Residency Kothi was named Shivaji Kothi, protest
रेसीडेंसी कोठी का नाम बदलने की मांग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश के रास्ते राजनीतिक लाभ पाने की कोशिश शुरू हो गई है और उस पर भी राजनीति शुरू हो गई है। हाल ही में इंदौर की रेसीडेंसी कोठी का नाम शिवाजी कोठी रखने का प्रस्ताव नगर निगम परिषद की बैठक में मंजूर किया गया।

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इस फैसले का विरोध इंदौर के धनगर समाज के संगठन ने शुरू कर दिया। उनका कहना है कि देशभर में देवी अहिल्या बाई का त्रिशाताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। इंदौर की प्रतिष्ठति रेसीडेंसी कोठी का नाम देवी अहिल्या के नाम पर होना चाहिए।

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रेसीडेंसी कोठी नाम शिवाजी कोठी रखकर भाजपा ने महाराष्ट्र के चुनाव में वोटरों को साधने की कोशिश की है। दरअसल इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में तीन लाख से अधिक मराठीभाषी परिवार रहते है।उनमें से कई लोगों के खेत व पैतृक निवास महाराष्ट्र में है और कुछ वहां के वोटर भी है। इसके अलावा इंदौर निवासी कई परिवारों के रिश्तेदार भी महाराष्ट्र में रहते है।

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नाम बदलने की कवायद से भाजपा को महाराष्ट्र चुनाव में इंदौर और आसपास से मदद मिल सकती है, लेकिन नामकरण की राजनीति में नया पेंच भी आ गया है। सोमवार सुबह इंदौर के धनगर समाज के युवा रेसीडेंसी कोठी पर प्रदर्शन करने पहुंचे। उन्होंने खुद ही रेसीडेंसी कोठी के नाम के नीचे देवी अहिल्या कोठी का बैनर लगा दिया। प्रदर्शन में शामिल जतिन थोरात, रणजीत भांड ने कहा कि उनके लिए शिवाजी महाराज देवता तुल्य है, लेकिन देवी अहिल्या ने देशभर में कई धर्मशालाएं, घाट बनवाए। यदि इंदौर की कोठी का नाम ही बदला जाना है तो फिर उसे देवी अहिल्या के नाम पर किया जाना चाहिए।

 

काशिद को बनाया अध्यक्ष

महाराष्ट्र के जालना से  स्वाति युवराज काशिद इंदौर में ब्याही गई है। तीन साल से उन्होंने मराठीभाषी समाजों में दखल बढ़ाई है और जालना से इंदौर तक पैदल यात्रा भी निकाली। स्वाति भाजपा से जुड़ी है और इंदौर में कई आयोजन भी कराती है। उन्हें 17 अक्टूबर को अखिल भारतीय महिला मराठीभाषी महासंघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।




इस महासंघ से लाखोंं मराठीभाषी परिवार जुड़े है। चुनावी दौर में उनकी नियुक्ति को भी मराठी भाषी वोटरों को साधने की कोशिश बताई जा रही है,क्योकि इंदौर संभाग में काफी मराठीभाषी परिवारों के रिश्तेदार महाराष्ट्र में है और कई महाराष्ट्र के कई व्यापारी कारोबार के सिलसिले में इंदौर आते है। इंदौर संभाग की सीमा भी महाराष्ट्र से जुड़ी है।

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