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Indore: राजवाड़ा की छठी मंजिल तक जा सकेंगे पर्यटक, अहिल्या देवी पर आधारित म्यूजियम बनेगा

Sat, 27 Jan 2024 08:37 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Sat, 27 Jan 2024 08:37 PM IST
सार

विभाग के उपसंचालक प्रकाश पराजंपे ने बताया कि म्यूजियम में देवी अहिल्या की गादी, उनके द्वारा देश के अलग अलग शहरों में कराए गए निर्माण व उनके जीवन से जुड़ी जानकारी डिजिटल और म्यूयल के जरिए पर्यटकों को दिखाई जा सकेगी।

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Indore: Tourists will be able to go up to the sixth floor of Rajwada, a museum based on Ahilya Devi will be bu
राजवाड़ा - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

इंदौर का दिल कहे जाने वाले राजवाड़ा को पर्यटकों के लिए नई सुविधाएं से जोड़ा जा रहा है। पहले राजवाड़ा की उपरी मंजिलों तक पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित था, लेकिन अब छठी मंजिल पर्यटकों के लिए खोली जा रही है। वहां तक पहुंच कर पर्यटक शहर का व्यू देख सकेंगे और यहां देवी अहिल्या पर आधारित म्यूजियम को भी देख सकेंगे। इसके लिए पुरात्तव विभाग ने योजना तैैयार कर ली है।

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छह माह के भीतर म्यूजियम तैयार हो जाएगा। विभाग छठी मंजिल तक जाने के लिए कैप्सूल लिफ्ट भी लगाने पर विचार कर रहा है, ताकि वरिष्ठजन और दिव्यांग भी राजवाड़ा की सभी मंजिलों तक पहुंच सके।

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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत नगर निगम ने राजवाड़ा को 30 करोड़ की लागत से संवारा है। तीन साल में तैयार हुए राजवाड़ा को देखने के लिए रोज हजारों पर्यटक आ रहे है, लेकिन अभी भीतर देखने के लिए कुछ खास नहीं है। बस शाम को लाइट एंड साउंड शो संचालित होता है।

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पुरात्व व पर्यटन विकास निगम मिलकर राजवाड़ा के भीतर म्यूजियम बना रहा है। विभाग के उपसंचालक प्रकाश पराजंपे ने बताया कि म्यूजियम में देवी अहिल्या की गादी, उनके द्वारा देश के अलग अलग शहरों में कराए गए निर्माण व उनके जीवन से जुड़ी जानकारी डिजिटल और म्यूयल के जरिए पर्यटकों को दिखाई जा सकेगी। यह प्रदर्शनी भी राजवाड़ा की तीसरी या छठी मंजिल पर होगी।

चार लाख में हुआ था राजवाड़ा का निर्माण

होलकर राजवंश ने वर्ष 1818 में राजवाड़ा का निर्माण कराया था। तब इसके निर्माण पर चार लाख रुपये खर्च हुए थे। 1834 में राजवाड़ा में आग लग गई थी। तब उसकी उपरी मंजिल जल गई थी। बाद में फिर राजवाड़ा की मरम्मत की गई। 1984 के दंगों में राजवाड़ा का पिछला हिस्सा जल गया था। जिसे आठ साल पहले संवारा गया। वहां मल्हार मंदिर बनाया गया है।

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