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Indore: इंदौर निगम परिषद के तीन साल- नवाचारों पर जोर, मूलभूत सुविधाएं कमजोर

Tue, 05 Aug 2025 07:06 AM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Tue, 05 Aug 2025 07:06 AM IST
सार

नगर निगम परिषद ने तीन सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बांड के जरिए जुटाई। इस राशि का उपयोग जलूद में सोलर प्लांट बनाने में किया जाना था, लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हो पाया है। नर्मदा के चौथे चरण का काम भी शुरू नहीं हो सका।

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Indore: Three years of Indore Municipal Council - emphasis on innovation, weak basic facilities
इंदौर शहर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर की स्थानीय सरकार यानी इंदौर नगर निगम की निर्वाचित परिषद को मंगलवार को तीन साल पूरे हो गए। इन तीन साल में शहर की सफाई व्यवस्था बरकरार रही और  स्वच्छता में इंदौर देश में सिरमौर बना रहा। इंदौर ने स्वच्छता में अष्टसिद्धि यानी लगातार आठ साल तक देश में पहले नंबर पर रहने में बड़ी कामयाबी हासिल की। हालांकि, मेयर पुष्य मित्र भार्गव के नेतृत्व वाली निगम परिषद की अन्य बड़ी घोषणाएं तीन साल में भी पूरी नहीं हो पाईं। अभी तक नर्मदा के चौथे चरण का काम शुरू नहीं हो पाया है और न शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पटरी पर आ सकी है।

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तीन साल पहले जब पुष्य मित्र भार्गव इंदौर के मेयर का चुनाव जीते थे, तो उन्होंने कहा था कि हम आने वाले 50 वर्षों के हिसाब से इंदौर की जरूरतों पर ध्यान देंगे। मेयर ने स्मार्ट क्लास, उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को कोचिंग, उद्यानों में योग कक्षाएं व खुली व्यायामशालाएं जैसे नवाचारों पर जोर दिया, लेकिन शहरवासी गंदे पानी, सड़कों पर गड्ढे जैसी मूलभूत समस्याओं से अभी भी जूझ रहे हैं।
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300 करोड़ रुपये बांड से जुटाए, पूरा नहीं हुआ सोलर प्लांट
नगर निगम ने 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बांड के जरिए जुटाई। इस राशि का उपयोग जलूद में सोलर प्लांट बनाने में किया जाना था, लेकिन अभी तक इसका काम पूरा नहीं हो पाया है। नर्मदा के चौथे चरण का काम भी शुरू नहीं हो सका है। शहर के पुराने क्षेत्रों में सीवरेज लाइन के काम पर जोर रहा। नगर निगम सीमा में शामिल 29 गांवों में भी सीवरेज, पेयजल लाइन के काम शुरू हुए, लेकिन इन्हें पूरा होने में अभी लंबा वक्त लगेगा।
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ट्रैफिक मित्र बनाए, खुद ट्रैफिक संभाला
मेयर ने खुद कई मार्गों पर जाकर ट्रैफिक संभाला, शहर में ट्रैफिक मित्र बनाए, जो ट्रैफिक व्यवस्था देखते हैं, लेकिन ट्रैफिक सुधार को लेकर ठोस काम नहीं हुए। शहर के मार्गों पर रैली-जुलूस को लेकर गाइडलाइन का पालन नहीं होता। उनके कारण शहरवासियों को अक्सर जाम झेलना पड़ता है।

नए मार्गों का निर्माण नहीं
शहर में सड़कों का चौड़ीकरण तो किया जा रहा है, लेकिन नए मार्गों के निर्माण पर ध्यान नहीं दिया गया। नए मार्गों से ट्रैफिक में आसानी होती है। पांच साल से जिन नए मार्गों का निर्माण जारी है। वे भी पूरे नहीं हो पाए। एमआर-4 आठ साल बाद भी कुमेड़ी बस स्टैंड से नहीं जुड़ पाई और जवाहर मार्ग से गौतमपुरा तक बनी रिवर साइड रोड पलसीकर काॅलोनी से नहीं जुड़ सकी।


इतने ब्रिज कभी नहीं बने
तीन साल में हमने काॅलोनियों में सड़कें बनाईं। वर्षों से जिन क्षेत्रों में ड्रेनेज, पेयजल लाइन के काम नहीं हुए थे। उसे पूरा किया गया। जितने ब्रिज शहर में बन रहे हैं, उतने पहले कभी एक साथ नहीं बने। हुकुमचंद मिल की जमीन का निराकरण किया गया और मजदूरों की बकाया राशि का भुगतान किया गया।
-पुष्य मित्र भार्गव, मेयर इंदौर नगर निगम

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