Indore:इस बार मौसम ने दिया साथ, कोंकण के तटों पर हापुस की बहार
रत्नागिरी, देवगढ़ (कोंकण) के आम उत्पादक वहां के विशिष्ट हापूस आम और अन्य उत्पाद लेकर इंदौर आए है। पहले दिन अंदाजन तकरीबन 12 हजार दर्जन आम खरीदे गए। एक ही जगह हापुस आम की अलग-अलग किस्में इंदौरवासियों को भी प्रभावित कर रही है।
विस्तार
पिछले साल बेमौसम बाारिश ने फलों के राजा हापुस आम का जायका बिगाड़ दिया था। उत्पादन अाधा हो गया था। इस बार मौसम ने साध दिया और कोंकण के तटों पर हापुस आमों की बहार आई हुई है। मेंगो जत्रा मेें आए कोंकण के किसान बताते है कि इस बार उत्पादन अच्छा है। इस कारण हापुस आम भी सस्ता है।
मराठी सोशल ग्रुप के सालाना आयोजन मेंगो जत्रा में सुबह से लेकर शाम तक हापुस आम के शौकिन आम का स्वाद चखने के लिए उमड़ रहे है। आयोजक सुधीर दांडेकर व राजेश शाह ने बताया कि जत्रा में करीब 23 से अधिक आम उत्पादकों ने हिस्सा लिया।
रत्नागिरी, देवगढ़ (कोंकण) के आम उत्पादक वहां के विशिष्ट हापूस आम और अन्य उत्पाद लेकर इंदौर आए है। पहले दिन अंदाजन तकरीबन 12 हजार दर्जन आम खरीदे गए। एक ही जगह हापुस आम की अलग-अलग किस्में इंदौरवासियों को भी प्रभावित कर रही है।
केसरिया और खुुशबूदार होता हैै हापुस
हापुस आम कोंकण के देवगढ़ और रत्नागिरी क्षेत्र मे ही पाया जाता है, विशेष रूप से अपने ख़ूबसूरत आकार और मीठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।हापुस आम सबसे स्वादिष्ट होता है। इसका रंग केसरियां होता है और आम खुशबूदार होता है।
यह आम अपने विशेष स्वाद, मिठास के लिए प्रसिद्ध है। इसका रंग और गंध भी अन्य आमों से अलग होता है। यह आम स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होता है। इसका चमकदार रंग और भारी फल भी इसे अन्य आमों से अलग बनाता है। हापुस आम में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। इसके सेवन से ब्लडप्रेशर नियंत्रित रहता है।
गुठलियां ले जा रहा वन विभाग
जत्रा में संस्था ने नाम मात्र के शुल्क पर हापुस आम के चखने की व्यवस्था की है। शुक्रवार को छह सौ आम लोगों ने खाए। हापुस की जो गुठलियां बच रही है। वह वन विभाग को सौंपी जा रही है ताकि वे उसकी गुठलियों से हापुस आम के पौधे तैयार कर सके।
