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Indore:इंदौर का एक मंदिर ऐसा भी है, जहां हजारों तोते आते हैं हनुमानजी की प्रसाद खाने के लिए

Sun, 20 Jul 2025 06:16 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Sun, 20 Jul 2025 06:16 PM IST
सार

सुबह साढ़े पांच बजे ज्वार डालने का काम शुरू होता है। इसके बाद तोतों के आने का सिलसिला शुरू हो जात है। उनके मीठे कलरव से परिसर गुजांयमान हो जात है। श्रावण मास के समय तोतों की संख्या बढ़ जाती है। आधे पौन घंटे में बाजारा साफ हो जाता है।

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Indore: There is a temple in Indore where thousands of parrots come to eat Hanumanji's Prasad
मंदिर की छत पर तोते आते है रोज सुबह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर के पश्चिमी क्षेत्र में करीब 200 वर्ष पुराना पंचकुइयां श्री राम मंदिर का नजारा हर सुबह हैरान करने वाला होता है। मंदिर परिसर में हरे रंग की चादर सी नजर आती है। परिसर के खेड़ापति बालाजी मंदिर को नवैद्य दिखाकर तोतों के लिए ज्वार डाली जाती है। चाहे कैसा भी मौसम हो, हजारों की संख्या तोते नियमित रूप से यहां आते हैं। तोतों को ज्वार डालने का कार्य रमेश अग्रवाल सहित अन्य सेवाद्वारों द्वारा किया जाता है।

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सुबह साढ़े पांच बजे ज्वार डालने का काम शुरू होता है। इसके बाद तोतों के आने का सिलसिला शुरू हो जात है। उनके मीठे कलरव से परिसर गुजांयमान हो जात है। श्रावण मास के समय तोतों की संख्या बढ़ जाती है। आधे पौन घंटे में बाजारा साफ हो जाता है और तोते अपनी-अपनी मंजिल की और उड़ जाते है।

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Indore: There is a temple in Indore where thousands of parrots come to eat Hanumanji's Prasad
छत पर ज्वार का भोज करते तोते। - फोटो : अमर उजाला

ध्वज पर बैठते है तोते

कुछ तोते मंदिर के गुंबद पर लगे ध्वज पर भी बैठते है। इसके बाद उनके भंडारे का सिलसिला शुरू हो जाता है। मंदिर की छत पर ज्वार बिछते ही धीरे-धीरे तोतों का जमघट लगने लगता है, फिर उड़ कर पेड़ पर बैठ जाते हैं।

Indore: There is a temple in Indore where thousands of parrots come to eat Hanumanji's Prasad
भोजन के बाद तोते उड़ जाते है। - फोटो : अमर उजाला

महामंडलेश्वर रामगोपाल दास महाराज बताते है कि पंचकुइयां क्षेत्र में संतों ने बहुत तपस्या की है। यह एक तपोभूमि है। यहां संतों ने पांच कुएं बनाए थे। तब होलकर राजा ने इस क्षेत्र का नाम पंचकुईयां नाम दिया। परिसर में काफी हरियाली भी है। सैकड़ों प्रजाति के पक्षी यहां रहते है। सबसे ज्यादा तोते नजर आते है।

शहरभर से तोते रोज सुबह ज्वार ग्रहण करने आते हैं, उन्हे भी भक्त संत रूपी मानते है। सेवादार तोतों को दी जाने वाली ज्वार की गुणवत्ता का विशेष रूप से ध्यान रखते है, ताकि तोते बीमार न पड़ जाए। सुबह होने वाले तोतों के भंडारे को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में जुटते है।

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