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Indore: समय के साथ बदला सराफा चौपाटी का स्वाद, फास्ट फूड भी हुआ शामिल

Fri, 28 Nov 2025 08:46 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Fri, 28 Nov 2025 08:46 PM IST
सार

वैसे तो सराफा सब्जी -पूरी के लिए प्रसिद्ध थ। यहाँ के भोजनालय की प्रसिद्धि प्रदेश भर में है।मोरसली गली खाने की जन्मस्थली रही है ,मोरसली गली पराठे वाली गली के नाम से प्रसिद्ध रही है ,यही से चल कर खान -पान की संस्कृति  सराफे में प्रवेश कर गई।

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Indore: The taste of Sarafa Chowpatty has changed with time, fast food has also been included.
सराफा चौपाटी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर स्वस्छता के लिए पहचाना जाता है तो नमकीन और खान -पान के लिए अपनी एक अलग ही पहचान रखता है।  प्रवासी भारतीय सम्मेलन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी जी ने सराफा और छप्पन दुकानों की तारीफ कर चर्चा का  केंद्र बना दिया, लेकिन अभी सराफा फिर चर्चा में है।

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यहां पारंपरिक व्यंजनों के अलावा दूसरी दुकानें भी लग रही है और तय समय से पहले चौपाटी लगने का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। नगर निगम तय सूची के हिसाब से ही चौपाटी लगने दे रहा है। इसका विरोध भी हो रहा है, लेकिन यह भी सच है कि अब चौपाटी पहले से ज्यादा खुली नजर आ रही है। पहले सराफा चौपाटी में पारंपरिक व मालवी व्यंजन मिलते थे, लेकिन समय के साथ चौपाटी का स्वाद भी बदला। फास्ट फूट व्यंजनों ने चौपाटी में जगह बना ली।

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कैसे हुई शरुआत

सराफा चौपाटी में पहले पहले से तैयार व्यंजनों को बेचा जाता था। पहले बाजारों में बड़े थाल में मिठाई सिर रख लोग बेचा करते थे । रात के समय थाल वाले सराफे में ओटलो पर रात्रि में बैठने लगे।  धीरे -धीरे यह प्रचलन सराफा चौपाटी में तब्दील हो गया।

क्या है पारम्परिक व्यंजन

मालवा और निमाड़ में भोजन में राजस्थान का प्रभाव है। इंदौर में खान -पान सेवा में कार्यरत अधिकतर कारीगर राजस्थान के है। मालवा जिन  मिठाई और व्यंजन जिनके लिए प्रसिद्ध है। उनमे दहीबड़ा,भजिये,कांजीवाड़ा ,कचोरी ,आलूबड़ा ,दूध -जलेबी , मक्खन बड़े ,घेवर फेनी ,गराडू ,मुंग और गाजर का हलवा,रबड़ी,कलाकंद ,मावे मिश्री के लड्डू ,पेड़े ,गुलाबजामुन और मावा बाटी, छोले -टिकिया , मालपुए ,लस्सी -शिंकजी ,भुट्टे के लड्डू और ठण्ड में गजक ,गर्मी में आईस्क्रीम की दुकानें सराफा के ओटलों पर लगा करती थी। 



 

वैसे तो सराफा सब्जी -पूरी के लिए प्रसिद्ध थ। यहाँ के भोजनालय की प्रसिद्धि प्रदेश भर में है।मोरसली गली खाने की जन्मस्थली रही है ,मोरसली गली पराठे वाली गली के नाम से प्रसिद्ध रही है ,यही से चल कर खान -पान की संस्कृति  सराफे में प्रवेश कर गई। प्रसिद्ध नगर नियोजक पैट्रिक गिडीज  ने 1918 में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में मोरसली गली को फ़ूड स्ट्रीट के नाम से उल्लेख किया था।
 

समय के साथ आया बदलाव

मिठाई और नमकीन में समय के साथ बदलाव आया ,दक्षिण के इडली सांभर ,मसाला डोसा हो या बिहार का लिट्टी चोखा ,नारियल पानी ,फ्रूट सलाद ,पिज्जा ,बर्गेर, सेन्डबीच ,फ्रेंच फ्राइज ,पाव भाजी और पराठे , चायनीज ,मोमोज अदि  दुकानों से विवाद  निर्मित हुआ।  नए  खाने की दुकानों ने समय से पूर्व सराफे में प्रवेश कर दुकान लग जाना भी विवाद की वजह है।

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